Iran US Tension: अमेरिका की ओर से बड़े पैमाने पर सैन्य तैनाती के बीच ईरान ने बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दबाव बनाने की रणनीति का कड़ा विरोध किया। यह विरोध तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर जिनेवा में होने वाली अहम वार्ता से पहले किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
ईरान ने ट्रंप के बयानों को कभी 'बड़ा झूठ' बताया तो कभी कहा कि 'सम्मानजनक कूटनीति' के जरिये वार्ता से समझौता हो सकता है। गुरुवार को होने वाली वार्ता से पहले दो ईरानी अधिकारियों की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब अमेरिका ने दशकों बाद मध्य पूर्व में विमानों और युद्धपोतों की इतनी बड़ी तैनाती की है।
ट्रंप बार-बार हमला करने की दे रहे धमकी
ये तैनाती ट्रंप के उन प्रयासों का हिस्सा है जिनके तहत वे ईरान के साथ समझौता करना चाहते हैं, जबकि ईरान पिछले महीने हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बाद बढ़ते असंतोष से जूझ रहा है। वार्ता विफल होने को लेकर ट्रंप ने बार-बार ईरान पर हमला करने की धमकी दी है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि बातचीत विफल होती है तो अमेरिका तेहरान पर हमला कर सकता है। मध्य पूर्व के देशों को डर है कि इससे एक नया क्षेत्रीय युद्ध छिड़ सकता है, क्योंकि वर्षों से जारी इजरायल-हमास युद्ध की आग अब भी सुलग रही है।
ईरान पहले ही कह चुका है कि अगर अमेरिका ने हमला किया तो मध्य पूर्व में स्थित सभी अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा। इससे क्षेत्र में तैनात हजारों अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा पर खतरा मंडरा सकता है। इससे पहले, ट्रंप ने मंगलवार को कहा था कि ईरान ऐसी मिसाइल बना चुका है, जो यूरोप और विदेशों में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना सकती हैं और वह ऐसे हथियार बनाने की दिशा में काम कर रहा है, जो भविष्य में अमेरिका तक पहुंच सकें।
