Farah Baloch- 14 वर्षीय बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता फराह बलूच ने नवरात्रि के अवसर पर भारत के लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं भेजी हैं। उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी कर भारतीयों से अपील की है कि वे बलूचिस्तान के लोगों की आजादी के संघर्ष और वहां हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों को न भूलें। फराह बलूच ने भारत के लोगों और नेतृत्व से बलूचिस्तान की स्वतंत्रता आंदोलन का समर्थन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत की आवाज बलूच जनता के लिए बहुत मायने रखती है।
मां हिंगलाज देवी का स्मरण
फराह ने बलूचिस्तान स्थित ऐतिहासिक शक्तिपीठ हिंगलाज माता मंदिर का जिक्र करते हुए कहा कि वे आशा करती हैं कि एक दिन "स्वतंत्र बलूचिस्तान" में सभी लोग पूरी आजादी और भक्ति के साथ इस पावन स्थल पर नवरात्रि का उत्सव मना सकेंगे।
हिंगलाज माता मंदिर का महत्व
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में हिंगोल नदी के तट पर स्थित हिंगलाज माता मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। यहां बलूच समुदाय और हिंदू श्रद्धालु सदियों से अपनी आस्था व्यक्त करते आए हैं। पाकिस्तानी सैन्य बलों द्वारा बलूचिस्तान में लंबे समय से जबरन गुमशुदगी और मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोप लगते रहे हैं। इसी कारण से कई युवा बलूच कार्यकर्ता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत और वैश्विक समुदाय से मदद की गुहार लगाते रहते हैं।
मानवाधिकार उल्लंघन और जबरन गुमशुदगी
बलूचिस्तान में लंबे समय से पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसियों (ISI) पर "किल एंड डंप" यानी "मारो और फेंक दो" नीति अपनाने के आरोप लगते रहे हैं। छात्र, मानवाधिकार कार्यकर्ता, पत्रकार, राजनीतिक नेता और आम नागरिक अक्सर इसके शिकार होते हैं। हजारों की संख्या में बलूच युवा बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के उठाए जाते हैं और बाद में उनके शव क्षत-विक्षत हालत में मिलते हैं।
बलूच अस्मिता और संसाधनों का दोहन
बलूचिस्तान प्राकृतिक संसाधनों (गैस, खनिज, और ग्वादर बंदरगाह) से बेहद समृद्ध है, लेकिन यह क्षेत्र पाकिस्तान का सबसे गरीब और पिछड़ा इलाका बना हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि केंद्र सरकार उनके संसाधनों का उपयोग करती है, लेकिन विकास का लाभ उन्हें नहीं मिलता। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के आने के बाद स्थानीय लोगों में यह डर और बढ़ गया है कि उनकी जमीन और संसाधनों पर बाहरी लोगों का कब्जा हो जाएगा।
महिला कार्यकर्ताओं और युवाओं का विरोध प्रदर्शन
सेना के दमन के खिलाफ अब बलूच महिलाएं भी सड़कों पर उतर चुकी हैं। डॉ. महरंग बलूच जैसे युवा नेताओं के नेतृत्व में हजारों बलूच नागरिकों ने इस्लामाबाद तक मार्च निकाला है, जिसमें उन्होंने अपहृत लोगों की सकुशल वापसी और सैन्य अत्याचारों को तुरंत रोकने की मांग की है।
