अगर आप एक वेतनभोगी (Salaried) टैक्सपेयर हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। आयकर विभाग ने असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए नए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फॉर्म्स अधिसूचित कर दिए हैं। भारत में ज्यादातर मध्यम वर्ग के करदाता अपनी रिटर्न दाखिल करने के लिए ITR-1 (सहज) फॉर्म का ही चुनाव करते हैं। लेकिन इस बार सरकार ने इस फॉर्म के नियमों में कुछ क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। अगर आपने पुराने ढर्रे पर या बिना जानकारी के रिटर्न फाइल की, तो आपका फॉर्म 'डिफेक्टिव' (अमान्य) घोषित हो सकता है और आपको विभाग से सीधा नोटिस मिल सकता है। आइए जानते हैं वे तीन बड़े बदलाव क्या हैं।
म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार के मुनाफे की एंट्री
अब तक का नियम यह था कि अगर आपकी कमाई सैलरी के अलावा शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड के मुनाफे (Capital Gain) से होती थी, तो आपको अनिवार्य रूप से भारी-भरकम ITR-2 फॉर्म भरना पड़ता था। लेकिन इस साल से मध्यम वर्ग को बड़ी राहत दी गई है। अब आप लिस्टेड इक्विटी और म्यूचुअल फंड से होने वाले लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) को भी ITR-1 में दिखा सकते हैं। हालांकि, इसमें एक बड़ी शर्त है यह मुनाफा ₹1.25 लाख तक ही होना चाहिए। यदि आपका मुनाफा इस सीमा से एक रुपया भी ज्यादा हुआ और आपने ITR-1 भर दिया, तो आपकी रिटर्न अमान्य हो जाएगी। ऐसे में करदाताओं को अपने पोर्टफोलियो का सटीक हिसाब रखना होगा।
दो घर वालों को भी मिली ITR-1 की सुविधा
पहले ITR-1 केवल उन लोगों के लिए सीमित था जिनके पास केवल एक ही घर (चाहे वह खुद रहने के लिए हो या किराए पर) होता था। एक से अधिक संपत्ति होने पर सीधे ITR-2 का रुख करना पड़ता था। अब सरकार ने दो हाउस प्रॉपर्टी से आय वाले करदाताओं को भी ITR-1 के दायरे में शामिल कर लिया है। लेकिन यहाँ सावधानी बरतने की जरूरत है। आपकी रेंटल इनकम, म्युनिसिपल टैक्स और टैक्स डिडक्शन का पूरा विवरण आपके AIS (Annual Information Statement) से हूबहू मिलना चाहिए। आयकर विभाग का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिस्टम अब इतना एडवांस हो गया है कि डेटा में जरा सी विसंगति पाते ही वह तुरंत नोटिस जेनरेट कर देगा।
LTCG का नया गणित और टैक्स दरें
बजट 2024-25 के फैसलों का असर अब असेसमेंट ईयर 2026-27 के फॉर्म्स में साफ दिख रहा है। अब सभी एसेट्स पर LTCG की दरें स्टैंडर्ड कर दी गई हैं बिना इंडेक्सेशन के 12.5% और इंडेक्सेशन के साथ 20%। रिटर्न भरते समय अब आपको 'Schedule CG' में निवेश और बिक्री की सटीक तारीखें देनी होंगी। चूंकि साल के बीच में टैक्स दरों में बदलाव हुए थे, इसलिए ट्रांजैक्शन की गलत तारीख देना 'अंडर-रिपोर्टिंग' माना जा सकता है, जिससे आप पर भारी जुर्माना लग सकता है।
AIS और HRA के सख्त नियम
अब आपके AIS में 'कंसोलिडेटेड TDS कोड' दिखाई देंगे, जिसका मतलब है कि बैंक ब्याज से लेकर डिविडेंड तक का एक-एक पैसा विभाग की नजर में है। साथ ही, अब केवल फर्जी रेंट रसीद लगाकर HRA क्लेम करना भारी पड़ सकता है। नए नियमों के तहत अब आपको अपने मकान मालिक का PAN कार्ड नंबर देना अनिवार्य कर दिया गया है।
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