Road safety : केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने देश में होने वाले सड़क हादसों और उनमें जाने वाली जान-माल की हानि पर गहरा दुख और चिंता व्यक्त की है। उन्होंने साफ-साफ कहा कि नेशनल हाईवे पर होने वाले हादसे के लिए वे सलाहकार सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं जो गलत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने निर्माण की गुणवत्ता से समझौता करने वाले ठेकेदारों को कड़ी कार्रवाई और 'ब्लैकलिस्ट' (काली सूची में डालने) की चेतावनी दी है। मंत्री का यह कड़ा बयान ऐसे समय में आया है जब उनका मंत्रालय 2 लाख से 2.5 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली कई बड़ी सुरंग परियोजनाओं के लिए निविदाएं (टेंडर) तैयार कर रहा है।
गूगल की मदद से बन रही खराब DPR, हादसों में जा रही लाखों जानें
नई दिल्ली में आयोजित उद्योग मंडल फिक्की (FICCI) के 'टनल्स एंड ब्रिजेस कॉन्फ्रेंस 2026' के चौथे संस्करण को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने डीपीआर तैयार करने वाली कंपनियों और सलाहकारों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कई सलाहकार जमीनी हकीकत जाने बिना सिर्फ गूगल की मदद से अपने दस्तावेज और रिपोर्ट तैयार कर लेते हैं। इस तरह की लापरवाही से सड़कें और नेशनल हाईवे तकनीकी रूप से असुरक्षित बन जाते हैं, जिसके कारण भारी जान-माल का नुकसान होता है।
गडकरी ने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि देश में आज सड़कों पर हर साल करीब 5 लाख दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें करीब 1.8 लाख लोगों की अकाल मृत्यु हो जाती है। उन्होंने कहा कि इन सभी हादसों के पीछे कहीं न कहीं गलत डीपीआर और डिजाइनिंग की बड़ी समस्या छिपी होती है। इसलिए गलत रिपोर्ट तैयार करने वाले सलाहकारों को इन मौतों का दोषी माना जाना चाहिए।
गुणवत्ता से समझौता करने पर ठेकेदार होंगे ब्लैकलिस्ट
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक सड़क निर्माण से जुड़े ठेकेदारों को आगाह करते हुए मंत्री ने कहा कि बुनियादी ढांचा परियोजना हासिल कर लेने के बाद अगर निर्माण की गुणवत्ता से कोई भी समझौता किया गया, तो उसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब निर्माण कार्यों का केवल वित्तीय ऑडिट ही नहीं होगा, बल्कि परफॉर्मेंस ऑडिट भी किया जाएगा।
परफॉर्मेंस ऑडिट के नतीजों के आधार पर ही ठेकेदारों के काम का मूल्यांकन होगा। अगर किसी ठेकेदार का काम मानक के अनुरूप नहीं पाया गया या उसमें खामियां मिलीं, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और उसे भविष्य के टेंडरों से ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा। गडकरी ने बताया कि घटिया निर्माण और गलत प्लानिंग के कारण देश को बड़ा आर्थिक नुकसान होता है और निर्दोष लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है।
ठेकेदारों और सलाहकारों को मिलेगी रेटिंग
सड़क निर्माण प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के लिए सरकार एक नया रेटिंग सिस्टम लागू करने जा रही है। नितिन गडकरी ने घोषणा की कि अब सभी ठेकेदारों और डीपीआर तैयार करने वाले सलाहकारों को उनकी कार्यकुशलता और गुणवत्ता के आधार पर रेटिंग दी जाएगी। यह रेटिंग उनके पुराने काम और दुर्घटना रिकॉर्ड पर आधारित होगी। इसी रेटिंग के आधार पर यह फैसला किया जाएगा कि संबंधित ठेकेदारों या सलाहकारों को भविष्य की सरकारी बोलियों और टेंडरों में हिस्सा लेने की अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं।
2.5 लाख करोड़ की सुरंग परियोजनाओं पर काम जारी
फिक्की के अनुसार, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय इस समय देश भर में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए 2 लाख करोड़ रुपये से 2.5 लाख करोड़ रुपये मूल्य की सुरंग (टनल) परियोजनाओं के टेंडर तैयार कर रहा है। इतनी बड़ी परियोजनाओं की शुरुआत से ठीक पहले मंत्री द्वारा दी गई इस चेतावनी को बुनियादी ढांचा क्षेत्र में सुधार और सुरक्षा मानकों को सख्त करने के कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
उद्योग जगत ने उठाईं चार प्रमुख चिंताएं
कार्यक्रम के दौरान फिक्की की सड़क एवं राजमार्ग समिति के चेयरमैन और एफकॉन इन्फ्रास्ट्रक्चर के प्रबंध निदेशक एस. परमशिवन ने उद्योग जगत की ओर से केंद्रीय मंत्री के सामने चार मुख्य चिंताएं रखीं। परमशिवन ने कहा कि वर्तमान में सबसे कम बोली (L1 - Lowest Bidder) लगाने वाले को ठेका देने की प्रथा बहुत अधिक हावी है। इस वजह से कई कंपनियां प्रतिस्पर्धा के चक्कर में अनुमानित लागत से 20 प्रतिशत या उससे भी कम दर पर टेंडर ले लेती हैं। इतने कम बजट में काम करने के कारण परियोजनाओं की व्यावसायिक व्यावहारिकता खत्म हो जाती है और अंततः निर्माण की गुणवत्ता पर अत्यधिक दबाव पड़ता है।
उन्होंने ध्यान दिलाया कि वित्त मंत्रालय और सड़क परिवहन मंत्रालय में 'गुणवत्ता-सह-लागत आधारित चयन' (QCBS - Quality-cum-Cost Based Selection) के नियम पहले से मौजूद हैं, लेकिन इनका उपयोग बहुत कम किया जाता है। परमशिवन ने मंत्री से आग्रह किया कि 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की बड़ी और जटिल परियोजनाओं के लिए केवल सबसे कम कीमत देखने के बजाय गुणवत्ता और लागत दोनों के संतुलन को ही प्राथमिक तरीका बनाया जाना चाहिए।
