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सीरिया में तख्तापलट की कोशिश, विद्रोहियों ने राजधानी दमिश्क के बाहर डाला डेरा, देश छोड़कर भागे राष्ट्रपति अल असद!

Syria Civil War: खबर है कि विद्रोही लड़ाकों ने सीरिया की राजधानी दमिश्क की भी घेराबंदी शुरू कर दी है और इसके उपनगरों तक पहुंच गए हैं। ऐसा पहली बार है जब विद्रोही 2018 के बाद से सीरियाई राजधानी के बाहरी इलाके में पहुंचे हैं।

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सीरिया में विद्रोहियों का गुट

Photo : AP

Syria Civil War: सीरिया में अल असद सरकार के खिलाफ विद्रोहियों का आतंक खतरनाक दौर में पहुंच चुका है। विद्रोही लड़ाकों ने यहां के कई शहरों पर कब्जा कर लिया है और अब वे सीरिया के तीसरे सबसे बड़े शहर होम्स की तरफ बढ़ रहे हैं। इसके अलाखा खबर है कि विद्रोही लड़ाकों ने सीरिया की राजधानी दमिश्क की भी घेराबंदी शुरू कर दी है और इसके उपनगरों तक पहुंच गए हैं। जानकारों का कहना है कि विद्रोही लड़ाके अल असद सरकार के तख्तापलट की कोशिश कर रहे हैं।

इस बीच अफवाह है कि देश के कई शहरों पर नियंत्रण कमजोर पड़ने के बाद राष्ट्रपति बसर अल असद देश छोड़कर चले गए हैं। हालांकि, सरकारी मीडिया ने इसका खंडन किया है और कहा है कि राष्ट्रपति अल असद राजधानी दमिश्क में ही हैं और अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं। बता दें, ऐसा पहली बार है जब विद्रोही 2018 के बाद से सीरियाई राजधानी के बाहरी इलाके में पहुंचे हैं।

दक्षिणी इलाकों से वापस हुई सीरियाई सेना

विद्रोहियों की ओर से हमला शनिवार को सीरियाई सेना द्वारा दक्षिणी सीरिया के ज्यादातर हिस्सों से वापस चले जाने के बाद हुआ है, जिसके कारण दो प्रांतीय राजधानियों समेत देश के अधिकांश क्षेत्र विपक्षी लड़ाकों के नियंत्रण में आ गए हैं। ब्रिटेन के सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स के प्रमुख रामी अब्दुर्रहमान ने कहा कि विद्रोही अब दमिश्क के उपनगरों मादामिया, जरामाना और दरया में सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि शनिवार को विपक्षी लड़ाके भी पूर्वी सीरिया से दमिश्क के उपनगर हरास्ता की ओर बढ़ रहे थे।

होम्स की रक्षा के लिए भेजे गए सैनिक

सीरियाई सेना शनिवार को दक्षिणी सीरिया के ज्यादातर भाग से हट गई, जिससे दो प्रांतीय राजधानियों समेत देश के अधिक क्षेत्र विपक्षी लड़ाकों के नियंत्रण में आ गए। सेना और विपक्षी युद्ध निगरानीकर्ता ने यह जानकारी दी। दारारा और स्वेदा प्रांतों से सैनिकों की वापसी ऐसे समय में हुई है जब सीरिया की सेना ने सीरिया के तीसरे सबसे बड़े शहर होम्स की रक्षा के लिए बड़ी संख्या में अतिरिक्त सैनिक भेजे हैं, क्योंकि विद्रोही इसके बाहरी इलाकों में पहुंच गए हैं। बता दें, विद्रोहियों ने सीरिया के चौथे सबसे बड़े शहर हमा पर कब्जा कर लिया था। सेना ने कहा था कि वह शहर के अंदर लड़ाई से बचने और नागरिकों की जान बचाने के लिए वहां से हट गयी है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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