ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच जारी युद्ध गुरुवार तड़के और भड़क उठा, जब ईरान ने इजराइल पर नई मिसाइलें दागीं। यह हमला ऐसे समय हुआ जब अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा एक ईरानी युद्धपोत को डुबोए जाने के बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर है। ईरान ने चेतावनी दी है कि वह पूरे क्षेत्र की सैन्य और आर्थिक अवसंरचना को निशाना बना सकता है। इजराइल ने हमले की पुष्टि करते हुए बताया कि उसी समय उसकी सेना लेबनान में भी नए हवाई हमले कर रही थी। बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में ईरान समर्थित संगठन Hezbollah को निशाना बनाया गया।
सैन्य ठिकानों और सुरक्षा ढांचे पर हमले
अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने दावा किया कि अमेरिकी पनडुब्बी से दागे गए टॉरपीडो ने हिंद महासागर में एक ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया। श्रीलंका के अधिकारियों के अनुसार जहाज से 32 लोगों को बचाया गया, जबकि 87 शव बरामद किए गए। इजराइल ने कहा कि उसने ईरान की अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़े स्वयंसेवी बल ‘बसीज’ के भवनों को निशाना बनाया। साथ ही आंतरिक सुरक्षा कमान से जुड़े ढांचों पर भी हमले किए गए। अमेरिका और इजराइल का संकेत है कि इन हमलों का मकसद ईरान की मौजूदा सत्ता को कमजोर करना है। हालांकि ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि उनकी सेना विकेंद्रीकृत ढांचे में काम करती है, जिससे शीर्ष कमान पर हमलों का असर सीमित हो सकता है।
बदलती रणनीति और अनिश्चित समयसीमा
पेंटागन ब्रीफिंग में हेगसेथ ने सैन्य अभियान की कोई तय समयसीमा नहीं बताई। उनका कहना था कि “चार हफ्ते भी हो सकते हैं, छह भी, आठ भी- गति हम तय करेंगे।” मध्य-पूर्व में अमेरिकी शीर्ष कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने दावा किया कि ईरान की वायु रक्षा प्रणाली और बैलिस्टिक मिसाइल ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचाया गया है। इजराइल ने कुछ पाबंदियां ढीली करते हुए कहा कि जिन कार्यस्थलों के पास सुरक्षित शेल्टर हैं, वे खुल सकते हैं, लेकिन स्कूल फिलहाल बंद रहेंगे।
बढ़ता मौत का आंकड़ा, क्षेत्रीय असर
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक ईरान में 1,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लेबनान में 70 से ज्यादा और इजराइल में एक दर्जन के करीब लोगों की जान गई है। छह अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने की भी पुष्टि हुई है। संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाला तेल परिवहन लगभग 90 प्रतिशत तक घट गया है। एक माल्टा-ध्वज वाला कंटेनर जहाज भी मिसाइल हमले का शिकार हुआ। तेल कीमतों में उछाल और शेयर बाजारों में गिरावट ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है।
