Donald Trump Iran Nuclear Weapon: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक बार फिर बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में क्वांटम टेक्नोलॉजी से जुड़े दो कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर करने के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना किसी भी वैश्विक आर्थिक मंदी या 'महामंदी' के जोखिम से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
'जो करना होगा, मैं करूंगा'- राष्ट्रपति ट्रंप
स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में संपन्न हुई शुरुआती दौर की तकनीकी वार्ता के बाद ट्रंप ने कहा कि यदि ईरान किसी भी आगामी समझौते का पालन करने में विफल रहता है, तो वे सैन्य विकल्पों समेत कोई भी सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे। ट्रंप ने कहा, 'अगर ईरान अपने वादों पर खरा नहीं उतरता है या उसका व्यवहार ठीक नहीं रहता है, तो मुझे जो करना होगा, मैं वो करूंगा। जब तक वे हमारा सम्मान करेंगे, तब तक हमें कोई परेशानी नहीं होगी।'
जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या ईरान पर किसी भी सैन्य कार्रवाई से दुनिया में आर्थिक महामंदी का खतरा पैदा हो सकता है, तो ट्रंप ने इस बात को खारिज करते हुए कहा, 'मेरे काम करने के तरीके से कोई महामंदी नहीं आने वाली। लेकिन अगर वे नहीं माने... तो परमाणु हथियार महामंदी से कहीं ज्यादा बड़े खतरे हैं। महामंदी बहुत बुरी चीज है, लेकिन एक परमाणु हथियार कहीं ज्यादा तेजी से सब कुछ तबाह कर सकता है।'
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का दावा: कड़े निरीक्षण के लिए तैयार है ईरान
इससे पहले, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने स्विट्जरलैंड के बुर्गनस्टॉक रिजॉर्ट में हुई बातचीत को बेहद उत्पादक बताया था। वेंस ने दावा किया था कि इस बातचीत ने दोनों देशों के बीच एक सफल अंतिम समझौते की नींव रख दी है और ईरान अपने यहां अंतरराष्ट्रीय परमाणु निरीक्षकों को आने देने की अनुमति देने पर सहमत हो गया है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने भी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर उपराष्ट्रपति वेंस के इस दावे का समर्थन करते हुए लिखा कि हर कोई इस बात से पूरी तरह वाकिफ है कि भविष्य में 'परमाणु ईमानदारी' सुनिश्चित करने के लिए ईरान बड़े हथियारों के निरीक्षण के लिए सहमत होगा।
ईरान का पलटवार: अमेरिकी दावों को किया खारिज
दूसरी तरफ, ईरान ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है कि तेहरान अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों को देश में आने देने के लिए किसी नए विशेष समझौते पर राजी हुआ है।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने देश की आधिकारिक समाचार एजेंसी 'इर्ना' (IRNA) से बात करते हुए साफ किया कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के साथ ईरान का सहयोग केवल मौजूदा नियमों के तहत ही जारी रहेगा। बकाई ने कहा, 'सेफगार्ड्स समझौतों के तहत ईरान के जो दायित्व हैं, एजेंसी (IAEA) के साथ हमारी बातचीत केवल उन्हीं मौजूदा प्रक्रियाओं के अनुसार जारी रहेगी। इसके अलावा हमारा कोई भी कदम इस्लामी परामर्शदात्री सभा (ईरानी संसद) द्वारा बनाए गए कानूनों और सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (SNSC) के फैसलों के पूरी तरह अनुरूप होगा।'
बता दें कि स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के बीच 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत तकनीकी वार्ता तो हुई है, लेकिन अमेरिकी प्रशासन जहां इसे एक बड़े निरीक्षण समझौते की शुरुआत मान रहा है, वहीं ईरान इसे केवल अपने पुराने और घरेलू कानूनी दायरे में किया गया सहयोग बता रहा है। ईरान के इस सख्त रुख के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और सैन्य तनाव एक बार फिर बढ़ने की आशंका है।
