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Israel Lebanon War: हिजबुल्ला के गढ़ से दूर उत्तर लेबनान में इजराइल का हमला, कम से कम 18 की मौत

Israel-Lebanon War: हिजबुल्ला के गढ़ से दूर उत्तर लेबनान में इजराइल के हमले में कम से कम 18 की मौत हो गई। उधर इजराइल की सेना के अनुसार उत्तर इजराइल में रविवार को एक सैन्य अड्डे पर हिजबुल्ला के ड्रोन हमले में चार सैनिक मारे गए और सात अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।

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इजराइली सेना के हमले में कम से कम 18 की मौत।

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

World News: उत्तर लेबनान में सोमवार को हुए एक इजराइली हवाई हमले में कम से कम 18 लोग मारे गए हैं। लेबनान के रेड क्रॉस ने यह जानकारी दी। यह हमला सोमवार को ऐतो गांव में एक छोटे से अपार्टमेंट पर किया गया जो देश के दक्षिण और पूर्व में हिजबुल्ला चरमपंथी समूह के प्रभुत्व वाले इलाकों से दूर है। इजराइल की सेना की ओर से तत्काल कोई टिप्पणी नहीं आई और यह स्पष्ट नहीं हो सका कि हमले में किसे निशाना बनाया गया।

फलस्तीनी चिकित्सकों ने दी यह जानकारी

इससे कुछ घंटे पहले गाजा पट्टी में एक अस्पताल परिसर पर इजराइली हवाई हमले में कम से कम चार लोगों की मौत हो गई और हमले के चलते युद्ध से विस्थापित लोगों के लिए बनाए गए एक शरणार्थी शिविर में आग लग जाने से कई लोग गंभीर रूप से झुलस गए। फलस्तीनी चिकित्सकों ने यह जानकारी दी। इजराइली सेना ने कहा कि उसने नागरिकों के बीच छिपे आतंकवादियों को निशाना बनाया था। हालांकि उसने कोई सबूत नहीं दिया।

हाल के महीनों में इजराइल ने कई बार भीड़ वाले शरणार्थी शिविरों और तंबुओं में बनाए गए शिविरों पर हमला किया है और आरोप लगाया है कि हमास के लड़ाके हमलों के लिए इनका इस्तेमाल कर रहे हैं। दीर अल-बला में स्थित अल-अक्सा शहीद अस्पताल में पहले से ही पास के एक स्कूल पर हुए हमले में बड़ी संख्या में घायल लोगों का इलाज किया जा रहा है और अब शिविर के आग की चपेट में आ जाने की घटना सामने आई है। स्कूल में हुए उस हमले में कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई थी।

गाजा पट्टी में हर दिन हमले कर रहा इजराइल

इस हमले में घायल हुए लोगों में बच्चे भी शामिल हैं और अस्पताल घायलों से भरा हुआ है। अस्पताल के रिकार्ड से सामने आया है कि चार लोग मारे गए और 40 घायल हुए हैं। अल-अक्सा शहीद अस्पताल के अनुसार, गंभीर रूप से जले 25 लोगों को दक्षिणी गाजा के नासिर अस्पताल में स्थानांतरित किया गया है। युद्ध के एक वर्ष से अधिक समय बाद भी इजराइल गाजा पट्टी में लगभग हर दिन हमले कर रहा है।

उधर इजराइल की सेना के अनुसार उत्तर इजराइल में रविवार को एक सैन्य अड्डे पर हिजबुल्ला के ड्रोन हमले में चार सैनिक मारे गए और सात अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। सेना ने बताया कि लगभग दो सप्ताह पहले इजराइल द्वारा लेबनान पर शुरू किए जमीनी हमलों के बाद से यह आतंकवादी समूह द्वारा किया गया सबसे घातक हमला है।

हिजबुल्ला और इजराइल के बीच हो रही लड़ाई

लेबनान के हिजबुल्ला ने बिनयामीना शहर के पास हुए हमले को बेरूत पर बृहस्पतिवार को किए गए इजराइली हमलों का बदला बताया, जिसमें 22 लोग मारे गए थे। बाद में उसने कहा कि उसने इजराइल की गोलानी ब्रिगेड को निशाना बनाया और ड्रोन हमलों के दौरान इजराइली वायु रक्षा प्रणालियों पर दर्जनों मिसाइलें दागीं। इजराइल की राष्ट्रीय बचाव सेवा ने कहा कि हमले में 61 लोग घायल हुए हैं। गाजा में युद्ध शुरू होने के बाद से हिजबुल्ला और इजराइल के बीच लगभग हर दिन लड़ाई हो रही है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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