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भारतवंशी काश पटेल को डोनाल्ड ट्रंप ने सौंपी बड़ी जिम्म्मेदारी, बनाया FBI डायरेक्टर; बोले - 'ये हैं अमेरिका फर्स्ट फाइटर'

Next FBI Director Kash Patel: डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, मुझे यह घोषणा करते हुए गर्व महसूस हो रहा है कि कश्यप काश पटेल संघीय जांच ब्यूरो (FBI) के अगले निदेशक के रूप में काम करेंगे।

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डोनाल्ड ट्रंप ने काश पटेल को बनाया एफबीआई डायरेक्टर।

Next FBI Director Kash Patel: अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को भारतीय मूल के काश पटेल को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। ट्रंप ने काश पटेल को संघीय जांच ब्यूरो (FBI) के अगले निदेशक के रूप में नामित किया है। बता दें, काश पटेल ट्रंप के काफी करीबी माने जाते हैं और लंबे समय से वह ट्रंप के साथ बने हुए हैं। राष्ट्रपति निर्वाचित होने के बाद माना जा रहा था कि काश पटेल को महत्वपूर्ण पद मिल सकता है।

ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर काश पटेल के नामांकन की घोषणा की। उन्होंने लिखा, मुझे यह घोषणा करते हुए गर्व महसूस हो रहा है कि कश्यप काश पटेल संघीय जांच ब्यूरो के अगले निदेशक के रूप में काम करेंगे। ट्रंप ने रूस हॉक्स की जांच के लिए उनके काम की प्रशंसा करते हुए काश पटेल को अमेरिका फर्स्ट फाइटर बताया। टंप ने कहा, काश पटेल ने अपना करियर भ्रष्टाचार को उजागर करने, न्याय की रक्षा करने और अमेरिकी लोगों की रक्षा करने में बिताया है।

महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं काश पटेल

बता दें, भारतवंशी काश पटेल ट्रंप के शासनकाल में कई महत्पूर्ण पदों पर रह चुके हैं। इनमें रक्षा विभाग में चीफ ऑफ स्टाफ, राष्ट्रीय खुफिया विभाग के उप निदेशक और ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में आतंकवाद निरोध के वरिष्ठ निदेशक के रूप में कार्य करना शामिल है।

गुजरात से है नाता

न्यूयॉर्क में जन्मे पटेल का नाता गुजरात से है। हालांकि उनकी मां पूर्वी अफ्रीका में तंजानिया से और पिता युगांडा से हैं। वे 1970 में कनाडा से अमेरिका आ गए थे। पटेल ने पूर्व में एक साक्षात्कार में ‘पीटीआई’ से कहा था, ‘‘हम गुजराती हैं।’’

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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