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New Zealand Visa Rules: न्यूजीलैंड में सख्त हुआ वर्क वीजा नियम, भारतीय इमिग्रेंट्स को लग सकता है झटका

New Zealand New Work Visa Rules: ​​नए बदलाव उन सभी भारतीय अप्रवासियों पर भारी असर डाल सकते हैं जो न्यूजीलैंड में नौकरी की तलाश में हैं। साल 2018 में हुई न्यूजीलैंड की जनगणना से पता चलता है कि देश की आबादी में भारतीयों की हिस्सेदारी 4.7 फीसदी है।

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New Zealand New Work Visa Rules

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New Zealand New Work Visa Rules: ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के बाद न्यूजीलैंड ने भी देश में नौकरी योग्यता के लिए आवश्यकताओं को जोड़कर आप्रवासियों की बढ़ती संख्या पर लगाम लगाने के लिए अपने वर्किंग वीजा नियमों को कड़ा कर दिया है। न्यूजीलैंड में 2023 में लगभग रिकॉर्ड माइग्रेशन का आंकड़ा दर्ज किया गया था। इसके बाद न्यूजीलैंड मान्यता प्राप्त नियोक्ता वर्कर वीजा योजना-रोजगार वीजा प्रोग्राम में तत्काल संशोधन की घोषणा की है और पिछले आंकड़ों को अस्थिर बताया है।

नए बदलाव उन सभी भारतीय अप्रवासियों पर भारी असर डाल सकते हैं जो न्यूजीलैंड में नौकरी की तलाश में हैं। इमिग्रेशन मंत्री एरिका स्टैनफोर्ड ने कहा कि अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण की सरकार की योजना के लिए हमारी इमिग्रेशन सेटिंग्स को सही करना महत्वपूर्ण है। 2023 में माइग्रेंट की आमद रिकॉर्ड ऊंचाई पर थी।

क्या है नया बदलाव?

नई आवश्यकताओं में उन प्रवासियों के लिए अंग्रेजी भाषा में दक्षता शामिल है, जो कम स्किल लेवल 4 और 5 भूमिकाओं के लिए आवेदन कर रहे हैं। अधिकांश AEWV भूमिकाओं के लिए मिनिमम स्किल और काम का अनुभव सीमा भी जोड़ी गई है। लेवल 4 और 5 की भूमिकाओं के लिए प्रवासियों को लाने की मंजूरी लेने से पहले सभी कंपनियों को अनिवार्य रूप से वर्क और इनकम से जुड़ना आवश्यक है। ज्यादातर लेवल 4 और 5 भूमिकाओं के लिए अधिकतम निरंतर प्रवास को भी घटाकर तीन साल कर दिया गया है।

न्यूजीलैंड में भारतीयों की संख्या

साल 2018 में हुई न्यूजीलैंड की जनगणना से पता चलता है कि देश की आबादी में भारतीयों की हिस्सेदारी 4.7 फीसदी है। पिछले साल अक्टूबर में, विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारतीय मूल के लगभग 2,50,000 व्यक्ति और एनआरआई न्यूजीलैंड में रहते हैं, और उनमें से अधिकांश स्थायी रूप से वहीं बसे हुए हैं।

न्यूजीलैंड की लगभग 5.1 मिलियन है। कोरोना महामारी के खत्म होने के बाद न्यूजीलैंड में प्रवासियों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी देखी है। इससे पिछले साल चिंता बढ़ गई थी कि यह मुद्रास्फीति को बढ़ावा दे रहा है।

TNN Business Desk
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