खुद को विषैले सांपों से कटवाते हैं इस गांव के लोग, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान

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Updated Oct 20, 2019 | 09:39 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

जमशेदपुर के एक गांव में जनजाति समुदाय के लोग विषैले सापों से खुद को कटवाते हैं क्योंकि उनका मानना है कि इससे उन्हकी मुरादें पूरी होती है और उन्हें शक्ति मिलती है।

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सपेरे  |  तस्वीर साभार: ANI

जमशेदपुर : झारखंड के जमशेदपुर में सांपों से जुड़ी एक बेहद पुरानी प्रथा प्रचलन में हैं जो आज भी चली आ रही है। इस प्रथा के बारे में जानकर आपके होश उड़ जाएंगे। दरअसल जमशेदपुर जिले के एक गांव में सपेरे खुद को जहरीले सांपों से कटवाते हैं क्योंकि उनका मानना है कि इससे उन्हें रोग प्रतिरोधक शक्ति मिलती है और उनकी मुरादें पूरी होती है। 

इस गांव में ये 100 साल पुरानी प्रथा है जिसका लोग अभी तक पालन करते आ रहे हैं। गांव की इस प्रचलित प्रथा में बड़ी संख्या में जनजाति समुदाय के लोग भाग लेते हैं। पीढ़ियों से इस जनजाति समुदाय के लोग विषैले सांपों को पकड़ते हैं और इस प्रथा के लिए उसका इस्तेमाल करते हैं।

वे दरअसल मनसा देवी की पूजा करते हैं इस दौरान इस प्रथा का पालन करते हैं। उनका मानना है कि पूजा के दौरान सांपों के काटने से उन्हें मनचाहा फल मिलता है और मनसा देवी की कृपा से उनपर सांपों के जहर का कोई असर नहीं होता है।

जमशेदपुर जिले से 50 किलोमीटर दूर शंकरदा गांव के लोग गॉडेस मनसा देवी को खुश करने के लिए इस प्रथा का पालन करते हैं। उनका मानना है कि मनसा देवी सांपों की देवी हैं। यह प्रथा साल में एक बार की जाती है।

सपेरे रथ पर बैठते हैं जिसके बाद वे सांप से खुद को कटवाते हैं। ग्रामीण करुणामय मंडल ने बताया कि हर साल हम सभी ग्रामीण सांपों की देवी मनसा देवी की पूजा करते हैं। यह पूजा पिछले 100 सालों से की जा रही है।

सपेरे रथ पर बैठकर मनसा देवी की पूजा करते हैं और देवी को खुश करने का प्रयास करते हैं। इस पूजा से लोगों की मनोकामना भी पूरी हो जाती है। यहां के लोगों का मानना है कि रथ पर बैठकर जब सपेरे मनसा देवी की पूजा करते हैं तो उन पर सांपों के विष का कोई असर नहीं पड़ता है।
  

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