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अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर सस्पेंस बरकरार! वेंस बोले- 'बातचीत आगे बढ़ी है, लेकिन ट्रंप कब दस्तखत करेंगे, कहना मुश्किल'

US Iran War Ceasefire: वेंस ने बताया कि बातचीत में काफी अच्छी प्रगति हुई है, लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसके पास मौजूद अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के निस्तारण को अभी भी दोनों पक्षों के बीच माथापच्ची चल रही है।

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अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर सस्पेंस बरकरार! वेंस बोले- 'बातचीत आगे बढ़ी है, लेकिन ट्रंप कब दस्तखत करेंगे, कहना मुश्किल'

JD Vance Iran Peace Deal: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए पर्दे के पीछे चल रही कूटनीतिक बातचीत अपने अंतिम दौर में पहुंच गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए साफ किया है कि दोनों देश एक समझौते (MoU) के बेहद करीब हैं, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस पर कब हस्ताक्षर करेंगे, यह अभी भी 'तय होना बाकी' (TBD) है। वेंस के मुताबिक, दोनों देशों के प्रतिनिधि अभी भी समझौते के कुछ खास तकनीकी शब्दों और 'लैंग्वेज पॉइंट्स' को लेकर आपस में बातचीत कर रहे हैं।

ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अभी भी चर्चा जारी

उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया कि हालांकि बातचीत में काफी अच्छी प्रगति हुई है, लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Program) और उसके पास मौजूद अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) के निस्तारण को लेकर कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अभी भी दोनों पक्षों के बीच माथापच्ची चल रही है। अमेरिकी प्रशासन चाहता है कि इस डील में कोई भी ऐसी कमी न छूटे जिससे ईरान भविष्य में परमाणु हथियार बनाने की दिशा में आगे बढ़ सके। ट्रंप सरकार का लक्ष्य एक ऐसा फुलप्रूफ समझौता तैयार करना है जो अमेरिकी हितों की रक्षा करे।

ट्रंप नहीं मानेंगे कोई 'खराब डील': ट्रेजरी सेक्रेटरी

इस बीच अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी (वित्त मंत्री) स्कॉट बेसेंट ने भी इस कूटनीतिक हलचल पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि 'हमारे पास एक समझौते का ढांचा (Framework) तो तैयार है', लेकिन अभी भी डोनाल्ड ट्रंप की कुछ 'रेड लाइन्स' (शर्तें) पूरी नहीं हुई हैं। बेसेंट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप किसी भी दबाव में आकर कोई खराब या कमजोर समझौता स्वीकार नहीं करेंगे। वे अमेरिकी जनता और वैश्विक सुरक्षा के लिहाज से केवल एक 'महान और ऐतिहासिक' समझौते पर ही मुहर लगाएंगे।

क्या है समझौते के ड्राफ्ट (MoU) की बड़ी शर्तें?

समझौते के ड्राफ्ट में दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्ग 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) और दोनों देशों के बीच सैन्य प्रतिबंधों को लेकर बेहद कड़ी शर्तें रखी गई हैं:

प्रतिबंधों से मुक्ति: हॉर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते होने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों के आवागमन को पूरी तरह अप्रतिबंधित (Unrestricted) घोषित किया जाएगा। अब वहां किसी भी जहाज से न तो कोई जबरन टैक्स (Toll) वसूला जाएगा और न ही उन्हें परेशान किया जाएगा।

30 दिन में हटेंगी बारूदी सुरंगें: इस समझौते के तहत ईरान को अगले 30 दिनों के भीतर हॉर्मुज जलमार्ग में बिछाई गई अपनी सभी बारूदी सुरंगों (Mines) को पूरी तरह से हटाना होगा।

अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी हटेगी: जैसे-जैसे इस समुद्री मार्ग पर कमर्शियल जहाजों की आवाजाही सामान्य और सुरक्षित होगी, उसी अनुपात में अमेरिका भी ईरान के खिलाफ लगी अपनी नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) को धीरे-धीरे हटा लेगा।

60 दिनों की समय सीमा में क्या होगा?

इस समझौते के तहत ईरान ने लिखित रूप से यह प्रतिबद्धता जताई है कि वह कभी भी परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं करेगा। समझौते के लागू होने के बाद, मिलने वाले 60 दिनों के इस शांति समय (Window) के पहले चरण में दोनों देश इस बात पर ध्यान केंद्रित करेंगे कि ईरान अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम का निपटारा कैसे करेगा और उसके भविष्य के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम की सीमाएं क्या होंगी।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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