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'फाइव आइज' देशों ने चीन पर लगाए गंभीर आरोप, ट्रेड सीक्रेट्स और पर्सनल डेटा चोरी कर रहा ड्रैगन

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Oct 24, 2023, 09:03 AM IST

Five Eyes countries: फाइव आइज द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बना एक सुरक्षा गठबंधन है, जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल हैं। यह वैश्विक खतरे के परिदृश्य पर नज़र रखता है और सभी देश एक-दूसरे से खुफिया जानकारी साझा करते हैं।

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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग

Photo : BCCL

Five Eyes countries: चीन पर एक बार फिर गंभीर आरोप लगे हैं। इस बार फाइव आइज देशों की ओर से आरोप लगाया गया है कि चीन दुनिया के लिए बड़ा खतरा पैदा कर रहा है और विभिन्न देशों की बौद्धिक संपदा, ट्रेड सीक्रेट और पर्सनल डेटा चुरा रहा है। चीन पर ये आरोप फाइव आइज देशों के इंटेलीजेंस लीडर्स की ओर से लगाए गए हैं।

इसमें कहा गया है कि चीन वैश्विक जासूसी अभियान चला रहा है और विभिन्न देशों के पर्सनल डेटा को चोरी कर रहा है। एफबीआई निदेशक क्रिस्टोफर रे ने चीन पर आरोप लगाते हुए कहा कि विभिन्न देशों में चीन द्वारा डेटा चोरी के करीब 2000 मामलों की जांच चल रही है। बता दें फाइव आइज द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बना एक सुरक्षा गठबंधन है, जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल हैं। यह वैश्विक खतरे के परिदृश्य पर नज़र रखता है और सभी देश एक-दूसरे से खुफिया जानकारी साझा करते हैं।

तकनीक और नवाचार चुरा रहा चीन

एफबीआई निदेशक ने कहा, चीन में सत्तारूढ़ पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना एक निर्णायक खतरे का प्रतिनिधित्व कर रही है। उन्होंने कहा, ऐसा कोई देश नहीं है जो हमारे विचारों, हमारे नवाचार, हमारी आर्थिक सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए व्यापक खतरा पैदा कर रहा हो। लेकिन चीनी सरकार द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पूरे देश में बौद्धिक संपदा, ट्रेड सीक्रेट्स और व्यक्तिगत डेटा चुराने की कोशिशें देखी गईं। उन्होंने आगे कहा कि बड़ी कंपनियों से लेकर छोटे स्टार्टअप, कृषि, बायोटेक, स्वास्थ्य देखभाल, रोबोटिक्स, विमानन, अकादमिक अनुसंधान का डेटा चोरी किया जा रहा है।

सैन्य और शैक्षणिक डेटा भी चोरी कर रहा चीन

इसके अलावा, यूके एमआई5 के महानिदेशक केन मैक्कलम ने कहा कि चीन देश की सैन्य, सरकार के साथ-साथ शैक्षणिक डेटा को चुराने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा, यह सिर्फ सरकारी रहस्यों या सैन्य रहस्यों के बारे में नहीं है। यह सिर्फ महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के बारे में भी नहीं है। यह हमारे विश्वविद्यालयों में अकादमिक अनुसंधान के बारे में है। यह उभरती स्टार्टअप कंपनियों के बारे में है। इस दौरान फाइव आइज देशों केनेताओं ने चीन द्वारा चल रही वैश्विक जासूसी पर चिंता व्यक्त की।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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