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Morocco Earthquake: मोरक्को में भूकंप से पहले आसमान में दिखी नीली रोशनी, Video देख चौंक गए वैज्ञानिक

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Sep 11, 2023, 03:31 PM IST

Morocco Earthquake: वीडियो में आसमान से एक नीली रोशनी आती दिखाई पड़ रही है। कहा जा रहा है कि यह वीडियो भूकंप आने से कुछ देर पहले का है। ऐसा ही एक वीडियो इसी साल तुर्की में आए विनाशकारी भूकंप के बाद सामने आया था।

Morocco Earthquake: अफ्रीकी देश मोरक्को में आए भूकंप ने सब कुछ तबाह कर दिया है। यहां का ऐतिहासिक शहर मराकेश लगभग खंडहर में तब्दील हो चुका है। मलबे के नीचे से अब तक लाशें निकलने का सिलसिला जारी है और मृतकों की संख्या बढ़कर 2100 के पार पहुंच चुकी है। कहा जा रहा है कि पिछले छह दशक में मोरक्को में यह सबसे भीषण भूकंप की घटना है।

इस बीच एक वीडियो सामने आया है, जिसे मोरक्को का बताया जा रहा है। इस वीडियो में आसमान से एक नीली रोशनी आती दिखाई पड़ रही है। कहा जा रहा है कि यह वीडियो भूकंप आने से कुछ देर पहले का है। भूकंप से कुछ क्षण पहले ही आसमान से नीली रोशनी उतरी और उसके बाद तबाही का मंजर हर किसी ने देखा।

तुर्की में भी देखी गई थी ऐसी ही रोशनी

ऐसा ही एक वीडियो इसी साल तुर्की में आए विनाशकारी भूकंप के बाद सामने आया था। मोरक्को की तरह यहां भी भूकंप आने से पहले एक नीली रोशनी आसमान से उतरती दिखाई दी थी। तुर्की में आए भूकंप ने 25 हजार से ज्यादा जानें ले ली थीं और यहां करीब 10 हजार से ज्यादा इमारतें खंडहर में तब्दील हो गई थीं।

वीडियो देख चौंक गए वैज्ञानिक

मोरक्को से इस तरह का वीडियो सामने आने के बाद हर कोई हैरान है। वैज्ञानिक भी आसमान से उतरती नीली रोशनी को देखकर आवाक हैं। फिलहाल वैज्ञानिक इस तरह की घटना का सटीक विश्लेषण नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि, उनका कहना है कि यह नीली रोशनी पृथ्वी के नीचे लिथोस्फेरिक प्लेटों के टकराने के बाद निकलने वाली ऊर्जा हो सकती है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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