मध्य पूर्व में जारी जंग के बीच ईरान ने अपनी मंशा साफ कर दी है। ट्रंप के युद्धविराम के लिए वार्ता और अमेरिकी शर्तों को साफ खारिज कर दिया है। ईरान ने अमेरिका के प्रस्ताव को लेकर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि युद्ध का अंत उसकी अपनी शर्तों पर ही होगा। उसकी प्रमुख मांगों में आक्रामकता का पूर्ण अंत,युद्ध क्षतिपूर्ति की गारंटी,सभी मोर्चों पर क्षेत्रीय युद्धविराम और होर्मुज जलडमरूमध्य पर संप्रभुता शामिल हैं।
एक वरिष्ठ राजनीतिक-सुरक्षा अधिकारी ने सरकारी मीडिया को बताया कि ईरान तब तक युद्ध खत्म नहीं करेगा, जब तक उसकी निर्धारित शर्तें पूरी नहीं हो जातीं।
ट्रंप नहीं तय करेंगे युद्ध का अंत
ईरान ने साफ कहा कि वह अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप या किसी अन्य बाहरी दबाव के आधार पर युद्ध खत्म करने का फैसला नहीं करेगा। अधिकारी के मुताबिक, अमेरिका ने विभिन्न कूटनीतिक माध्यमों से बातचीत की पहल जरूर की है,लेकिन जो प्रस्ताव सामने रखे गए हैं, वे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते हैं।
अमेरिका सिर्फ वार्ता का दिखावा करता है
ईरान का दावा है कि उसने इन प्रस्तावों का पहले भी दो बार मूल्यांकन किया था और तब भी ये समझ आया कि यह तनाव कम करने के बजाय बढ़ाने की कोशिश है। उसने आरोप लगाया कि अमेरिका बातचीत का दिखावा करता है,जबकि दूसरी ओर सैन्य हमले जारी रखता है।
ईरान ने खारिज किया अमेरिकी प्रस्ताव, रखीं पांच शर्तें
ईरान ने यह भी बताया कि एक क्षेत्रीय मध्यस्थ के जरिए भेजे गए अमेरिकी प्रस्ताव को उसने खारिज कर दिया है और वह अपनी रक्षा जारी रखने के लिए तैयार है। ईरान ने युद्ध समाप्त करने के लिए जो प्रमुख शर्तें सामने रखी हैं। इनमें सबसे पहली शर्त है कि दुश्मन की आक्रामक कार्रवाई और हत्या जैसे हमले पूरी तरह बंद हों। दूसरी शर्त यह है कि ऐसी ठोस व्यवस्था बनाई जाए जिससे भविष्य में युद्ध दोबारा न हो।
तीसरी शर्त के तहत ईरान ने युद्ध से हुए नुकसान और क्षतिपूर्ति के भुगतान की स्पष्ट गारंटी मांगी है। चौथी शर्त में कहा गया है कि युद्ध का अंत सभी मोर्चों पर और इस संघर्ष में शामिल सभी समूहों के लिए लागू होना चाहिए।
सबसे अहम पांचवीं शर्त में ईरान ने कहा है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर उसकी संप्रभुता उसका कानूनी अधिकार है और इसे मान्यता दी जानी चाहिए, साथ ही अन्य पक्षों को अपने वादों के पालन की गारंटी देनी होगी। ईरान ने यह भी स्पष्ट किया कि ये शर्तें जिनेवा में हुई पिछली बातचीत में रखी गई मांगों से अलग हैं। साथ ही, उसने यह संकेत दिया कि जब तक उसकी शर्तें स्वीकार नहीं की जातीं, तब तक किसी भी तरह का युद्धविराम या बातचीत संभव नहीं है।
मध्यस्थों को भी दे दिया संदेश
ईरान ने सभी मध्यस्थों को भी यह संदेश दिया है कि सीजफायर तभी संभव है,जब उसकी शर्तों को मान लिया जाए। तब तक वह अपनी रक्षा जारी रखेगा और सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा।
