स्वामी डॉ. उमाकांतानंद सरस्वती जी महाराज

स्वामी डॉ. उमाकांतानंद सरस्वती जी महाराज

महामंडलेश्वर स्वामी डॉ. उमाकांतानंद सरस्वती जी महाराज जूना अखाड़ा के प्रतिष्ठित संत, आध्यात्मिक गुरु और मोटिवेशनल स्पीकर हैं। उन्होंने काफी कम उम्र में ही आध्यात्मिक मार्ग अपना लिया। 12 वर्ष की आयु में गुरु दीक्षा ली और 16 वर्ष की उम्र में आत्म-साक्षात्कार की साधना के लिए घर त्याग दिया। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार से 'प्राचीन भारत में योग परंपरा' विषय पर पीएचडी करने वाले स्वामी जी रामायण, गीता, भागवत, वेद और उपनिषदों की शिक्षाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार करते रहे हैं। वे भारत सहित 50 से अधिक देशों में आध्यात्मिक और प्रेरक व्याख्यान दे चुके हैं तथा 1999 में केपटाउन में आयोजित विश्व धर्म संसद में भी भाग ले चुके हैं। स्वामी जी मॉरीशस स्थित 'शाश्वतम फाउंडेशन' और हरिद्वार स्थित 'डिवाइन श्री राम इंटरनेशनल चैरिटेबल ट्रस्ट' के संस्थापकों में से एक हैं। अपने संगीतमय रामकथा और श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से वे ध्यान, प्राणायाम और योग की शिक्षाएं देते हुए लोगों को शांत, संतुलित और सकारात्मक जीवन जीने की राह दिखाते हैं।

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