पश्चिम एशिया में जारी इजरायल-ईरान संघर्ष के बीच भारत में इजरायल के राजदूत रेवेन अजार ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ किया इजरायल का प्लान ईरान की जमीन कब्जा करना नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान अपने रवैये में बदलाव करता है तो इजरायल युद्धविराम के लिए तैयार है।
इजरायल हमेशा कूटनीति का समर्थक
पत्रकारों से बातचीत करते हुए अजार ने कहा कि इजरायल हमेशा कूटनीति का समर्थक रहा है,लेकिन हालात ऐसे बन गए कि उसे सैन्य कार्रवाई का रास्ता अपनाना पड़ा। उन्होंने उम्मीद जताई कि मौजूदा सैन्य दबाव के बाद कूटनीति फिर से प्रभावी हो सकती है। अजार ने कहा कि हम हमेशा कूटनीति के पक्ष में रहे हैं। दुर्भाग्य से कूटनीति की संभावनाएं खत्म होने के बाद हमें सैन्य कार्रवाई करनी पड़ी। हमें उम्मीद है कि हमारी सैन्य कार्रवाई के बाद कूटनीति फिर से प्रासंगिक बनेगी।
उन्होंने बताया कि पिछले कुछ दिनों में इजरायल ने अमेरिका और क्षेत्र के कई देशों सहित अपने सहयोगी देशों के साथ कूटनीतिक चैनलों के माध्यम से लगातार संपर्क बनाए रखा है। इसके अलावा कुछ ऐसे देशों से भी बातचीत हुई है जिनसे इजरायल के औपचारिक कूटनीतिक संबंध नहीं हैं।
इजरायली वायु सेना का ईरान के आसमान पर नियंत्रण
इजरायली राजदूत ने दावा किया कि हालिया सैन्य कार्रवाई के जरिए इजरायल ने ईरान की मिसाइल लॉन्चिंग क्षमता को काफी हद तक कमजोर कर दिया है। उन्होंने कहा कि इजरायल की वायु सेना फिलहाल ईरान के आसमान पर नियंत्रण बनाए हुए है और ईरान की स्थिति बेहद मुश्किल में है। अजार के मुताबिक अगर ईरान अपना रुख बदलता है और इजरायल को मान्यता देता है, तो क्षेत्र का भविष्य बेहतर हो सकता है।
17वें दिन भी जारी है संघर्ष
गौरतलब है कि इजरायल और ईरान के बीच सैन्य टकराव अब 17वें दिन में प्रवेश कर चुका है। दोनों देशों के बीच लगातार हवाई हमले, मिसाइल हमले और सैन्य अभियानों की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं हुए तो यह संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है, जिसका असर वैश्विक राजनीति, ऊर्जा बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।
