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तो क्या भारतवंशी काश पटेल को ट्रंप बनाएंगे अमेरिका का इंटेलीजेंस चीफ? दावेदारी में सबसे आगे

Who is Kash Patel: भारतवंशी काश पटेल अमेरिका के कार्यवाहक रक्षा मंत्री क्रिस्टोफर मिलर के चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इसके अलावा नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल में राष्ट्रपति के डिप्टी असिस्टेंट और आतंकवाद निरोधक विभाग के वरिष्ठ निदेशक रह चुके हैं।

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काश पटेल- डोनाल्ड ट्रंप।

Photo : AP

Who is Kash Patel: अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पूर्व कांग्रेस सदस्य और पूर्व राष्ट्रीय खुफिया निदेशक जॉन रैटक्लिफ को सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (सीआईए) का निदेशक नियुक्त किया है। यह उन अटकलों के विपरीत है, जिनमें कहा जा रहा था कि यह पद भारतीय-अमेरिकी काश पटेल को दिया जाएगा। कश्यप प्रमोद विनोद पटेल उर्फ काश पटेल को ट्रंप के सबसे वफ़ादार लोगों में गिना जाता है। पूर्व राष्ट्रपति के प्रति काश पटेल की अटूट निष्ठा को देखते हुए, उन्हें सीआईए निदेशक का पद मिलने की व्यापक उम्मीद थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

हालांकि उन्हें यह पद तो नहीं मिला, लेकिन उनको ट्रंप प्रशासन में एक प्रमुख भूमिका मिलने की संभवना अभी खत्म नहीं हुई हैं। राष्ट्रीय खुफिया निदेशक का पद अभी भी खाली है। वह इससे पहले अमेरिका के कार्यवाहक रक्षा मंत्री क्रिस्टोफर मिलर के चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इसके अलावा नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल में राष्ट्रपति के डिप्टी असिस्टेंट और आतंकवाद निरोधक विभाग के वरिष्ठ निदेशक रह चुके हैं। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि ट्रंप प्रशासन में काश पटेल को अहम जिम्मेदारी मिल सकती है।

पिछले ट्रंप प्रशासन में खुफिया निदेशक थे रैटक्लिफ

बता दें, जॉन रैटक्लिफ पिछले ट्रम्प प्रशासन में खुफिया निदेशक थे। ट्रंप की तरफ से एक बयान में कहा गया, मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि नेशनल इंटेलिजेंस के पूर्व निदेशक जॉन रैटक्लिफ सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (सीआईए) के निदेशक के रूप में काम करेंगे। बयान में कहा गया है कि क्लिंटन अभियान के फर्जी रूसी सांठगांठ को उजागर करने से लेकर एफआईएसए कोर्ट में एफबीआई द्वारा नागरिक स्वतंत्रता के दुरुपयोग को पकड़ने तक, जॉन रैटक्लिफ हमेशा अमेरिकी जनता के प्रति सच्चाई और ईमानदारी समर्थक रहे हैं। जब 51 खुफिया अधिकारी हंटर बाइडेन के लैपटॉप के बारे में झूठ बोल रहे थे, तो जॉन रैटक्लिफ अमेरिकी लोगों को सच्चाई बता रहे थे। ट्रंप की तरफ से कहा गया, इन और कई अन्य कारणों से, 2020 में जॉन को राष्ट्रीय सुरक्षा पदक प्रदान करना मेरे लिए बहुत सम्मान की बात थी, जो खुफिया और राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में विशिष्ट उपलब्धि के लिए राष्ट्र का सर्वोच्च सम्मान है। ट्रंप ने कहा, मैं जॉन को हमारे देश के दोनों सर्वोच्च खुफिया पदों पर सेवा देने वाले पहले व्यक्ति के रूप में देखना चाहता हूं। वह सभी अमेरिकियों के संवैधानिक अधिकारों के लिए एक निडर योद्धा होंगे, साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा के उच्चतम स्तर और शक्ति के माध्यम से शांति सुनिश्चित करेंगे।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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