अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध अब चौथे हफ्ते में पहुंच चुका है। लगातार हमलों और जवाबी कार्रवाई के बावजूद हालात शांत होने के संकेत नहीं दिख रहे हैं। ईरान ने कई हमले झेले हैं, लेकिन सैन्य संसाधनों के नुकसान और संयुक्त हमलों के दबाव के कारण वह रणनीतिक तौर पर कमजोर स्थिति में नजर आ रहा है। ऐसे में एक खतरनाक विकल्प “डर्टी बम” को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। आइए समझते हैं कि आखिर यह होता क्या है और कितना खतरनाक है?
क्या होता है डर्टी बम?
डर्टी बम, जिसे रेडियोलॉजिकल डिस्पर्सल डिवाइस भी कहा जाता है, एक ऐसा हथियार होता है जिसमें पारंपरिक विस्फोटक के साथ रेडियोधर्मी पदार्थ मिलाया जाता है। विस्फोट के बाद यह रेडियोधर्मी तत्व आसपास के इलाके में फैल जाते हैं और उसे दूषित कर देते हैं। यह परमाणु बम जितना विनाशकारी नहीं होता, लेकिन इसका असर लंबे समय तक रहता है, जिससे जमीन, पानी और हवा प्रदूषित हो जाते हैं।
इसके खतरनाक प्रभाव क्या हैं?
डर्टी बम का सबसे बड़ा खतरा इसका रेडियोधर्मी असर होता है। विस्फोट से तत्काल नुकसान सीमित हो सकता है, लेकिन इसके बाद फैलने वाली रेडियोधर्मी धूल और धुआं लोगों के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक होते हैं।
कैंसर जैसी बीमारियां
इससे कैंसर, ल्यूकेमिया और रेडिएशन से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही, लंबे समय तक रहने वाला प्रदूषण कृषि और जल स्रोतों को भी नुकसान पहुंचाता है।
क्या ईरान के पास है इसकी क्षमता?
विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान के पास ऐसे रेडियोधर्मी पदार्थ मौजूद हैं जिनसे डर्टी बम बनाया जा सकता है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि ईरान के पास उच्च स्तर तक समृद्ध यूरेनियम का भंडार है, जिसका उपयोग इस तरह के हथियार बनाने में किया जा सकता है, हालांकि परमाणु बम के मुकाबले डर्टी बम बनाना अपेक्षाकृत आसान माना जाता है।
क्या युद्ध में इस्तेमाल कर सकता है ईरान?
विशेषज्ञों का मानना है कि डर्टी बम का इस्तेमाल करने की संभावना फिलहाल कम है, क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी प्रतिक्रिया हो सकती है। इससे ईरान को राजनीतिक और सैन्य दोनों स्तर पर बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। फिर भी, अगर हालात और बिगड़ते हैं और ईरान खुद को पूरी तरह घिरा हुआ महसूस करता है, तो इसे “आखिरी विकल्प” के तौर पर देखा जा सकता है।
रणनीतिक और आर्थिक असर
डर्टी बम का इस्तेमाल सीधे बड़े पैमाने पर जानमाल की हानि के लिए नहीं, बल्कि डर और अव्यवस्था फैलाने के लिए किया जा सकता है। अगर इसे किसी बड़े शहर, बंदरगाह या अहम समुद्री मार्ग पर इस्तेमाल किया जाए, तो वैश्विक व्यापार और तेल सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है। इससे आर्थिक नुकसान के साथ-साथ लोगों में भय और अस्थिरता भी बढ़ेगी।
