India Pakistan Ceasefire: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को भारत और पाकिस्तान को एक साथ डिनर टेबल पर लाने की बात कही और दोनों देशों के नेताओं को शक्तिशाली, मजबूत और स्मार्ट बताया। हाल ही में भारत ने दो टूक जवाब देते हुए स्पष्ट कर दिया था कि कश्मीर के विषय में भारत को किसी भी तीसरे पक्ष की दखलअंदाजी मंजूर नहीं है। इसके बावजूद ट्रंप अपनी दखलअंदाजी से बाज नहीं आ रहे हैं।
ट्रंप ने क्या कुछ कहा?
समाचार एजेंसी एएनआई ने व्हाइट हाउस के हवाले से ट्रंप का एक वीडियो जारी किया जिसमें उन्होंने भारत और पाकिस्तान को एक डिनर टेबल पर लाने की अपनी इच्छा जाहिर की। ट्रंप ने अमेरिका-सऊदी निवेश फोरम में कहा कि मुझे युद्ध पसंद नहीं है... कुछ दिन पहले मेरे प्रशासन ने भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को रोकने के लिए ऐतिहासिक युद्धविराम सफलतापूर्वक करवाया। मैंने काफी हद तक व्यापार का इस्तेमाल किया। मैंने कहा चलो एक डील करते हैं, चलो कुछ व्यापार करते हैं। चलो परमाणु मिसाइलों का व्यापार नहीं करते, चलो उन चीजों का व्यापार करते हैं जिन्हें आप खूबसूरती से बनाते हैं...
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के पास शक्तिशाली, मजबूत और स्मार्ट लीडर हैं। यह सब रुक गया और उम्मीद है कि यह ऐसे ही रहेगा... वे (भारत-पाकिस्तान) वास्तव में साथ मिल रहे हैं। शायद हम उन्हें साथ में लाकर एक अच्छा डिनर भी करा सकें। उस संघर्ष में लाखों लोगों की मौत हो सकती थी, जो छोटे से शुरू हुआ, पर दिन प्रतिदिन बड़ा हो रहा था।
9 आतंकी ठिकाने नेस्तनाबूत
दरअसल, पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में 9 आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूत किया जिसके बाद पाकिस्तान की ओर से ड्रोन और मिसाइलें से हमला किया गया। हालांकि, भारत ने पाकिस्तान के नापाक मंसूबों को नाकाम कर दिया और बाद में 10 मई को दोनों देशों ने संघर्षविराम की घोषणा की।
ट्रंप को भारत का दो टूक जवाब
इससे पहले ट्रंप ने व्हाइट हाउस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत और पाकिस्तान के बीच शनिवार को हुई संघर्षविराम की घोषणा के बारे में दावा किया था कि हमने बहुत मदद की। हमने व्यापार से मदद की। हालांकि, भारत ने मंगलवार को दो टूक जवाब देते हुए अमेरिका के दावे को खारिज कर दिया और कहा कि अमेरिकी नेताओं के साथ बातचीत में व्यापार (Trade) को लेकर कोई जिक्र नहीं हुआ था।
साथ ही भारतीय विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को साफ कर दिया कि कश्मीर के विषय पर भारत को किसी भी तीसरे पक्ष की दखलअंदाजी मंजूर नहीं है। भारत ने कहा कि उसका लंबे समय से रुख यह है कि कश्मीर मुद्दे को भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय रूप से सुलझाया जाना चाहिए और इस रुख में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
