कूड़ा बीनकर पूरा किया अपना ख्वाब, अपने इस सपने के लिए खर्च किए 10 लाख रुपए

तमिलनाडु के सलेम जिले के रहने वाले नल्लाथम्बी ने अपने पूरे जीवन भर गलियों में फेंके गए कचरे को चुनकर अपने लिए पैसे जुटाया। पैसे कमाने की उनकी चाहत बस इतनी थी कि वह खरीदी गई जमीन पर अपनी एक प्रतिमा बनवा सकें।

 Tamilnadu : ragpicker spends rs 10 lakh to erect his own statue
कूड़ा बीनकर पूरा किया अपना ख्वाब, अपनी आदमकद प्रतिमा के लिए खर्च किए 10 लाख रुपए। 

मुख्य बातें

  • हौसले एवं जज्बे से कूड़ा बीनकर पूरा किया अपने जीवन का सपना
  • 10 लाख में जमीन खरीदी और एक लाख रुपए में बनवाई अपनी प्रतिमा
  • नल्लाथम्बी की बचपन से चाहत थी कि उनकी एक आदमकद प्रतिमा बने

सलेम : दुनिया में अपने ख्वाबों को पूरा करने वाले लोगों की कमी नहीं है। चाहे इसके लिए उन्हें कितनी भी मुसीबत और परेशानियों का सामना पड़े, वे जो ठान लेते हैं उसे पूरा करके  ही दम लेते हैं। तमिलनाडु में कूड़ा बीनने वाले ए नल्लाथम्बी ऐसे ही लोगों में शामिल हैं। जीवन भर पाई-पाई जोड़ने वाले नल्लाथम्बी ने अपनी आदमकद प्रतिमा के लिए 10 लाख रु खर्च कर दिए। टीओआई के साथ बातचीत में नल्लाथम्बी ने बताया कि उनकी बचपन से चाहत थी कि उनकी एक आदमकद प्रतिमा बने।

कचरा चुनकर पैसे जुटाए
तमिलनाडु के सलेम जिले के रहने वाले नल्लाथम्बी ने अपने पूरे जीवन भर गलियों में फेंके गए कचरे को चुनकर अपने लिए पैसे जुटाया। पैसे कमाने की उनकी चाहत बस इतनी थी कि वह खरीदी गई जमीन पर अपनी एक प्रतिमा बनवा सकें। 20 साल पहले अपने परिवार को छोड़ने वाले नल्लाथम्बी ने कहा, 'जब मैं युवा था तो मैं अपना नाम कमाना चाहता था। मेरी इच्छा थी कि मेरी एक प्रतिमा हो। मैंने अपना ख्वाब अब पूरा कर लिया है।' नल्लाथम्बी पहले राजमिस्त्री का काम करते थे लेकिन बाद में उन्होंने इस काम को छोड़ दिया। घरेलू विवाद के बाद वह अपना गांव छोड़कर अथानुरपट्टी आ गए। उनकी पत्नी और बच्चे अभी भी गांव में रहते हैं।

Ragpicker(तस्वीर-टीओआई)

पैसे से दो प्लॉट खरीदा और प्रतिमा बनवाई 
नल्लाथम्बी रोजाना 250 से 300 रुपए कमाते हैं। अपनी इस कमाई से उन्होंने बेलूर-वजापडी में 1200 वर्ग फीट का दो प्लॉट खरीदा। इसके बाद वह एक स्थानीय मूर्तिकार के पास गए और एक लाख रुपए में अपनी आदमकद प्रतिमा बनवाई। नल्लाथम्बी के परिचित के मनिक्कम का कहना है, 'वह अपनी कमाई किसी के साथ साझा नहीं करना चाहते थे। यहां तक कि अपने परिवार के साथ भी नहीं। वह अपने ख्वाब को पूरा करने में इस रकम को लगाना चाहते थे। मैंने इस काम में उनकी मदद की।'

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