Check Manufacturing Date of Product: सरकार ने सभी डिब्बा बंद प्रोडक्टस पर मैन्युफैक्चरिंग डेट और प्रति यूनिट प्राइस वैल्यू लिखना अनिवार्य कर दिया है। 1 जनवरी 2024 से यह नियम लागू हो गया है। इस फैसले के बाद से ग्राहकों को किसी भी प्रोडक्ट को खरीदने में आसानी होगी। क्योंकि ग्राहक को इस बात का पता होगा कि प्रोडक्ट कितना पुराना है। कंपनियों को प्रोडक्ट की मैन्युफैक्चरिंग की तारीख पैकेट पर लिखनी होगी। इसके अलावा उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने नए नोटिफिकेशन में सामान के ‘प्रति यूनिट बिक्री मूल्य’ भी लिखना अनिवार्य कर दिया है।
कैसे पता चलेगी मैन्युफैक्चरिंग डेट
किसी भी पैकिंग वाले प्रोडक्ट पर अगर आपको मैन्युफैक्चरिंग डेट देखने के लिए आपको MFG कोड को देखना चाहिए। मान लीजिए कि किसी प्रोडक्ट पर MFG 2-2023 लिखा है, तो इसका मतलब यह है कि प्रोडक्ट फरवरी 2022 में बना है। इसके अलावा एक्सपायरी डेट भी लिखी होती है।
अगर किसी प्रोडक्ट पर EXP 3-2025 लिखा है, तो यह प्रोडक्ट फरवरी 2025 में एक्सपायर हो जाएगा। यानी यह इस्तेमाल के योग्य नहीं रहेगा। कई पैकिंग वाले प्रोडक्ट पर बेस्ट बिफोर के साथ तारीख लिखी होती है। यानी इसका मतलब है कि यह प्रोडक्ट लिखी तारीख तक इस्तेमाल के लिए अपनी सबसे बेस्ट क्वॉलिटी में है।
प्रति यूनिट बिक्री प्राइस
इसी प्रकार, प्रति यूनिट बिक्री मूल्य होने से उपभोक्ताओं के लिए वस्तु की लागत का पता लगाना आसान हो जाएगा। उदाहरण के लिए, 2.5 किलोग्राम के पैकेट बंद गेहूं के आटे में मैक्सिमम रिटेल प्राइस (MRP)साथ प्रति किलो यूनिट बिक्री मूल्य भी प्रकाशित होगा।
इसे ऐसे समझें- मान लीजिए कि किसी कंपनी ने पांच किलो के आटे का पैकेट तैयार किया। इसपर उसे यह लिखना होगा कि एक किलो आटे का दाम कितना होगा। इसी प्रकार, एक किलो से कम मात्रा वाले डिब्बा बंद उत्पाद के पैकेट पर बिक्री मूल्य प्रति ग्राम होगा। साथ ही उत्पाद की कुल अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) भी होगी।
