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इजराइल पर हमला करने वाली ईरानी की सबसे खतरनाक आर्मी 'IRGC' कनाडा में आतंकी संगठन घोषित, जस्टिन ट्रूडो ने दी जानकारी

IRGC Listed terrorist group in Canada: कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर ट्रूडो ने लिखा है कि आईआरजीसी अब कनाडा में एक आतंकी संगठन के रूप में नामित है। उन्होंने कहा है कि इस फैसले से टेरर फंडिंग रोकने में मदद मिलेगी।

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आईआरजीसी अब कनाडा में आतंकी संगठन घोषित

Photo : AP

IRGC Listed terrorist group in Canada: कुछ महीनों पहले पर ईरान ने जब इजराइल पर हमला किया था तो अचानक से IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) का नाम चर्चा में आ गया था। यह ईरान की सबसे कुख्यात और खतरनाक आर्मी कही जाती है, जिसको कनाडा ने अब आतंकी संगठन घोषित कर दिया है। यह जानकारी कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की ओर से दी गई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर ट्रूडो ने लिखा है कि आईआरजीसी अब कनाडा में एक आतंकी संगठन के रूप में सूचीबद्ध है। उन्होंने कहा है कि इस फैसले से टेरर फंडिंग रोकने में मदद मिलेगी।

बता दें, ईरान की आईआरजीसी के हमले के बाद इजराइल ने कई देशों को पत्र लिखकर इस संगठन पर बैन लगाने और इसे आतंकी संगठन घोषित करने की मांग की थी। इसके बाद ब्रिटेन ने भी आईआरजीसी को आतंकी संगठन घोषित करने की तैयारी शुरू कर दी थी। कनाडा में भी यह मांग लंबे समय से उठ रही थी। वहीं, अमेरिका इसे पहले ही आतंकी संगठन घोषित कर चुका है।

क्या है आईआरजीसी?

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की स्थापना ईरान में इस्लामिक क्रांति के तुरंत बाद 1979 में की गई थी। शुरुआत में यह छोटा संगठन था, जिसे देश में इस्लामिक, आर्थिक और राजनीतिक मोर्चे पर जंग लड़ने के लिए बनाया गया था, लेकिन धीरे-धीरे यह संगठन ताकतवर होता गया और अब आईआरजीसी ट्रेंड सैनिकों, क्रूज व बैलिस्टिक मिसाइलों से लैस है। खास बात यह है कि ईरान में आईआरजीसी सीधे ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को रिपोर्ट करती है। वह इसे इस्लाम की सेना भी कहते हैं।

क्या करता है यह संगठन?

ईरान के इस ताकतवर संगठन के पास जमीनी सेना के साथ-साथ अपनी एयरफोर्स व नेवी भी है। इसके अलावा यह संगठन बैलिस्टिक मिसाइल व परमाणु कार्यक्रम भी संचालित करता है। इसके साथ ही इस संगठन का ईरानी की अर्थव्यवस्था में भी बड़ा हिस्सा है। आईआरजीसी ने कई सेक्टरों में निवेश भी किया हुआ है, जिसमें डिफ़ेंस, इंजीनियरिंग, कंस्ट्रक्शन क्षेत्र की कंपनियां शामिल हैं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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