पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने ईरान को लेकर अपने देश की रणनीति और उद्देश्य स्पष्ट कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि इजरायल का मुख्य लक्ष्य ईरानी शासन से उत्पन्न अस्तित्व के खतरों को खत्म करना है। जब तक ये खतरे पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाते,सैन्य अभियान जारी रहेगा।
ANI को दिए एक इंटरव्यू में अजार ने कहा कि इजरायल पहले ही साफ कर चुका है कि वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम,बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता और उसके प्रॉक्सी नेटवर्क को अपने लिए सबसे बड़ा खतरा मानता है। उन्होंने कहा कि हम इन सभी खतरों को खत्म करना चाहते हैं,ताकि इजरायल की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
राजदूत ने यह भी कहा कि इस सैन्य अभियान का एक व्यापक उद्देश्य यह भी है कि ईरान के लोगों को अपने भविष्य का निर्णय खुद लेने का अवसर मिल सके। उनके मुताबिक, मौजूदा कार्रवाई ईरानी शासन की दमनकारी संरचनाओं को कमजोर करने की दिशा में है।
'ईरान की क्षमता काफी हद तक कमजोर
इस दौरान अजार ने दावा किया कि अब तक के ऑपरेशन में इजरायल ने ईरान की हमलावर क्षमता को काफी नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि पिछले कई दशकों से जारी आक्रामक गतिविधियों के मुकाबले अब ईरान की ताकत में खुले तौर पर कमजोर हो गई है। हालांकि अभी मिशन पूरा नहीं हुआ है। इजरायल तब तक अभियान जारी रखेगा, जब तक या तो उसके सभी सैन्य लक्ष्य हासिल नहीं हो जाते या फिर अमेरिका और ईरान के बीच ऐसा कोई समझौता नहीं हो जाता, जो इजरायल की दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित करे।लेबनान मोर्चा भी सक्रिय
राजदूत अजार ने साक्षात्कार में लेबनान में हिज्बुल्लाह की गतिविधियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वहां से लगातार इजरायल पर मिसाइल और रॉकेट हमले हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह अस्वीकार्य है और इसी वजह से लेबनान में भी सैन्य कार्रवाई जारी है। अजार ने कहा कि हम अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए जो जरूरी होगा,वह करेंगे।
अमेरिका के फैसलों से नहीं बदलेगी रणनीति
इस दौरान ईजरायली राजदूत ने साफ कर दिया कि अमेरिका द्वारा कुछ लक्ष्यों पर अस्थायी रोक लगाने या रणनीति में बदलाव का मतलब यह नहीं है कि इजरायल अपने अभियान को रोक देगा। उन्होंने कहा कि इजरायल अपने सैन्य लक्ष्यों पर हमले जारी रखेगा। उनकी यह टिप्पणी ट्रंप के हालिया पांच दिन की मोहलत वाले बयान पर आई है।
समझौते पर सख्त रुख
ईरान के साथ संभावित समझौते को लेकर भी इजरायल ने कड़ा रुख अपनाया है। अजार ने कहा कि परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइल और प्रॉक्सी संगठनों के समर्थन जैसे मुद्दों पर कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका और इजरायल के दबाव के कारण ही ईरान बातचीत के लिए तैयार हुआ है। उन्होंने कहा कि भले ही यह सकारात्मक संकेत है, लेकिन अंतिम निर्णय ईरान के व्यवहार पर निर्भर करेगा।
बातचीत की जगह से ज्यादा अहम नतीजा
अजार ने पाकिस्तान या किसी अन्य देश द्वारा मध्यस्थता की संभावनाओं पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बातचीत कहां होती है,यह ज्यादा मायने नहीं रखता। असली बात यह है कि समझौता इजरायल की सुरक्षा चिंताओं को संबोधित करता है या नहीं।
