US Congress : भारत के खिलाफ अपनी टैरिफ एवं अप्रवासन नीति को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने ही देश में बुरी तरह घिर गए हैं। विपक्षी डेमोक्रेट्स ही नहीं बल्कि उनकी अपनी रिपब्लिकन पार्टी के नेता भी इन नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं। हाउस फॉरेन अफेयर्स वाली सब-कमेटी में 'द यूएस-इंडिया स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप' पर सुनवाई के दौरान दोनों दलों के नेताओं ने ट्रंप की इन नीतियों पर तीखे सवाल किए। डेमोक्रेट सांसदों ने चेतावनी देते हुए कहा कि 'दंडात्मक टैरिफ और वीजा पर रोक नई दिल्ली को मास्को के करीब ले जा रहे हैं और इससे यूएस की हिंद-प्रशांत रणनीति भी कमजोर हो रही है।'
वॉशिंगटन से डेमोक्रेट सांसद प्रमिला जयपाल ने टैरिफ के घरेलू प्रभावों को उजागर करते हुए कहा कि उनके निर्वाचन क्षेत्र की 120 साल पुरानी एक पारिवारिक कंपनी, जो भारतीय कृषि आयात पर निर्भर है, ने उन्हें बताया कि नई शुल्क दरें उनके '120 वर्षों में सबसे बड़े खतरे' का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिससे उन्हें उत्पादन कम करने या विदेश में स्थानांतरित करने पर विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने कानूनी आव्रजन मार्गों पर लगाए गए प्रतिबंधों की भी आलोचना की, जिन्हें उन्होंने भारतीयों के खिलाफ ऐतिहासिक भेदभावपूर्ण कोटा की याद दिलाने वाला बताया।
भारत को खोने वाले राष्ट्रपति बन जाएंगे ट्रंप-डोव
कैलिफोर्निया की सांसद सिडनी कामलागर-डोव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन की एक बड़ी तस्वीर दिखाते हुए कहा कि ट्रंप का दृष्टिकोण 'अपना ही नुकसान करने जैसा' है। उन्होंने राष्ट्रपति पर 'व्यक्तिगत नाराजगी' और 'नोबेल शांति पुरस्कार के प्रति जुनून' के कारण दशकों की द्विदलीय प्रगति को बर्बाद करने का आरोप लगाया, यह चेतावनी देते हुए कि 50% टैरिफ और नए 100,000 डॉलर के H-1B वीजा शुल्क (जिसमें से 70% भारतीयों पर लागू होता है) यह जोखिम पैदा करते हैं कि ट्रंप 'वह अमेरिकी राष्ट्रपति बन जाएंगे जिन्होंने भारत को खो दिया।'
'रूस पर भारत की निर्भरता निरंतर घट रही'
जर्मन मार्शल फंड के सीनियर फेलो डॉ. समीर लालवानी ने दोनों देशों के संबंधों में वास्तविक चुनौतियों को स्वीकार किया, लेकिन कहा कि भारत-चीन के संबंधों में गर्माहट को लेकर आशंकाएं बढ़ा-चढ़ाकर बताई गई हैं और रूस पर भारत की निर्भरता निरंतर घट रही है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि हाल ही में अमेरिका द्वारा किए गए टैरिफ बढ़ोतरी ने भारत में 'चिंताएं तेज कर दी हैं' और विश्वास को कमजोर किया है, जबकि जेट-इंजन सह-उत्पादन जैसी पहलों के धीमे कार्यान्वयन ने एक खतरनाक 'कहने और करने के बीच अंतर' पैदा कर दिया है।
पाक के साथ ट्रंप की सक्रियता दिल्ली को पसंद नहीं
ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन अमेरिका के कार्यकारी निदेशक ध्रुव जयशंकर ने संबंधों को 'राजनीतिक गतिरोध' की स्थिति में बताया, जिसका मुख्य कारण टैरिफ हैं, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि इसका समाधान 'हाथ में ही' है क्योंकि भारत पहले से ही वही बाजार पहुंच प्रदान कर रहा है जिसकी ट्रंप मांग करते हैं। उन्होंने पाकिस्तान की सेना के साथ अमेरिका की नई सक्रियता को भी नई दिल्ली के लिए संवेदनशील मुद्दा बताया, क्योंकि इस्लामाबाद का भारत-विरोधी आतंकवाद को समर्थन देने का इतिहास रहा है।
रिपब्लिकन सांसद बिल हुईजेंगा ने अधिक आशावादी रुख अपनाया
सबकमिटी के चेयर और रिपब्लिकन सांसद बिल हुईजेंगा ने अधिक आशावादी रुख अपनाया, भारत को सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बताते हुए और उम्मीद जताई कि ट्रंप और मोदी के नेतृत्व में एक नया व्यापार समझौता अमेरिकी कंपनियों के लिए समान अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने पुतिन की भारत यात्रा और रूस से भारतीय तेल खरीद पर चिंता जताई, लेकिन साथ ही भारत द्वारा अमेरिकी ऊर्जा आयात में वृद्धि और 2020 के गलवान संघर्ष के बाद चीन की आक्रामकता के प्रति उसके दृढ़ रुख को भी रेखांकित किया।
