ट्रंप के दावे के बावजदू थाईलैंड-कंबोडिया में नहीं थमा संघर्ष, एक-दूसरे को निशाना बना रहे दोनों देश
- Edited by: आलोक कुमार राव
- Updated Dec 13, 2025, 11:00 AM IST
अमेरिकी राष्ट्रपति ने शुक्रवार को घोषणा की कि थाईलैंड और कंबोडिया के नेताओं ने कई दिन से जारी घातक झड़पों के बाद संघर्षविराम को नवीनीकृत करने पर सहमति व्यक्त की है। यह समझौता उस संघर्षविराम को बचाने के लिए किया गया है, जिसे अमेरिकी प्रशासन ने इसी साल की शुरुआत में कराने में मदद की थी।
थाईलैंड-कंबोडिया में फिर शुरू हुआ संघर्ष। तस्वीर-AP
Thailand Cambodia fighting : थाईलैंड और कंबोडिया के बीच संघर्ष रुकवाने के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीजफायर के दावे पर अब सवाल उठने लगे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि शनिवार तड़के दोनों देशों ने एक बार फिर एक दूसरे को निशाना बनाकर हमले शुरू कर दिए। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक थाईलैंड के प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नविरकुल ने अमेरिकी राष्ट्रपति से कहा कि कंबोडिया द्वारा अपने सभी सैनिक पीछे बुलाने और लैंडमाइंस हटा लेने के बाद ही सीजफायर संभव है।
हमारा एक्शन स्पष्ट है-थाईलैंड पीएम
थाईलैंड के पीएम ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर कहा, 'थाईलैंड तक तक हमले जारी रखेगा जब तक कि हमारी जमीन और लोगों सुरक्षित नहीं हो जाते। साथ ही हमें यह भी लगे कि अब हमारा कोई नुकसान नहीं होगा। मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं। आज की सुबह हमारी कार्रवाई यह बताने के लिए काफी है।'
अमेरिकी राष्ट्रपति ने शुक्रवार को घोषणा की कि थाईलैंड और कंबोडिया के नेताओं ने कई दिन से जारी घातक झड़पों के बाद संघर्षविराम को नवीनीकृत करने पर सहमति व्यक्त की है। यह समझौता उस संघर्षविराम को बचाने के लिए किया गया है, जिसे अमेरिकी प्रशासन ने इसी साल की शुरुआत में कराने में मदद की थी। ट्रंप ने थाई प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नविरकुल और कंबोडियाई प्रधानमंत्री हुन मानेट के साथ बातचीत के बाद सोशल मीडिया पर यह घोषणा की।
शांति समझौते को बहाल करने पर सहमत हुए दोनों देश- ट्रंप
ट्रंप ने अपने ‘ट्रुथ सोशल’ हैंडल पर पोस्ट में कहा, ‘दोनों नेता आज शाम से हर तरह की गोलीबारी रोकने और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की सहायता से मेरे साथ हुए मूल शांति समझौते को बहाल करने पर सहमत हो गए हैं।’मूल संघर्षविराम जुलाई में मलेशिया की मध्यस्थता और ट्रंप के दबाव के बाद हुआ था, जिन्होंने व्यापारिक विशेषाधिकार रोकने की धमकी दी थी। हालांकि, पहले हुए समझौते के बावजूद दोनों देशों के बीच सीमा पार छोटी-मोटी हिंसा और तीव्र विरोधी प्रचार जारी था।