यूक्रेन की राजधानी कीव के पश्चिमी हिस्से में स्थित बुचा जिले के मायला (Myla) गांव में शुक्रवार रात एक रूसी ड्रोन ने हथियारों और गोला-बारूद के गोदाम को निशाना बनाया। इस हमले के बाद भीषण विस्फोट हुए और भीषण आग लग गई, जिसने आसपास की दर्जनों इमारतों और रिहायशी मकानों को चपेट में ले लिया। यूक्रेन के अधिकारियों के अनुसार, इस भयावह घटना में कम से कम 37 लोगों की मौत हो चुकी है। यह इस साल (2026) का यूक्रेन पर हुआ सबसे विनाशकारी हमला माना जा रहा है।
गोदाम में लगातार धमाके और भीषण तबाही
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए पुष्टि की कि पहला हमला रक्षा बलों के एक गोला-बारूद भंडारण स्थल पर हुआ। इस गोदाम में तोप के गोले, बारूदी सुरंगें और ड्रोन रखे हुए थे, जिनके टकराने से लगातार भयंकर धमाके होते रहे। इस भीषण तबाही पर गुस्सा व्यक्त करते हुए राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा, यह हथियारों का गोदाम वहां बिल्कुल नहीं होना चाहिए था। जिन लोगों ने यह होने दिया, उन्हें अपने फैसलों के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
गंभीर लापरवाही: यूक्रेनी सरकार में उठते सवाल
यूक्रेन के प्रधानमंत्री सेरही कोरेत्स्की ने अधिकारियों की लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने जुलाई में कीव के उपनगर विश्नेवे में हुए ऐसे ही एक हमले का जिक्र किया, जिसमें गोला-बारूद डिपो पर हमला होने से 22 लोगों की मौत हुई थी। प्रधानमंत्री ने कहा, दुर्भाग्य से विश्नेवे की त्रासदी से कोई सबक नहीं लिया गया। युद्ध के पांचवें वर्ष में इस तरह की बार-बार गलतियां करना आपराधिक लापरवाही है। दोषियों को बिना किसी अपवाद के सख्त सजा दी जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
रूस का दावा
दूसरी ओर, रूस के रक्षा मंत्रालय ने हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि उसने मायला में उस गोदाम को निशाना बनाया जहां लंबी दूरी के ड्रोनों के कलपुर्जे और लॉन्च बूस्टर रखे गए थे। इसके अलावा, रूस ने मायकोलाइव और इजमैल के बंदरगाहों तथा कीव क्षेत्र में यूक्रेन की 'फ्लेमिंगो' क्रूज़ मिसाइलों के पुर्जे बनाने वाले ठिकानों को भी निशाना बनाने का दावा किया है।
जेट-संचालित ड्रोनों का बढ़ता खतरा
यूक्रेन के राष्ट्रपति कार्यालय के उप प्रमुख पावलो पालिसा ने बताया कि रूस ने हाल के दिनों में जेट-संचालित ड्रोनों का इस्तेमाल काफी बढ़ा दिया है। उन्होंने स्वीकार किया कि वर्तमान में यूक्रेन के पास मौजूद इंटरसेप्टर ड्रोन इन जेट-ड्रोनों को रोकने में पूरी तरह प्रभावी साबित नहीं हो पा रहे हैं और यूक्रेन को अपनी रक्षा प्रणालियों में जल्द बदलाव करने की जरूरत है।
