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यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर हमले, अमेरिका-ब्रिटेन ने गिराए बम

  • Written by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jan 12, 2024, 08:53 AM IST

हूती के अधिकारी ने यमन की राजधानी सना, साडा एवं धमार में 'हमले' की पुष्टि की है। अधिकारी ने इसे 'अमेरिका, यहूदी और ब्रिटेन का आक्रमण' बताया। जानकारों का मानना है कि इजरायल-हमास युद्ध के बीच यमन में अमेरिका एवं ब्रिटेन का हमला युद्ध के इस मोर्च को बड़ा कर सकता है।

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यमन में हूती विद्रोहियों पर अमेरिका-ब्रिटेन के हमले।

Photo : AP

Attack On Houthis: अमेरिका और ब्रेटन ने यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर हमले किए हैं। लाल सागर में अंतरराष्टीय मालवाहक जहाजों को निशाना बनाए जाने के बाद हूती विद्रोहियों पर यह पहला हमला है। रिपोर्टों में प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से कहा गया है कि यमन में कई जगहों पर धमाकों के आवाज सुने गए। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने गुरुवार को अपने बयान में कहा कि जरूरत पड़ी तो और हमले में करने में हम हिचकिचाएंगे नहीं।

हमले की इजाजत नहीं देंगे-अमेरिका

बाइडेन ने कहा कि ये लक्ष्यित हमले स्पष्ट संदेश हैं कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश अपने कर्मियों पर हमले करने अथवा नौवहन की स्वतंत्रता को खतरे में डालने वाले अपने दुश्मनों को इजाजत नहीं देंगे। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि इन हमलों के बाद संकेत मिले हैं कि मालवाहक जहाजों को निशाना बनाने की हूती की क्षमताओं को नुकसान पहुंचा है।

बड़ा हो सकता है युद्ध का मोर्चा

हूती के अधिकारी ने यमन की राजधानी सना, साडा एवं धमार में 'हमले' की पुष्टि की है। अधिकारी ने इसे 'अमेरिका, यहूदी और ब्रिटेन का आक्रमण' बताया। जानकारों का मानना है कि इजरायल-हमास युद्ध के बीच यमन में अमेरिका एवं ब्रिटेन का हमला युद्ध के इस मोर्च को बड़ा कर सकता है। हालात अगर बिगड़े तो आशंका युद्ध के मध्य पूर्व तक फैल जाने की भी है।

अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में सुनवाई

दक्षिण अफ्रीका ने इजरायल पर गाजा में फलस्तीनियों का नरसंहार करने का आरोप लगाया और बृहस्पतिवार को संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष अदालत से इजरायली सैन्य कार्रवाई फौरन रोकने का आदेश जारी करने का अनुरोध किया। इजरायल ने इन आरोपों से इनकार किया है। दक्षिण अफ्रीका के वकीलों ने शुरुआती दलीलों में कहा कि हालिया गाजा युद्ध इजरायल द्वारा फलस्तनियों पर दशकों से किये जा रहे उत्पीड़न का हिस्सा है। नरसंहार के आरोपों से जुड़े मुकदमे की अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में दो दिवसीय सुनवाई हो रही है।

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