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चीन में भारतीय पत्रकारों की उपस्थिति होगी शून्य, आखिरी जर्नलिस्ट भी छोड़ेगा देश

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jun 13, 2023, 06:57 AM IST

Indian Journalist in China: जानकारी के मुताबिक, 2023 की शुरुआत में चीन में चार भारतीय पत्रकार काम कर रहे थे। इसमें दो पत्रकारों के वीजा को चीनी सरकार ने फ्रीज कर दिया, जिसके बाद उन्हें अप्रैल में चीन वापस जाने से रोक दिया गया। वहीं शेष दो में से एक ने 11 जून को चीन छोड़ दिया था, क्योंकि उसके वीजा समाप्त हो गया था।

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भारत-चीन

Photo : BCCL

Indian Journalist in China: चीन में मीडिया पर किस तरह प्रतिबंध लगाए गए हैं, यह किसी से छिपा नहीं है। ऐसी रिपोर्ट्स कई बार सामने आई हैं, जब चीनी सरकार ने पत्रकारों की स्वतंत्रता का हनन किया है। अब चीन पूरी तरह से भारतीय पत्रकारों के काम पर प्रतिबंध लगाना चाहता है। इतना ही नहीं, उसने मुल्क में काम कर रहे आखिरी पत्रकार को इसी महीने देश छोड़ने तक को कह दिया है।

दरअसल, चीन में काम कर रहे आखिरी भारतीय पत्रकार का शी जिनपिंग सरकार ने वीजा नहीं बढ़ाया है। चीनी विदेश मंत्रालय ने सोमवार को भारत पर देश में काम करने वाले उसके पत्रकारों के साथ भेदभाव और अनुचित व्यवहार करने का आरोप लगाया है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि चीन में काम करने वाला आखिरी भारतीय पत्रकार समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) से जुड़ा था और इस महीने वह छोड़ देगा जब उसका वीजा समाप्त हो रहा है।

2023 की शुरुआत में थे चार भारतीय पत्रकार

जानकारी के मुताबिक, 2023 की शुरुआत में चीन में चार भारतीय पत्रकार काम कर रहे थे। इसमें दो पत्रकारों के वीजा को चीनी सरकार ने फ्रीज कर दिया, जिसके बाद उन्हें अप्रैल में चीन वापस जाने से रोक दिया गया। वहीं शेष दो में से एक ने 11 जून को चीन छोड़ दिया था, क्योंकि उसके वीजा समाप्त हो गया था। इसके बाद चीन में बचा आखिरी भारतीय पत्रकार इसी महीने (जून के अंत तक) भारत वापस लौट आएगा। इसके बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था यानी चीन में भारतीय मीडिया की उपस्थिति भी शून्य हो जाएगी।

चीन ने उल्टा भारत पर लगाए आरोप

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने सोमवार को आरोप लगाया कि भारत में चीनी पत्रकारों के साथ गलत व्यवहार किया गया। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में वांग के हवाले से कहा गया है, हाल के वर्षों में, भारत में चीनी पत्रकारों को अनुचित और भेदभावपूर्ण व्यवस्था दी गई है। चीनी विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया है कि भारत ने 2020 से चीनी पत्रकारों के वीजा को अनुमोदित नहीं किया है, जिसके चलते 14 में से सिर्फ एक चीनी पत्रकार भारत में काम कर रहा है।

भारत ने दी प्रतिक्रिया

चीन के इस आरोप के बाद भारत सरकार ने भी प्रतिक्रिया दी है। सरकार की ओर से कहा गया है कि भारत में चीनी पत्रकार बिना किसी कठिनाई के देश में काम कर रहे हैं, लेकिन चीन में भारतीय पत्रकारों के साथ ऐसा नहीं है। पिछले महीने, भारत ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के विदेश मंत्रियों की बैठक में जाने वाले चीनी पत्रकारों के अस्थायी वीजा को मंजूरी दी। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने सभी विदेशी पत्रकारों को देश में काम करने की अनुमति दी है

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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