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ट्रंप को सीनेट से फिर राहत, ईरान के खिलाफ युद्ध रोकने वाला डेमोक्रेट्स का प्रस्ताव 1 वोट से गिरा

रिपब्लिकन सीनेटर्स में से सूजन कॉलिन्स और लीजा मर्कोव्स्की ने डेमोक्रेट्स का साथ दिया। लेकिन डेमोक्रेट सीनेटर जॉन फेटरमैन ने इस बार रिपब्लिकन के साथ वोट किया जिससे प्रस्ताव के पास होने की उम्मीदें खत्म हो गईं।

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप।

Photo : AP

Donald Trump:अमेरिका के इतिहास में शायद पहली बार ऐसा हो रहा है कि सीनेट लगातार, महीनों तक, एक ही जंग को रोकने के लिए वोट डाल रही है और हर बार हार जाती है। 30 जुलाई 2026 को यह सिलसिला एक बार फिर दोहराया गया और इस बार भी अमेरिकी सीनेट ने डोनाल्ड ट्रंप की ईरान नीति पर लगाम लगाने वाले प्रस्ताव को खारिज कर दिया। गुरुवार को अमेरिकी सीनेट में डेमोक्रेट्स के समर्थन वाला 'ईरान वॉर पावर्स रिजोल्यूशन' एक वोट से गिर गया। यह प्रस्ताव सीनेटर टिम केन का था, जो पिछले कई महीनों से लगातार यह कोशिश कर रहे हैं कि कांग्रेस राष्ट्रपति ट्रंप को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रखने से रोके जब तक कि खुद कांग्रेस इसकी मंज़ूरी न दे।

बेहद करीबी अंतर से गिरा प्रस्ताव

वोटिंग में यह प्रस्ताव बेहद करीबी अंतर से गिरा। अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स में सटीक आंकड़े थोड़े अलग बताए गए हैं, कुछ ने इसे 50-49 बताया, कुछ ने 49-50 लेकिन बात एक ही है, यह लगभग एक वोट के अंतर से हारा। रिपब्लिकन सीनेटर्स में से सूजन कॉलिन्स और लीजा मर्कोव्स्की ने डेमोक्रेट्स का साथ दिया। लेकिन डेमोक्रेट सीनेटर जॉन फेटरमैन ने इस बार रिपब्लिकन के साथ वोट किया जिससे प्रस्ताव के पास होने की उम्मीदें खत्म हो गईं।

दो हफ्ते में दूसरी बार गिरा प्रस्ताव

यह पिछले दो हफ्तों में दूसरी बार है जब ऐसा कोई प्रस्ताव सीनेट में गिरा है। और अगर पूरे साल का हिसाब लगाएं, तो यह लगभग तेरहवीं बार है जब कांग्रेस ने ट्रंप की ईरान नीति पर लगाम लगाने की कोशिश की और हर बार नाकाम रही। व्हाइट हाउस का कहना है कि ईरान के साथ अब सीधी लड़ाई नहीं चल रही, क्योंकि दोनों पक्षों के बीच सीजफायर हो चुका है, इसलिए 1973 का वॉर पावर्स रिजोल्यूशन इस पर लागू ही नहीं होता। इससे भी आगे बढ़कर, प्रशासन ने यह भी कहा है कि उसकी नजर में यह पूरा कानून ही असंवैधानिक है।

ट्रंप के खिलाफ यह सांकेतिक विरोध ज्यादा

दूसरी तरफ, डेमोक्रेट्स खासकर सीनेटर केन का कहना है कि ईरान का कुवैत में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमला और होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी नाकाबंदी साफ दिखाती है कि लड़ाई अब भी जारी है, भले ही खुला बमबारी अभियान रुका हो। यहां एक जरूरी बात समझनी होगी, भले ही यह प्रस्ताव पास भी हो जाता, तो भी इसका राष्ट्रपति के डेस्क तक पहुंचना तय नहीं था, क्योंकि यह सिर्फ एक प्रोसीजरल मोशन था, कानून नहीं। यानी सांकेतिक विरोध ज्यादा है। दिलचस्प बात यह है कि हर वोट में कुछ रिपब्लिकन सीनेटर पार्टी लाइन से हटकर वोट करते रहे हैं। सूजन कॉलिन्स, लीजा मर्कोव्स्की, और कभी-कभी रैंड पॉल ने ऐसा किया है लेकिन यह टूट कभी इतनी बड़ी नहीं हो पाई कि प्रस्ताव पास हो सके।

ट्रंप खुद इन वोट्स से काफी नाराज बताए जाते हैं। उनका तर्क है कि बार-बार होने वाली ये कांग्रेसनल फटकार ईरान के साथ बातचीत की उनकी कोशिशों को कमजोर करती है। अमेरिका की अपनी संसद ही राष्ट्रपति की युद्ध नीति पर सवाल उठा रही है, तो यह इस बात का संकेत है कि यह टकराव लंबा खिंच सकता है।

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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