US Iran Talk: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ लागू की गई नौसैनिक घेराबंदी (Naval Blockade) को एक बड़ी कूटनीतिक और सैन्य जीत बताते हुए इसे 'जीनियस' और '100% फुलप्रूफ' करार दिया है।
राष्ट्रपति ने अमेरिकी नौसेना की बेमिसाल ताकत की सराहना करते हुए स्पष्ट किया कि इस सख्त घेराबंदी ने ईरान को रक्षात्मक स्थिति में ला दिया है और अब कोई भी देश अमेरिका के साथ 'खेल' खेलने की जुर्रत नहीं कर पाएगा।
ट्रंप ने पुरानी कूटनीतिक शैलियों पर प्रहार करते हुए कहा कि वे अब महज एक ऐसे समझौते या कागज के टुकड़े को देखने के लिए 18 घंटे की लंबी उड़ानें भरने के पक्ष में नहीं हैं, जिससे अमेरिका के हितों की रक्षा न होती हो। उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा कि जब आपको पहले से पता हो कि परिणाम असंतोषजनक होगा, तो ऐसी लंबी यात्राएं करना हास्यास्पद है।
परमाणु निरस्त्रीकरण की शर्त और भविष्य की रणनीति
भविष्य की संभावनाओं पर बात करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कर दिया है कि ईरान के साथ किसी भी नए समझौते की एकमात्र शर्त परमाणु हथियारों का पूर्ण त्याग है। उन्होंने कड़े लहजे में घोषणा की कि जब तक ईरान इस बात पर सहमत नहीं हो जाता कि उसके पास कोई परमाणु हथियार नहीं होंगे, तब तक किसी भी तरह की 'डील' की गुंजाइश नहीं है।
घेराबंदी की वजह से ईरान के जहाजों का आवागमन नहीं हो पा रहा: ट्रंप
इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि ईरान अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम पर अमेरिका की चिंताओं को दूर करने वाले डील पर जब तक सहमत नहीं होता तब तक होर्मुज के बाहर उसकी नौसैनिक घेराबंदी जारी रहेगी। ईरान चाहता है कि अमेरिका पहले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर से अपनी घेराबंदी हटाए। इस घेराबंदी की वजह से ईरान के जहाजों का आवागमन नहीं हो पा रहा है।
रिपोर्टों में कहा गया है कि इससे ईरान को भारी दिक्कत होने लगी है। वहीं, Axios की रिपोर्ट में इस मामले की जानकारी रखने वाले तीन सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि यूएस के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बातचीत पर बने गतिरोध को तोड़ने के लिए ईरान पर 'छोटे लेकिन ताकतवर' हमले की एक योजना तैयार की है।
CENTCOM अपने हमलों में ईरान की बुनियादी संरचनाओं को निशाना बना सकता है। इन हमलों का मकसद बातचीत शुरू करने के लिए ईरान पर दबाव बनाना है। ट्रंप का कहना है कि 'ब्लॉकेड, बॉम्बिंग से ज्यादा कारगर है और वह काइनेटिक एक्शन की मंजूरी दे सकते हैं।'
