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फ्रांस में राष्ट्रपति मैक्रों के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव दायर, विपक्ष बोला- 'उन्हें जाना ही होगा'; पढ़ें- पूरा मामला

France Macron News: फ्रांस में विपक्षी दलों ने देश के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव दायर किया है। देश में कमजोर होती अर्थव्यवस्था के कारण राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है।

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राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव (Photo- PTI)

France Political Crisis: फ्रांस में विपक्ष ने देश के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (Emmanuel Macron) के खिलाफ महाभियोग चलाने की मांग करते हुए संसद में एक प्रस्ताव पेश किया। वामपंथी फ्रांस अनबोड (LFI) पार्टी के नेता जीन-ल्यूक मेलेंचोन (Luc Melenchon) ने शनिवार को इस खबर की पुष्टि की और जोर देकर कहा कि देश में राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए मैक्रों का जाना जरूरी है।

उनकी सरकार होती तो गाजा में...

मेलेंचोन ने शनिवार को उत्तरी शहर लिली में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, 'उन्हें जाना ही होगा।' गाजा की मौजूदा स्थिति के बारे में पूछे जाने पर, मेलेंचोन ने जोर देकर कहा कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में होती, तो फ्रांसीसी नौसेना युद्धग्रस्त तटीय क्षेत्र में मानवीय सहायता पहुंचाने वाले ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला जहाजों की सुरक्षा कर रही होती।

उन्होंने यह भी बताया कि फ्रांस के प्रधानमंत्री फ्रेंकोइस बायरू की वर्तमान सरकार सोमवार को विश्वास मत में गिर जाएगी और कहा कि अगर ऐसा हो गया तो यह जनता की जीत होगी।

फ्रांस में राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई

बायरू राष्ट्रीय सभा में महत्वपूर्ण विश्वास मत की तैयारी के दौरान फ्रांस बढ़ते राजनीतिक तनाव का सामना कर रहा है। फ्रांसीसी प्रधानमंत्री जिन्होंने जुलाई में 2026 के बजट ढांचे को पेश किया था, वह अब फ्रांस के बढ़ते सार्वजनिक कर्ज को कम करने के प्रयासों के तहत लगभग €44 बिलियन ($51 बिलियन) बचाने के लिए संसद से समर्थन मांग रहे हैं। यह देश की GDP का 113 प्रतिशत है।

अराजकता के बजाय जिम्मेदारी देखें

इस मामले को और भी चिंताजनक बनाने वाली बात यह है कि फ्रांस का बजट घाटा यूरोपीय संघ के सबसे बड़े बजट घाटों में से एक है, जो वर्तमान में 5.8 प्रतिशत है। संसद को संबोधित करते हुए, बायरू ने चेतावनी दी कि देश 'अति-ऋणग्रस्तता के कगार पर' है और सांसदों से 'अराजकता के बजाय जिम्मेदारी' चुनने का आग्रह किया।

प्रमुख विपक्षी दल डालेंगे खिलाफ वोट

इस बीच, वामपंथी पार्टी LFI से लेकर दक्षिणपंथी नेशनल रैली (RN) और साथ ही सोशलिस्टों तक, सभी विपक्षी दलों ने सोमवार को होने वाले मतदान में सरकार के खिलाफ वोट देने का संकल्प लिया है। गौरतलब है कि बजट वार्ता फ्रांसीसी राजनीति में तनाव का एक प्रमुख स्रोत रही है।

फ्रांस पिछले साल 2025 के बजट पर सहमति बनाने में पहले ही नाकाम रहा था, जिसके कारण दिसंबर में वामपंथी और अति-दक्षिणपंथी दलों के अविश्वास प्रस्ताव के पीछे एकजुट होने के बाद मिशेल बार्नियर सरकार गिर गई थी। इसलिए, सोमवार का मतदान फ्रांसीसी राजनीति की उथल-पुथल भरी प्रकृति को एक बार फिर दिखाएगा।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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