Aadi Swaroopa: एक समय में दोनों हाथ से, दो अलग-अलग भाषाओं में लिख सकती है ये लड़की

Aadi Swaroopa: कर्नाटक के मंगलुरु की 16 साल की आदी स्वरूपा एक समय में अपने दोनों हाथों से लिख सकती है। एक समय में 2 अलग-अलग भाषाओं में लिख सकती है। इसके अलावा इसमें कई प्रतिभाएं हैं।

Aadi Swaroopa
आदी स्वरूपा  |  तस्वीर साभार: ANI

मुख्य बातें

  • आदी स्वरूपा में कई तरह की प्रतिभाएं हैं
  • वो कई नेशनल और इंटरनेशनल रिकॉर्ड स्थापित करना चाहती है

नई दिल्ली: कर्नाटक के मंगलुरु की एक 16 साल की प्रतिभाशाली लड़की एक समय में अपने दोनों हाथों से एक मिनट में 45 शब्द लिख सकती है। आदी स्वरूपा नाम की इस लड़की ने पहले से ही दो रिकॉर्ड बनाए हुए हैं। इसका लक्ष्य अब विविध क्षेत्रों में अधिक उपलब्धियां हासिल करना है। स्वरूपा को 14 अगस्त को बरेली स्थित लता फाउंडेशन द्वारा दोनों हाथों का उपयोग करते हुए अंग्रेजी के 40-45 शब्द ब्लैकबोर्ड या नोटबुक पर लिखने के लिए विशेष विश्व रिकॉर्ड से सम्मानित किया गया था।

उसका कहना है, 'मैं एक समय में दोनों हाथों से एक मिनट में 55-60 शब्द लिखकर गति बढ़ाने और विश्व रिकॉर्ड बनाने का अभ्यास कर रही हूं। मैं एक ही समय में अंग्रेजी, कन्नड़ में लिख सकती हूं। मैं मिमिक्री, सिंगिंग भी करती हूं।' उसकी मां का कहना है कि अभ्यास ने उसे कुशल बनाया है और वह दोनों हाथों से एक मिनट में 45 शब्द लिख सकती है। 

स्वरूपा ने स्कूल अटेंड नहीं किया है, हालांकि वह मार्च-अप्रैल 2021 में एसएसएलसी बोर्ड परीक्षा के लिए बाहरी उम्मीदवार के रूप में उपस्थिति होने की तैयारी कर रही है। वह अन्य विविध क्षेत्रों जैसे मिमिक्री, रूबिक क्यूब और संगीत में राष्ट्रीय और विश्व रिकॉर्ड स्थापित करना चाहती है। वह रचनात्मक और ललित कला में कम से कम 10 विश्व रिकॉर्ड स्थापित करने के लिए महत्वाकांक्षी है।

आदी ने कहा, 'मैंने अपनी मां (सुमंगला सुमाडकर) के साथ 2018 में ग्रुप कैटेगरी में रूबिक के क्यूब मोजेक में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। मैं 2021 में व्यक्तिगत वर्ग में इसी तरह की उपलब्धि के लिए प्रयास करूंगी। मैं बीटबॉक्स में भी वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित करना चाहती हूं।' 

उसकी मां का कहना है, 'एक विलक्षण बच्चे के रूप में स्वरूपा ने 2-3 साल की उम्र में ही दोनों हाथों से लिखना शुरू कर दिया था। वह अपने दोनों हाथों का उपयोग करके 10 अलग-अलग तरीकों से लिख सकती हैं।' अपनी बेटी के बचपन को याद करते हुए उसके पिता ने कहा कि स्वरूपा ने पढ़ना तब सीखा जब वह सिर्फ 18 महीने की थी और जब वह 30 महीने की थी तब 30 पेज लिखने में सक्षम थी।

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