Tamil Nadu floor test : तमिलनाडु विधानसभा में टीवीके प्रमुख विजय ने बुधवार को अपना बहुमत साबित कर दिया। तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर ने टीवीके के जीत की घोषणा की। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के विश्वास प्रस्ताव को 144 विधायकों का समर्थन मिला जबकि विश्वास प्रस्ताव का 22 विधायकों ने विरोध किया और 5 अन्य तटस्थ रहे। अन्नाद्रमुख के बागी धड़े ने भी विधानसभा में उनका समर्थन किया। हालांकि, दूसरे धड़े की अगुवाई करने वाले पूर्व मुख्यमंत्री एवं पार्टी के महासचिव के पलानीस्वामी ने अपने विधायकों से टीवीके का समर्थन न करने के लिए कहा था।
पलानीस्वामी के खिलाफ 30 विधायकों की बगावत
पलानीस्वामी के खिलाफ विधायकों के एक बड़े समूह ने मंगलवार को बगावत कर दी और उन पर प्रतिद्वंद्वी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के साथ पर्दे के पीछे से गठबंधन की कोशिश करने का आरोप लगाया। इसके साथ ही इस गुट ने अभिनेता से नेता बने विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) सरकार को अपना खुला समर्थन देने की घोषणा कर दी है। टीवीके सरकार बुधवार को विधानसभा में अपना बहुमत साबित करेगी। अन्नाद्रमुक के वरिष्ठ नेता एस.पी. वेलुमणि और सी.वे. षणमुगम के नेतृत्व में लगभग 30 विधायकों के बागी गुट में होने की संभावना है।
पलानीस्वामी के नेतृत्व पर सवाल उठाए
इस गुट ने 23 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनावों में पार्टी की करारी हार के बाद पलानीस्वामी के नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं। इन चुनावों में अन्नाद्रमुक ने जिन 164 सीटों पर चुनाव लड़ा था, उनमें से वह केवल 47 सीटें ही जीतने में सफल रही थी। षणमुगम ने पत्रकारों से कहा कि वे आज मुख्यमंत्री विजय से मिलकर उनकी सरकार को समर्थन देने के लिए पत्र सौंपेंगे। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि पार्टी के महासचिव पलानीस्वामी द्रमुक के समर्थन से सरकार बनाना चाहते थे।
पलानीस्वामी के प्रस्ताव का विरोध किया
उन्होंने कहा कि अन्नाद्रमुक का गठन ही द्रमुक के विरोध और 'सफाये’ के लिए हुआ है। उन्होंने कहा कि पार्टी के सभी सदस्यों ने एम के स्टालिन की अगुवाई वाली पार्टी के समर्थन से सरकार बनाने के पलानीस्वामी के प्रस्ताव का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई भी प्रस्ताव अन्नाद्रमुक के मूलभूत सिद्धांतों के विपरीत है क्योंकि इसका गठन ही द्रमुक का विरोध करने और उसे ’जड़ से उखाड़ने’ के लिए किया गया था। अन्नाद्रमुक नेतृत्व ने इन आरोपों को ’अफवाह’ बताकर खारिज कर दिया है।
AIADMK में हितों का टकराव
अन्नाद्रमुक ने 'एक्स’ पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि वेलुमणि, षणमुगम और सी विजयभास्कर खुद टीवीके सरकार में मंत्री पद पाने की कोशिश कर रहे हैं। इसने दावा किया कि पार्टी कार्यकर्ता पलानीस्वामी के साथ मजबूती से खड़े हैं तथा गठबंधन के फैसले मुट्ठी भर विधायकों द्वारा नहीं लिए जा सकते। एमजीआर द्वारा स्थापित अन्नाद्रमुक की इस अंदरूनी कलह ने पार्टी के उन आंतरिक सत्ता संघर्षों की यादें ताजा कर दी हैं, जो 1987 में संस्थापक एम. जी. रामचंद्रन और फिर 2016 में मुख्यमंत्री जे. जयललिता के निधन के बाद देखे गए थे।
