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Agri Monorail: पहली एग्री मोनोरेल शुरू, दुर्गम पहाड़ियों से मंडी तक आसानी से पहुंचेगी फसल

Agri Monorail: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में 20 लाख रुपये की लागत से पहली 'एग्री मोनोरेल' शुरू हुई। इससे दुर्गम पहाड़ियों से 85 किसान परिवारों का समय, श्रम और उपज ढुलाई आसान होगी।

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हिमाचल प्रदेश में पहली 'एग्री मोनोरेल' की शुरुआत (तस्वीर-AI)

Agri Monorail: हिमाचल प्रदेश के ऊंचे और दुर्गम पहाड़ी इलाकों से फसलों और फलों को मंडियों तक पहुंचाना अब किसानों के लिए बेहद आसान होने जा रहा है। राज्य सरकार ने कृषि और बागवानी क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। हिमाचल प्रदेश के बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने को राज्य की पहली 'एग्री मोनोरेल' प्रणाली का औपचारिक उद्घाटन किया। इस आधुनिक तकनीक के शुरू होने से दूर-दराज के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले किसानों को अपनी उपज ढोने में आने वाली परेशानियों से बड़ी राहत मिलेगी।

मंडी जिले से हुई शुरुआत, 20 लाख की लागत

इस एग्री मोनोरेल परियोजना को मंडी जिले के 'पलहोता-2' क्लस्टर में स्थापित किया गया है। करीब 1 किलोमीटर लंबी इस मोनोरेल प्रणाली का निर्माण करीब 20 लाख रुपये की लागत से किया गया है। यह मोनोरेल 'हिमाचल प्रदेश उपोष्णकटिबंधीय बागवानी, सिंचाई एवं मूल्य संवर्धन' (HP SHIVA) परियोजना के अंतर्गत बनाई गई है। इस परियोजना से क्षेत्र का लगभग 28.44 हेक्टेयर का कृषि दायरा कवर होता है। सीधे तौर पर इस इलाके के करीब 85 किसान परिवारों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।

समय, श्रम और लागत की होगी बचत

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक उद्घाटन के दौरान बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि यह एग्री मोनोरेल क्षेत्र के कृषि और बागवानी पारिस्थितिकी तंत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी। पहाड़ियों से फसल नीचे उतारना किसानों के लिए हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। इस मोनोरेल प्रणाली से न केवल किसानों का समय और श्रम बचेगा, बल्कि ढुलाई के दौरान होने वाले खर्च और फसल के नुकसान में भी भारी कमी आएगी।

बागवानी में आधुनिक तकनीक का समावेश

मंत्री ने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार बागवानी क्षेत्र को आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। आधुनिक तकनीकों और तकनीकों के समावेश से ग्रामीण क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे को मजबूती मिल रही है। उन्होंने कहा कि मोनोरेल जैसी सुविधाएं आने वाले समय में हिमाचल प्रदेश में कृषि विकास की नई इबारत लिखेंगी।

एडीबी (ADB) के सहयोग से 1,292 करोड़ की परियोजना

यह पहल 1,292 करोड़ रुपये की 'एचपी शिवा' (HP SHIVA) परियोजना का एक हिस्सा है, जिसे एशियाई विकास बैंक (ADB) द्वारा वित्तपोषित किया जा रहा है। यह योजना प्रदेश के 7 प्रमुख जिलों बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, मंडी, सोलन, सिरमौर और ऊना में चलाई जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि उत्पादन बढ़ाकर किसान परिवारों की आय में वृद्धि करना है।

2030 तक बढ़ाई गई योजना की अवधि

किसानों के व्यापक हितों और भारी मांग को देखते हुए राज्य सरकार ने इस परियोजना की समय सीमा को 2 वर्ष और बढ़ाने का निर्णय लिया है। पहले यह परियोजना जून 2028 में समाप्त होने वाली थी, लेकिन अब यह जून 2030 तक जारी रहेगी, ताकि राज्य के अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें।

किसानों के लिए खुशखबरी

बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने किसानों के हित में एक और बड़ी घोषणा की। उन्होंने बताया कि 'एचपी शिवा' परियोजना की अवधि को दो साल के लिए बढ़ा दिया गया है। पहले यह योजना जून 2028 में समाप्त होने वाली थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर जून 2030 तक कर दिया गया है। अवधि बढ़ने से राज्य के अधिक से अधिक किसानों तक आधुनिक सुविधाओं, सिंचाई व्यवस्था और मोनोरेल जैसे प्रोजेक्ट्स का लाभ पहुंचाया जा सकेगा।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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