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Gold Loan Market: नरमी के बावजूद, सोने के बदले कर्ज का बाजार पांच साल में हो सकता है दोगुना

  • Edited by: Rohit Ojha
  • Updated Aug 22, 2024, 04:43 PM IST

Gold Loan Market: रिपोर्ट कहती है कि भारतीय परिवारों के पास भारी मात्रा में सोना है, जिसके 25,000 टन होने का अनुमान है। पांच साल में 14.85 फीसदी की सालाना वृद्धि दर पर सोने के बदले कर्ज का बाजार वित्त वर्ष 2028-29 तक 14.19 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाने की संभावना है।

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गोल्ड लोन का बाजार

Photo : iStock

Gold Loan Market: सख्त नियमों के कारण वृद्धि में अपेक्षित नरमी के बावजूद भारत का संगठित गोल्ड लोन बाजार अगले पांच साल में दोगुना होकर 14.19 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच जाने का अनुमान है। पीडब्ल्यूसी इंडिया की एक रिपोर्ट में यह संभावना जताई गई है। देश के गोल्ड लोन बाजार पर जारी इस रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2023-24 में संगठित गोल्ड लोन मार्केट की पर्याप्त वृद्धि हुई थी और यह 7.1 लाख करोड़ रुपये के वैल्युएशन पर पहुंच गया था।

सोने के बदले कर्ज का बाजार

इसके मुताबिक, पांच साल में 14.85 फीसदी की सालाना वृद्धि दर पर सोने के बदले कर्ज का बाजार वित्त वर्ष 2028-29 तक 14.19 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाने की संभावना है। रिपोर्ट कहती है कि भारतीय परिवारों के पास भारी मात्रा में सोना है, जिसके 25,000 टन होने का अनुमान है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय परिवारों के पास मौजूदा सोने की कीमत लगभग 126 लाख करोड़ रुपये है।

अगले दो वर्षों में सोने के बदले कर्ज के बाजार में मध्यम वृद्धि देखने को मिलेगी, क्योंकि सोने के बदले कर्ज देने वाले कर्जदाताओं को कर्ज एवं मूल्य (एलटीवी) रखरखाव और नीलामी से संबंधित प्रक्रियाओं के संबंध में नियामक अधिकारियों से बढ़ती जांच का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बाजार की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी के निष्क्रिय होने से चालू वित्त वर्ष में बाजार की वृद्धि पर असर पड़ेगा।

फिनटेक स्टार्टअप

इसके अलावा, नकद वितरण पर गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को रिजर्व बैंक की सलाह, जो नकद वितरण की राशि को 20,000 रुपये तक सीमित करती है, ग्राहकों को असंगठित क्षेत्र पर भरोसा करने के लिए प्रेरित कर सकती है। नियामक ने फिनटेक स्टार्टअप के माध्यम से ऋण गतिविधियों के लिए मूल्यांकन प्रक्रिया के बारे में भी चिंता जताई है।

पीडब्ल्यूसी ने कहा कि बढ़ी हुई नियामक जांच और संशोधित दिशानिर्देशों के कारण प्रमुख एनबीएफसी के शेयर की कीमतों में गिरावट आई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सोने के बदले कर्ज देने वाले ऋणदाताओं से इस अवधि का उपयोग यह सुनिश्चित करने की अपेक्षा की जाती है कि वे सभी विनियामक दिशानिर्देशों का अनुपालन कर रहे हैं, साथ ही डिजिटलीकरण पहल के माध्यम से अपने मध्य और बैक ऑफिस को अनुकूलित करने के लिए कई उपाय कर रहे हैं।

Rohit Ojha
Rohit Ojhaauthor

<p>रोहित ओझा Timesnowhindi.com में बतौर सीनियर कॉरस्पॉडेंट सितंबर 2023 से काम कर रहे हैं। यहां पर वो बिजेनस और यूटिलिटी की खबरों पर काम करते हैं। मीडिया इंडस्ट्री में पांच साल से अधिक का अनुभव। चुनावी खबरों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर फिलहाल स्टॉक मार्केट, इकोनॉमी और पर्सनल फाइनेंस की खबरों के साथ जारी है। डेस्क और फील्ड दोनों में ही काम करने का तजुर्बा। टाइम्स नाऊ नवभारत से पहले अलग-अलग मीडिया संस्थानों में अलग-अलग बीट पर काम कर चुके हैं। अमर उजाला, टीवी9 हिंदी, इंडिया टीवी, आज तक जैसे मीडिया संस्थान में अलग-अलग बीट पर काम कर चुके हैं। स्टॉक मार्केट और इकोनॉमी के साथ-साथ देश की सियासी घटनाओं पर लिखने का अनुभव है। 2019 के आम चुनाव से लेकर तमाम विधानसभा की चुनावी खबरों पर काम किया है। 2019 का क्रिकेट वर्ल्ड कप और आईपीएल की खबरों पर भी काम किया है। किस्से-कहानियों में मन लगता है। शारदा यूनिवर्सिटी से मास-कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म किया है। गृह जनपद- बक्सर। साहित्य, सियासत और सिनेमा पर लिखना-पढ़ना खूब पसंद है।</p>

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