नासा स्पेसएक्स मिशन: सुनीता विलियम्स की 9 माह बाद धरती पर वापसी, ड्रैगन कैप्सूल की हुई सफल लैंडिंग... यहां पढ़ें पूरा घटनाक्रम
NASA Astronauts Sunita Williams (सुनीता विलियम्स) And Butch Wilmore (बुच विल्मोर) Return To Earth, Sunita Williams’s Return, नासा स्पेसएक्स मिशन लाइव अपडेट: सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर अंतरिक्ष से वापसी का नासा स्पेसएक्स मिशन लाइव अपडेट: 8 दिन के मिशन के लिए स्पेस में गईं सुनीता विलियम्स की 9 माह बाद वापसी हो रही है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने बता दिया है कि कब वह धरती पर अपने कदम रखेंगी। सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर ने जून के पहले सप्ताह में स्पेस के लिए उड़ान भरी थी और अब मंगलवार को उनकी वापसी हो रही है।
नासा स्पेसएक्स मिशन: सुनीता विलियम्स की 9 माह बाद धरती पर वापसी, ड्रैगन कैप्सूल की हुई सफल लैंडिंग... यहां पढ़ें पूरा घटनाक्रम
अंतरिक्ष यात्रियों ने रचा इतिहास: राजनाथ सिंह
उन्होंने कहा, "सुनीता विलियम्स की अविश्वसनीय यात्रा, अटूट समर्पण, दृढ़ता और संघर्ष की भावना दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रेरित करेगी। उनकी सुरक्षित वापसी अंतरिक्ष प्रेमियों और पूरी दुनिया के लिए जश्न का क्षण है। उनकी हिम्मत और उपलब्धियां हम सभी को गौरवान्वित करती हैं। उन्हें सुरक्षित रूप से धरती पर वापस लाने के लिए सभी हितधारकों को बधाई और बहुत-बहुत धन्यवाद।"
सुनीता विलियम्स, नासा के बुच विल्मोर, नासा के निक हेग और रूसी अंतरिक्ष यात्री अलेक्जेंडर गोरबुनोव के साथ मंगलवार शाम को धरती पर लौट आए, जो आठ दिनों का छोटा मिशन था जो अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर अप्रत्याशित नौ महीने के प्रवास में बदल गया।
पृथ्वी पर लौटने वाले अंतरिक्ष यात्रियों को करना पड़ता है कई चुनौतियों का सामना
विल्मोर और विलियम्स बोइंग के नए स्टारलाइनर यान से पिछले साल पांच जून को केप कैनवेरल से रवाना हुए थे। वे दोनों आठ दिन के मिशन के लिए ही गए थे, लेकिन अंतरिक्ष यान से हीलियम के रिसाव और वेग में कमी के कारण ये लगभग नौ माह से अंतरिक्ष स्टेशन में फंसे हुए थे। विभिन्न अंतरिक्ष मिशन के तहत यात्रा कर चुके कई अंतरिक्ष यात्रियों ने पृथ्वी पर लौटने के बाद चलने में कठिनाई, देखने में दिक्कत, चक्कर आने तथा ‘बेबी फीट’ नामक स्थिति जैसी चुनौतियों का सामना करने की बात कही है। ‘बेबी फीट’ का तात्पर्य है कि अंतरिक्ष यात्रियों के तलवों की त्वचा का मोटा हिस्सा निकल जाता है और उनके तलवे बच्चे की तरह मुलायम हो जाते हैं।
ह्यूस्टन स्थित ‘बेलर कॉलेज ऑफ मेडिसिन’ ने अंतरिक्ष में शरीर में होने वाले बदलावों के बारे में कहा, ‘‘जब अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी पर वापस लौटते हैं तो उन्हें पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के अनुसार तुरंत फिर से ढलना पड़ता है। उन्हें खड़े होने, अपनी दृष्टि को स्थिर करने, चलने और मुड़ने में समस्या हो सकती है। पृथ्वी पर लौटने वाले अंतरिक्ष यात्रियों को उनकी बेहतरी के लिए पृथ्वी पर लौटने के तुरंत बाद अक्सर एक कुर्सी पर बिठाया जाता है।’’ अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी पर जीवन के अनुसार स्वयं को फिर से ढालने में कई सप्ताह लगते हैं। कान के अंदर स्थित ‘वेस्टिबुलर’ अंग मस्तिष्क को गुरुत्वाकर्षण के बारे में जानकारी भेजकर पृथ्वी पर चलते समय मनुष्यों को अपने शरीर को संतुलित रखने में मदद करता है।
