Nobel Peace Prize 2025: मारिया कोरीना मचाडो (Maria Corina Machado) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सपनों पर पानी फेर दिया है। वेनेजुएला में लोकतंत्र की बहाली के लिए मारिया कोरीना मचाडो को नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। मारिया कोरीना मचाडो को वेनेजुएला की 'आयरन लेडी' कहा जाता है। 2024 में हुए वेनेजुएला राष्ट्रपति चुनाव में मारिया कोरीना मचाडो मुख्य चेहरा थीं, लेकिन उन्हें चुनाव लड़ने से रोक दिया गया था।
नोबेल समिति ने वेनेजुएला के लोगों के लिए लोकतांत्रिक अधिकारों को बढ़ावा देने के लिए उनके अथक कार्य और तानाशाही से लोकतंत्र में न्यायपूर्ण और शांतिपूर्ण संक्रमण प्राप्त करने के उनके संघर्ष के लिए मारिया कोरिना मचाडो को 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार देने का निर्णय लिया है।
कौन हैं मारिया कोरीना मचाडो?
मारिया कोरिना मचाडो वेनेजुएला की जानी मानी विपक्षी नेता हैं। उनको देश में लोकतंत्र की बहाली और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के तानाशाही शासन के विरोध में संघर्ष के लिए जाना जाती हैं। मारिया कोरिना मचाडो लंबे समय से नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की मांग और अपने देश में सत्तावादी प्रथाओं का विरोध करने के प्रयासों का नेतृत्व किया है।
मारिया कोरिना मचाडो ने कई बार सत्ता विरोधी आंदोलनों का नेतृत्व किया है और इसको लेकर वह हमेशा सत्ताधारी दलों के निशाने पर रही हैं। फिलहाल मौजूदा सरकार के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व कर रही हैं। पिछले एक साल से छुपकर जीवन व्यत्तीत करने के लिए मजबूर होने के बावजूद उन्होंने अपना संघर्ष जारी रखा और वेनेजुएला में ही डटी रहीं। नोबेल समिति ने उनकी इस बात की भी सराहना की। समिति ने कहा कि मारिया कोरिना मचाडो के जीवन को गंभीर खतरा होने के बावजूद वह देश में डटी रहीं।
न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, 56 वर्षीय मारिया कोरिना मचाडो ने वेनेजुएला की सत्ताधारी पार्टी के दिलों में खौफ पैदा किया। हालांकि, मारिया कोरिना मचाडो ने ऐसा भी समय देखा जब उनके ही सहयोगियों ने उनका विरोध किया, लेकिन उन्हें विपक्ष को एकजुट करने का श्रेय भी जाता है। वह 2011 से 2014 तक वेनेजुएला की नेशनल असेंबली की सदस्य रह चुकी हैं।
