गुजरात सरकार के शिक्षा विभाग ने राज्य के सरकारी स्कूलों सहित प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक शैक्षणिक संस्थानों में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश और गतिविधियों को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। 21 अक्टूबर 2026 को स्वीकृत परिपत्र का उद्देश्य विद्यार्थियों की सुरक्षा, गरिमा, गोपनीयता और कल्याण सुनिश्चित करना है। परिपत्र के अनुसार, स्कूल परिसर में प्रवेश करने के लिए बाहरी व्यक्ति को प्राचार्य या संस्थान प्रमुख से पहले लिखित अनुमति लेनी होगी। आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन के लिए नियमानुसार अधिकृत सरकारी अधिकारियों को इससे छूट दी गई है। स्कूल में प्रवेश करने वाले प्रत्येक आगंतुक के लिए विजिटर रजिस्टर में अपनी जानकारी दर्ज करना भी अनिवार्य होगा।
लिखित अनुमति के बिना फोटो-वीडियो नहीं
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्राचार्य की पूर्व लिखित अनुमति के बिना विद्यार्थियों, शिक्षकों या स्कूल की गतिविधियों की फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, इंटरव्यू, ऑडियो रिकॉर्डिंग या लाइव स्ट्रीमिंग नहीं की जा सकेगी। ऐसी गतिविधियों की अनुमति केवल वैध उद्देश्य के लिए दी जा सकेगी।
कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों, छात्रावासों, खेल के मैदानों, शौचालयों या विद्यार्थियों की गतिविधियां चलने वाले अन्य क्षेत्रों में भी बाहरी व्यक्ति को स्कूल के प्राचार्य, शिक्षक या अधिकृत अधिकारी की उपस्थिति में ही प्रवेश मिलेगा। इसके लिए संस्थान प्रमुख की पूर्व लिखित अनुमति जरूरी होगी।
बच्चों की तस्वीरों और निजी जानकारी की सुरक्षा पर जोर
परिपत्र में स्कूल प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि विद्यार्थियों की तस्वीरों, वीडियो या व्यक्तिगत जानकारी का ऐसा संग्रह, प्रकाशन अथवा प्रसार न हो, जिससे उनकी गोपनीयता, गरिमा या सुरक्षा प्रभावित हो। इसके अलावा, किसी बच्चे की जानकारी जुटाने या उसकी पहचान अथवा तस्वीर प्रकाशित करने के लिए भी प्राचार्य की पूर्व लिखित अनुमति आवश्यक होगी। यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी गतिविधि बच्चे के सर्वोत्तम हित में हो और उसकी सुरक्षा, गरिमा या गोपनीयता को नुकसान न पहुंचे।
नियम तोड़ने पर पुलिस को सूचना देने के निर्देश
यदि कोई व्यक्ति बिना अनुमति स्कूल में प्रवेश करता है, परिसर छोड़ने से इनकार करता है, अनधिकृत फोटोग्राफी या वीडियोग्राफी करने का प्रयास करता है अथवा स्कूल के कामकाज में बाधा डालता है, तो प्राचार्य को तत्काल स्थानीय पुलिस और संबंधित शिक्षा अधिकारियों को सूचित करना होगा।
प्राचार्य ऐसे किसी भी आगंतुक को प्रवेश देने से इनकार कर सकते हैं, जिससे स्कूल की सुरक्षा, गोपनीयता, अनुशासन या शैक्षणिक वातावरण प्रभावित होने की आशंका हो। जरूरत पड़ने पर बाहरी व्यक्ति को परिसर छोड़ने का निर्देश देने और स्थानीय पुलिस की सहायता लेने का भी प्रावधान है।
विभिन्न कानूनों के तहत कार्रवाई का प्रावधान
निर्देशों के उल्लंघन से जुड़े मामले में परिस्थितियों के अनुसार भारतीय न्याय संहिता, 2023, पॉक्सो अधिनियम, 2012, किशोर न्याय अधिनियम, 2015, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और अन्य लागू कानूनों के तहत कार्रवाई शुरू की जा सकती है।
शिक्षा विभाग ने सभी निरीक्षण अधिकारियों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा है। परिपत्र में बताया गया है कि ये निर्देश 20 अक्टूबर 2026 को सरकार की फाइल पर मिली मंजूरी के बाद जारी किए गए हैं।
