US Senate Russia Sanctions Bill: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले उस बिल पर टिप्पणी की, जिसे अमेरिकी सीनेट ने मंजूरी दे दी है और जिसके तहत भारत और चार अन्य देशों पर 100% तक का टैरिफ लग सकता है।
यह बिल, जिसे दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने पेश किया था, यह यूक्रेन पर हमले के कारण रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की कोशिशों के तहत मंगलवार को आगे बढ़ाया गया है।
ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि बिल में बदलाव किया जाना चाहिए ताकि उन्हें ईरान पर टैरिफ लगाने के लिए ज्यादा अधिकार मिल सकें।
उनके इस सुझाव से इस उपाय में देरी हो सकती है, क्योंकि अब इसे आगे की चर्चा के लिए हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भेजा जाएगा।
उन्होंने कहा, 'सच कहूं तो, इसकी जरूरत नहीं होनी चाहिए। लेकिन अगर यह जरूरी है, तो मैं चाहूंगा कि वे ईरान पर सिर्फ प्रतिबंध ही नहीं, बल्कि टैरिफ भी लगाएं; मुझे लगता है कि यह जरूरी है; लिंडसे भी यही चाहते थे।'
क्या है मामला?
अमेरिकी सीनेट ने हाल ही में दिवंगत हुए रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा तैयार किए गए 'रूस और ईरान प्रतिबंध विधेयक 2026' (Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026) को 86-12 के भारी बहुमत से आगे बढ़ा दिया है। यह विधेयक अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से ऊर्जा उत्पाद (कच्चा तेल और गैस) खरीदने वाले शीर्ष देशों पर 100% तक का भारी सीमा शुल्क (टैरिफ) लगाने का व्यापक अधिकार देता है।
इसी बीच, ओवल ऑफिस में संवाददाताओं से बात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इस विधेयक में संशोधन कर इसमें ईरान पर भी प्रतिबंधों के बजाय सीधे टैरिफ लगाने के अधिकार शामिल किए जाने चाहिए।
क्या है यह प्रतिबंध विधेयक?
सीनेट में प्रक्रियात्मक वोट हासिल करने वाला यह द्विपक्षीय विधेयक यूक्रेन युद्ध के वित्तपोषण को रोकने के लिए रूस की ऊर्जा आय पर नकेल कसने के उद्देश्य से लाया गया है।
शीर्ष 5 देशों पर निशाना: विधेयक के तहत रूस से सबसे ज्यादा कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले पांच प्रमुख देशों- भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान पर 100% तक का अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता है।
राष्ट्रपति का विशेषाधिकार: विधेयक लागू होने पर यह पूरी तरह राष्ट्रपति के विवेक पर निर्भर करेगा कि वह किस देश पर कितना शुल्क लगाते हैं या किसे छूट प्रदान करते हैं।
ईरान पर भी नजर: कानून में 1996 के 'ईरान प्रतिबंध अधिनियम' को अगले 5 वर्षों (2031 तक) के लिए बढ़ाने और ईरान पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव बनाने का प्रावधान भी जोड़ा गया है।
भारत पर क्या पड़ सकता है असर?
भारत फिलहाल चीन के बाद रूसी कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है (जून 2026 में भारत का रूसी तेल आयात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था)। यदि यह विधेयक प्रतिनिधि सभा से पारित होकर कानून बनता है, तो राष्ट्रपति ट्रंप के पास भारतीय वस्तुओं पर 100% तक शुल्क थपने का कानूनी आधार होगा।
भारत और अमेरिका के बीच एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत चल रही है, जिसके तहत भारतीय निर्यात पर औसत सीमा शुल्क को घटाकर 18% करने की योजना थी। नया टैरिफ प्रावधान इस वार्ता को पटरी से उतार सकता है।
संसदीय प्रक्रिया और अनिश्चितता: हालांकि, अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (House) के अगस्त अवकाश (Recess) के कारण इस बिल के सितंबर से पहले अंतिम रूप से पारित होने की संभावना कम है। साथ ही, कुछ डेमोक्रेट सदस्यों ने राष्ट्रपति को व्यापक टैरिफ अधिकार देने पर चिंता जताई है, जिससे अमेरिका में आयात लागत बढ़ने का खतरा है।
