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अब हैक नहीं होगी आपकी Smart Car! सरकार ला रही है नए साइबर सिक्योरिटी नियम

कनेक्टेड और स्मार्ट वाहनों को साइबर हमलों से बचाने के लिए सरकार की ओर से इन गाड़ियों के लिए नए साइबर सिक्योरिटी रूल्स का ड्राफ्ट जारी किया गया है।

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अब स्मार्ट कारों पर भी होगी सरकार की सख्त साइबर निगरानी (AI Generated Image)

देश में तेजी से बढ़ रही कनेक्टेड और स्मार्ट कारों (Smart Cars) को साइबर हमलों से सुरक्षित रखने के लिए केंद्र सरकार की ओर से एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियमावली (CMVR), 1989 में संशोधन का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। नए प्रस्तावित नियमों का उद्देश्य स्मार्ट वाहनों को हैकिंग, मालवेयर और दूसरे साइबर खतरों से सुरक्षित बनाना है, ताकि यात्रियों और उनकी यात्रा की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। सरकार ने इस ड्राफ्ट नोटिफिकेशन पर 17 जुलाई तक आम जनता, उद्योग और दूसरे संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। इसके बाद ही अंतिम नियम लागू किए जाएंगे।

क्यों जरूरी हैं नए साइबर सुरक्षा नियम?

आज की आधुनिक कारें केवल एक वाहन नहीं, बल्कि इंटरनेट और सॉफ्टवेयर से जुड़ी स्मार्ट मशीनें बन चुकी हैं। इनमें Over-the-Air (OTA) सॉफ्टवेयर अपडेट, कनेक्टेड फीचर्स, मोबाइल ऐप कंट्रोल और एडवांस ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) जैसी तकनीकें शामिल हैं। ऐसे में साइबर हमलों का खतरा भी बढ़ गया है। इसी को देखते हुए सरकार ने प्रस्ताव रखा है कि वाहन निर्माता कंपनियों को अपने वाहनों में मजबूत Cyber Security Management System (CSMS) और सुरक्षित Software Update Management System (SUMS) लागू करना होगा।

वाहन कंपनियों की बढ़ी जिम्मेदारी

ड्राफ्ट के अनुसार, वाहन कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके वाहनों का सॉफ्टवेयर साइबर अटैक, मालवेयर और अनऑथराइज्ड एक्सेस से सुरक्षित रहे। इसके लिए कंपनियों को गाड़ी की पूरी लाइफ के दौरान साइबर सुरक्षा जोखिमों की निगरानी करनी होगी और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित तरीके से सॉफ्टवेयर अपडेट जारी करने होंगे।

इसके अलावा OTA (Over-the-Air) अपडेट के जरिए भेजे जाने वाले सभी सॉफ्टवेयर अपडेट भी सुरक्षित और सर्टिफाइड होने चाहिए, ताकि किसी तरह की हैकिंग या डेटा से छेड़छाड़ की संभावना न रहे।

नए नियम लागू होने के बाद वाहन निर्माताओं की जिम्मेदारी केवल कार बेचने तक सीमित नहीं रहेगी। उन्हें गाड़ी को इस्तेमाल किए जाने तक की अवधि के दौरान साइबर सुरक्षा बनाए रखने, सॉफ्टवेयर अपडेट को सुरक्षित बनाने और संभावित साइबर खतरों की पहचान कर समय पर समाधान देने की व्यवस्था करनी होगी।

चरणबद्ध तरीके से लागू होंगे नियम

सरकार ने इन नियमों को एक साथ लागू करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से लागू करने का प्रस्ताव रखा है-

1 अक्टूबर 2026 से ऑटोमेशन लेवल-3 और उससे ऊपर वाले नए मॉडलों पर Cyber Security Management System (CSMS) लागू होगा, जबकि मौजूदा मॉडलों के लिए यह नियम 1 अप्रैल 2027 से प्रभावी होगा।

1 अप्रैल 2028 से ADAS (लेवल-2 और उससे ऊपर) से लैस नई गाड़ियों पर यह नियम लागू होगा, जबकि मौजूदा मॉडलों के लिए इसकी समय सीमा 1 अक्टूबर 2028 होगी।

1 अक्टूबर 2029 तक सभी OTA-इनेबल्ड व्हीकल और सॉफ्टवेयर अपडेट वाले मॉडलों को नए नियमों के दायरे में लाने की तैयारी है।

यात्रियों को क्या होगा फायदा?

इन नियमों का सबसे बड़ा लाभ वाहन मालिकों और यात्रियों को मिलेगा। सुरक्षित सॉफ्टवेयर और मजबूत साइबर सुरक्षा व्यवस्था से स्मार्ट कारों के हैक होने, डेटा चोरी होने या वाहन के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से छेड़छाड़ की आशंका कम होगी। इसके साथ ही OTA अपडेट भी अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनेंगे।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनालाauthor

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने बिजनेस और टेक से जुड़ी खबरों पर काम किया है। यूटीलिटी, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग से जुड़ी खबरों पर वह लगातार लिख रही हैं। शिवानी ने डिजिटल के साथ-साथ न्यूज एजेंसी में भी काम किया है।

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