करवा चौथ

करवा चौथ का त्योहार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। करवा चौथ पर पति की दीर्घायु एवं अखण्ड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए भालचन्द्र गणेश जी की पूजा की जाती है। करवाचौथ में भी संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत की तरह दिन भर निर्जल उपवास रखकर रात में चन्द्रमा को अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद जल व प्रसाद ग्रहण कर भोजन करने का विधान है।

करवा चौथ को देश के जम्मू, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे प्रांतों में खासतौर पर मनाया जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं सूर्य के उदय होने से पहले सास या घर की किसी बुजुर्ग महिला की ओर से दी गई सरगी खाती हैं। इसके बाद उपवास शुरू होता है। शाम को महिलाएं 16 श्रृंगार कर करवा माता की पूजा करती हैं और थाली फिराते हुए करवा चौथ की कथा सुनती हैं। इसके बाद चांद नजर आने पर छलनी से पति का चेहरा देखती हैं और पति के हाथ से पानी पीकर अपना व्रत खोलती हैं। अविवाहित कन्याएं भी इस व्रत को करती हैं।