ब्रिक्स देशों ने वैश्विक व्यापार में बढ़ती अस्थिरता और व्यापार-प्रतिबंधात्मक कदमों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र से इतर शुक्रवार को आयोजित वार्षिक बैठक में विदेश मंत्रियों ने चेतावनी दी कि शुल्क और गैर-शुल्क उपायों में अंधाधुंध वृद्धि तथा संरक्षणवाद का बढ़ता चलन वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित कर सकता है और विशेष रूप से ‘ग्लोबल साउथ’ देशों को हाशिए पर धकेलने का खतरा है। संयुक्त वक्तव्य में मंत्रियों ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले की भी कड़े शब्दों में निंदा की, जिसमें 26 लोगों की मौत हो गई थी।
2026 में भारत करेगा अध्यक्ष
बैठक की अध्यक्षता भारत ने 2026 के लिए ब्रिक्स के भावी अध्यक्ष के रूप में की। ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रियों ने एक संयुक्त वक्तव्य जारी कर एकतरफा शुल्क और गैर-शुल्क उपायों को विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के नियमों के विपरीत बताते हुए इन पर “गंभीर चिंता” व्यक्त की। वक्तव्य में कहा गया कि ऐसे कदम वैश्विक व्यापार को खंडित करने और विकासशील देशों के अवसर सीमित करने का जोखिम बढ़ाते हैं।
‘ग्लोबल साउथ’ के देश
‘ग्लोबल साउथ’ उन देशों को संदर्भित करता है जो विकासशील या अविकसित माने जाते हैं और मुख्य रूप से एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में स्थित हैं। ब्रिक्स नेताओं ने आगाह किया कि मौजूदा प्रथाएं न केवल व्यापार प्रवाह को बाधित कर रही हैं बल्कि वैश्विक आर्थिक असमानताओं को भी गहरा सकती हैं।
क्या बोले भारत के विदेश मंत्री
बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि बढ़ते संरक्षणवाद और व्यापार बाधाओं के चलते बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली दबाव में है। उन्होंने जोर दिया कि ब्रिक्स को ऐसे समय में तर्क और रचनात्मक परिवर्तन की आवाज़ बनकर खड़ा रहना चाहिए। जयशंकर ने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा, “एक अशांत विश्व में ब्रिक्स को शांति, संवाद, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन के संदेश को सुदृढ़ करना होगा।” जयशंकर ने आगे कहा कि ब्रिक्स सहयोग के अगले चरण की नींव प्रौद्योगिकी और नवाचार पर रखी जाएगी। भारत की अध्यक्षता खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल परिवर्तन, स्टार्टअप और सतत विकास साझेदारी पर केंद्रित रहेगी।
