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दिल्ली तो बस ट्रेलर है, नरक बना लाहौर... AQI 1500 के पार, 'ग्रीन लॉकडाउन' लागू और शादियों पर बैन

Lahore AQI Today: दिल्ली में एक्यूआई लेवल 400 पार पहुंच गया है। यहां वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) की तय लिमिट से 50 गुना ऊपर प्रदूषण है। जबकि, लाहौर में एक्यूआई 1500 के पार है। ऐसे में यह नरकीय स्थिति है।

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लाहौर में वायु प्रदूषण।

Photo : iStock

Lahore AQI Today: राजधानी दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर हंगामा मचा हुआ है। यहां एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 के पार पहुंच गया है। यानी प्रदूषण इतना बढ़ गया है कि किसी को भी बीमार करने के लिए पर्याप्त है। अब पाकिस्तान का रुख करते हैं। यहां का दूसरा सबसे बड़ा शहर लाहौर दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर बन गया है। पिछले 24 घंटों में लाहौर का एक्यूआई 1500 तक दर्ज किया गया। यानी लाहौर में एक सांस भी लेना खतरे से खाली नहीं है।

हर तरफ जहरीली धुंध है। ऊंची-ऊंची इमारतें दिखना बंद हो गई हैं और अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में अचानक से इजाफा हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार, लाहौर में लगभग 15000 मरीजों को अस्थमा व अन्य श्वसन संबंधी समस्याओं के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें सूखी खांसी, सीने में संक्रमण संबंधी समस्याओं वाले बच्चों की तादात ज्यादा है।

लाहौर में ग्रीन लॉकडाउन की स्थिति

लाहौर में नरकीय स्थिति के बीच हॉटस्पॉट वाले क्षेत्रों में ग्रीन लॉकडाउन लागू किया गया है। यहां बारबेक्यू, मोटरसाइकिल-रिक्शा और मैरिज हॉल पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। लाहौर के सभी 18 जिलों में 7 से 17 नवंबर तक सार्वजनिक और निजी स्कूलों को बंद कर दिया गया है। इसके अलावा सभी विशेष शिक्षा स्कूलों में छात्रों को तीन महीने की छुट्टी पर भेजने का आदेश दिया गया है। सभी तरह की स्पोर्ट्स एक्टिविटी को भी रोक दिया गया है। पार्कों, चिड़ियाघरों व अन्य सार्वजनिक जगहों को भी बदं किया गया है।

शादियों पर तीन महीने का प्रतिबंध

लाहौर में प्रदूषण से निपटने के लिए लॉग टर्म प्लान पर विचार किया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, नवंबर से जनवरी के बीच शादी समारोह पर पूरी तरह से रोक लगाई गई है। लोगों से अक्टूबर तक इस तरह के समारोह का आयोजन करने की अपील की गई है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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