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टैरिफ को लेकर अमेरिका और चीन के बीच होगी चर्चा; जिनेवा में मिलेंगे दोनों देशों के अधिकारी

टैरिफ के मुद्दे पर अमेरिका और चीन के बीच रस्साकशी कम होने का नाम नहीं ले रही है। दोनों देशों के बीच व्यापार युद्ध जैसी स्थिति बन गई। इस बीच एक बड़ी जानकारी सामने आई है। अमेरिका, चीन के अधिकारी शुल्क पर चर्चा के लिए जिनेवा में मिलेंगे। आपको इससे जुड़ी अहम जानकारी इस रिपोर्ट में दे देते हैं।

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डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग।

US-China: अमेरिका के वित्त मंत्री और अमेरिका के शीर्ष व्यापार वार्ताकार शुल्क पर चर्चा के लिए इस सप्ताहांत स्विट्जरलैंड में उच्च पदस्थ चीनी अधिकारियों से मिलेंगे। इस बातचीत का मकसद दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार को नुकसान पहुंचाने वाले विवाद को कम करना है। अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर जिनेवा में चीन के अपने समकक्षों से मिलेंगे।

जिनेवा में मिलेंगे अमेरिका-चीन के अधिकारी

आयात पर उच्च शुल्क लगाने के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले के बाद चीन ने भी जवाबी कदम उठाए और दोनों देशों के बीच व्यापार युद्ध जैसी स्थिति बन गई। ट्रंप के शुल्क लगाने के बाद अप्रैल में चीन ने भी जवाब में अमेरिका पर शुल्क लगाने की घोषणा की थी। अब चीन के खिलाफ अमेरिका का शुल्क 145 प्रतिशत है जबकि अमेरिका पर चीन ने 125 प्रतिशत शुल्क लगा रखा है।

इससे पहले चीन ने कहा था कि वह शुल्क कम करने के लिए वार्ता संबंधी अमेरिकी प्रस्तावों पर विचार कर रहा है। यह कदम संभवतः दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच शुल्क युद्ध को कम कर सकता है।

ट्रंप ने चीन पर लगे शुल्क घटाने का रखा प्रस्ताव

इस बीच ट्रंप ने शुक्रवार को चीन पर लगे ऊंचे सीमा शुल्क को घटाकर 80 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा। इसे दोनों देशों के बीच छिड़े व्यापार युद्ध को शांत करने वाले कदम के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया खाते पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा, 'चीन पर 80 प्रतिशत का सीमा शुल्क सही लगता है!'

इसके साथ ही ट्रंप ने चीन से अपने बाजार को अमेरिकी उत्पादों के लिए खोलने का अनुरोध भी किया। उन्होंने कहा, 'ऐसा करना उनके लिए काफी अच्छा होगा। बंद बाजार अब काम नहीं करते हैं।' चीन से आयात पर सीमा शुल्क घटाने का फैसला अमेरिका में उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों व आपूर्ति पर शुल्क के प्रभाव को लेकर बढ़ती चिंता के बीच किया गया है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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