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WHO ने खारिज किया ट्रम्प का दावा: 'पैरासिटामोल और ऑटिज़्म का कोई सीधा संबंध नहीं'

WHO ने साफ तौर पर कहा है कि इस बात का कोई पुख्ता वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि इन दोनों के बीच कोई सीधा संबंध है।WHO के प्रवक्ता तारिक यासारेविच ने एक बयान में कहा, "हमारे पास इस दावे को साबित करने वाले कोई पुख्ता और लगातार सबूत नहीं मिले हैं।

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WHO ने खारिज किया ट्रम्प का दावा (फाइल फोटो:canva)

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के उन दावों को पूरी तरह से गलत बताया है, जिनमें उन्होंने कहा था कि गर्भावस्था के दौरान पैरासिटामोल (Tylenol) लेने से बच्चों में ऑटिज़्म का खतरा बढ़ जाता है। WHO ने साफ तौर पर कहा है कि इस बात का कोई पुख्ता वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि इन दोनों के बीच कोई सीधा संबंध है।

WHO के प्रवक्ता तारिक यासारेविच ने एक बयान में कहा, "हमारे पास इस दावे को साबित करने वाले कोई पुख्ता और लगातार सबूत नहीं मिले हैं।" उन्होंने आगे कहा कि इस तरह की अफवाहों पर घबराने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि अभी तक वैज्ञानिक तौर पर ऐसा कुछ भी साबित नहीं हुआ है।

ट्रम्प ने इससे पहले भी बच्चों को दी जाने वाली वैक्सीन को ऑटिज़्म से जोड़ा था। WHO ने इस दावे को भी पूरी तरह से खारिज करते हुए दोहराया है कि वैक्सीन पूरी तरह से सुरक्षित हैं और उनका ऑटिज़्म से कोई लेना-देना नहीं है। WHO का कहना है कि वैक्सीन कई जानलेवा बीमारियों से बचाती हैं और इनका इस्तेमाल लगातार होना चाहिए।

गर्भवती महिलाओं के लिए सलाह

WHO ने गर्भवती महिलाओं को सलाह दी है कि वे किसी भी तरह की दवा लेने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर सलाह लें। संगठन ने यह भी कहा कि बिना किसी वैज्ञानिक आधार के डर फैलाना सही नहीं है, क्योंकि इससे मरीजों में अनावश्यक चिंता बढ़ सकती है।

पैरासिटामोल एक सामान्य दवा है जिसका उपयोग दर्द और बुखार के लिए किया जाता है, जबकि ऑटिज़्म एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है जिसके कारण कई हो सकते हैं। दुनिया भर के स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस बात पर सहमत हैं कि पैरासिटामोल या वैक्सीन से ऑटिज़्म होता है, इसका कोई ठोस सबूत अब तक नहीं मिला है। WHO का यह बयान उन सभी अफवाहों पर विराम लगाता है जो स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में बिना सबूत के फैलाई जाती हैं।

ऑटिज़्म, या ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD), बच्चों के दिमाग के विकास से जुड़ी एक स्थिति है। इसे ऐसे समझ सकते हैं कि ऑटिज़्म वाले बच्चों का दिमाग दुनिया को थोड़ा अलग तरह से समझता है। यह कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह दिमाग के काम करने का एक अलग तरीका है।

मुख्य लक्षण-

बोलने-बात करने में दिक्कत: ऐसे बच्चे आंखों में आंखें डालकर बात करने से बचते हैं और अपनी भावनाएं आसानी से नहीं बता पाते।

व्यवहार में दोहराव: ये बच्चे एक ही काम को बार-बार करना पसंद करते हैं और उन्हें रोजमर्रा की दिनचर्या में बदलाव पसंद नहीं आता।

सामाजिक दूरी: उन्हें अकेले रहना अच्छा लगता है और दूसरों के साथ घुलने-मिलने में परेशानी होती है

bhawana gupta
भावना किशोरauthor

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर मूल की भावना ने देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIMC से 2014 में पत्रकारिता की पढ़ाई की. 12 सालों से मीडिया में काम कर रही हैं. न्यूज़ नेशन, इंडिया न्यूज़, टीवी 9 भारतवर्ष और ज़ी न्यूज़, न्यूज 18 में काम करने का अनुभव. अभी Times Now में Special correspondent हैं.दिल्ली सरकार, स्वास्थ्य ,रेल, कल्चरल, शिक्षा मंत्रालयों के साथ दिल्ली क्राइम ,पॉलिटिक्स और राजधानी की हर छोटी बड़ी खबरों पर खास तौर से नजर रखती हैं. लोगों से जुड़ी खबरों पर काम करने और लोगों तक सही और सटीक खबरें पहुंचाने को अपना मकसद मानती हैं।

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