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रेपिस्ट और डकैतों संग कटेंगी इमरान खान की रातें, खूंखार कैदियों की जेल में भेजे गए Pak के पूर्व प्रधानमंत्री

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Aug 6, 2023, 02:30 PM IST

Imran Khan in Attock Jail: इमरान खान को शनिवार को तोशाखाना केस में दोषी ठहराया गया था। उन्हें तीन साल की कैद और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। पाकिस्तान की सरकार ने इमरान खान को इस्लामाबाद जेल के बजाए उस अटक जेल में भेजा है।

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इमरान खान

Imran Khan in Attock Jail: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के आने वाले दिन बहुत ही मुसीबतों में कटने वाले हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान की सरकार ने इमरान खान को इस्लामाबाद जेल के बजाए उस अटक जेल में भेजा है, जहां हत्यारों, डकैतों और रेपिस्ट जैसे खूंखार कैदियों को रखा जाता है। यानी अब इमरान खान इन कैदियों के बीच अपनी रातें गुजारने वाले हैं।

बता दें, इमरान खान को शनिवार को तोशाखाना केस में दोषी ठहराया गया था। उन्हें तीन साल की कैद और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। सबसे खास तो यह थी कि इमरान खान को सजा सुनाए जाने के 15 मिनट पहले ही उनकी गिरफ्तारी की जा चुकी थी। जानकारी के मुताबिक, जब इमरान खान को सजा सुनाई जा रही थी, तब न तो वे और न ही उनके वकील कोर्ट रूम में मौजूद थे।

चुनाव से कुछ महीने पहले हुई गिरफ्तारी

इमरान खान की गिरफ्तारी ऐसे समय पर हुई है, जब पाकिस्तान आम चुनाव की तैयारी कर रहा है। उनकी गिरफ्तारी को लेकर यह कहा जा रहा है कि अब पाकिस्तान की राजनीति से इमरान खान के दिन लद चुके हैं। दरअसल, उन्हें तीन साल की सजा सुनाई गई है। इसके साथ ही अगले पांच साल तक वे चुनाव भी नहीं लड़ सकेंगे। ऐसे में शहबाज शरीफ सरकार के सामने बड़ी चुनौती लगभग खत्म हो चुकी है।

अटक जेल जाने वाले पहले प्रधानमंत्री

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान मुल्क के ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं, जिन्हें अटक जेल में रखा गया है। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में अटक जेल स्थित है। बता दें, इमरान खान ने अपनी गिरफ्तारी से पहले ट्वीट कर कहा था कि मैं अपनी गिरफ्तारी को लेकर आशंकत हूं और इस संदेश को गिरफ्तारी से पहले रिकॉर्ड कर रहा हूं। उन्होंने नवाज शरीफ का बिना नाम लेते हुए उन पर निशाना साधा था और आरोप लगाया था कि यह पूरी योजना लंदन से अमल में लाई जा रही है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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