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इमरान खान के बाद क्या अब बुशरा बीबी होंगी गिरफ्तार? कोशिश में जुटे पाकिस्तान के अधिकारी

World News: पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। जेल की सलाखों के पीछे बंद इमरान खान की पत्नी को गिरफ्तार करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। पाकिस्तान के अधिकारी बुशरा बीबी को गिरफ्तार करने के लिए प्रयास कर रहे हैं।

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इमरान खान और बुशरा बीबी।

Bushra Bibi in Trouble: पाकिस्तान में अधिकारी 19 करोड़ पाउंड के कथित भ्रष्टाचार मामले में अदालत में पेश नहीं होने पर जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पत्नी बुशरा बीबी को गिरफ्तार करने के लिए जोर आजमाइश कर रहे हैं। ‘एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ के मुताबिक जवाबदेही अदालत द्वारा 22 नवंबर को सुनाए गए फैसले के बाद सख्ती की जा रही है। बुशरा के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए गए थे, क्योंकि वह लगातार आठ सुनवाई में अनुपस्थित रही थीं। न्यायाधीश नासिर जावेद राणा ने अदालत में पेश होने से छूट देने की उनकी याचिका खारिज कर दी।

बुशरा बीबी को गिरफ्तार करने की कोशिश में पाकिस्तानी अधिकारी

अधिकारियों ने बताया कि निर्देश के बाद राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) ने रावलपिंडी की अपनी टीम से बुशरा बीबी को गिरफ्तार करने को कहा, जो खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की प्रांतीय राजधानी पेशावर में रह रही हैं। खैबर पख्तूनख्वा में खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ सत्ता में है।

खबर में कहा गया है कि एनएबी की एक टीम पुलिस के साथ 23 नवंबर को पेशावर गई थी, लेकिन उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। अधिकारियों ने बताया कि जब टीम ने बुशरा बीबी के घर पर गिरफ्तारी वारंट दिखाया, तो पता चला कि वह घर पर मौजूद नहीं थी।

इमरान खान और बुशरा बीबी दोनों पर क्या है आरोप?

इमरान खान और बुशरा बीबी दोनों पर 50 अरब पाकिस्तानी रुपये (19 करोड़ पाउंड) के दुरुपयोग का आरोप है, जिसे ब्रिटेन की राष्ट्रीय अपराध एजेंसी ने एक संपत्ति कारोबारी के साथ समझौते के तहत पाकिस्तान को लौटा दिया था। यह धनराशि राष्ट्रीय खजाने के लिए थी, लेकिन इसका इस्तेमाल उस व्यवसायी के निजी लाभ के लिए किया गया, जिसने बुशरा और खान को विश्वविद्यालय स्थापित करने में मदद की थी। अल-कादिर ट्रस्ट के ट्रस्टी के रूप में बीबी पर इस समझौते से लाभ उठाने का आरोप है। बुशरा पर झेलम में अल-कादिर विश्वविद्यालय के लिए 458 कनाल भूमि अधिग्रहण का भी आरोप है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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