US Iran Peace Deal Trump: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच पिछले तीन महीनों से जारी भीषण सैन्य संघर्ष (जो 28 फरवरी को शुरू हुआ था) को थामने के लिए वैश्विक स्तर पर एक बहुत बड़ी कूटनीतिक हलचल शुरू हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए सनसनीखेज दावा किया है कि अमेरिका ने ईरान के साथ युद्ध को समाप्त करने के लिए एक 'मजबूत समझौता' (Great Settlement/MOU) कर लिया है, जिसे अगले कुछ दिनों में यूरोप में औपचारिक रूप से साइन किया जा सकता है।
इस बड़े घटनाक्रम के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने एक सोशल मीडिया पोस्ट (X) जारी कर इस डील को लेकर बड़ा खुलासा किया है। नेतन्याहू के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप ने उन्हें निजी तौर पर आश्वासन दिया है कि ईरान के साथ होने वाले किसी भी अंतिम समझौते में ईरान के संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) के पूरे स्टॉक को वहां से हटाने और उसके परमाणु बुनियादी ढांचे को पूरी तरह नष्ट करने की शर्त अनिवार्य रूप से शामिल होगी।
इजरायल इस MOU का हिस्सा नहीं, लेकिन रखी 4 कड़ी शर्तें
इजरायल पीएमओ (PMO) ने साफ किया है कि इस्राइल इस शुरुआती समझौते में सीधे तौर पर शामिल नहीं है, लेकिन प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने राष्ट्रपति ट्रंप की प्रतिबद्धता की सराहना की है। इजरायल के अनुसार, अंतिम समझौते में ये बातें शामिल होंगी
-ईरान के पास जमा पूरे संवर्धित यूरेनियम को वहां से बाहर निकाला जाएगा।
-ईरान के यूरेनियम संवर्धन ढांचे को पूरी तरह ध्वस्त किया जाएगा।
-ईरान के मिसाइल उत्पादन पर सख्त सीमाएं तय होंगी।
-मध्य पूर्व में सक्रिय हिजबुल्लाह और अन्य आतंकी प्रॉक्सी संगठनों को मिलने वाली ईरानी वित्तीय व सैन्य मदद पर पूरी तरह रोक लगेगी।
ट्रंप के तेवर बदले: पहले बमबारी की धमकी, फिर बुलाई शांति
दिलचस्प बात यह है कि इस कूटनीतिक कामयाबी से कुछ ही घंटे पहले डोनाल्ड ट्रंप बेहद आक्रामक मूड में थे और उन्होंने ईरान पर भयानक मिलिट्री स्ट्राइक (बमबारी) करने की खुली धमकी दी थी। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि अमेरिका जल्द ही ईरान के मुख्य तेल निर्यात केंद्र 'खार्क द्वीप' (Kharg Island) और उसके ऊर्जा ढांचे पर कब्जा कर लेगा।
हालांकि, कुछ ही घंटों बाद ट्रंप ने यू-टर्न लेते हुए कहा कि उन्होंने रात में होने वाले हवाई हमलों और बमबारी को टाल दिया है, क्योंकि ईरान के शीर्ष नेतृत्व के साथ बातचीत बहुत आगे बढ़ चुकी है। ट्रंप ने दावा किया कि उन्हें जानकारी मिली है कि ईरान के सर्वोच्च नेता आयतल्लाह मुजतबा खामेनेई (Ayatollah Mojtaba Khamenei) ने भी इस शांति समझौते के मसौदे (Framework) को अपनी व्यक्तिगत मंजूरी दे दी है। इस समझौते के लागू होते ही ईरान द्वारा ब्लॉक किया गया दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्ग 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) भी व्यापार के लिए दोबारा खोल दिया जाएगा।
ईरान का पलटवार: 'अभी कोई फाइनल डील नहीं हुई'
वाशिंगटन से आ रहे इन गगनचुंबी दावों के बीच ईरान ने बेहद सतर्क और कड़ा रुख अपनाया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई (Esmaeil Baqaei) ने ट्रंप के दावों को सीधे तौर पर खारिज करते हुए कहा, "ईरान अभी तक इस समझौते को लेकर किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा है।" ईरान की सरकारी मीडिया और न्यूज एजेंसी 'तस्नीम' ने भी जनता को वाशिंगटन की खबरों से सावधान रहने की सलाह दी है। एजेंसी ने तंज कसते हुए लिखा कि राष्ट्रपति ट्रंप पिछले दो महीनों में कम से कम 38 बार 'डील होने वाली है' का दावा कर चुके हैं। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि जब तक तेहरान खुद आधिकारिक घोषणा न करे, तब तक ट्रंप के इन बयानों को केवल एकतरफा राजनीतिक संदेश ही समझा जाना चाहिए। फिलहाल, अमेरिका और ईरान के बीच इस संभावित संधि को लेकर दुनिया भर के बाजारों और तेल की कीमतों पर गहरी नजर बनी हुई है।
