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करवा चौथ व्रत कथा लिखित में, करवा चौथ की आरती, चंद्रदेव की आरती, गणेश जी की आरती यहां देखें

करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखते हैं। आज करवा चौथ का खास दिन है। यहां आप करवा चौथ व्रत की कथा, करवा चौथ की कहानी, करवा चौथ व्रत क्यों रखा जाता है - जैसी जानकारी ले सकते हैं। साथ ही आप करवा चौथ की पूजा विधि भी जान सकते हैं। जानें करवाचौथ की कथा सुनने का आज का शुभ मुहूर्त। करवा चौथ 2024 चांद पूजा सामग्री (Karwa Chauth 2024 Chand Puja Samagri). जल से भरा तांबे का लोटा, आटे का दीपक, छलनी, मिठाई, रौली, चावल, फूल

Medha ChawlaUpdated Oct 10, 2025, 22:35 IST
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करवा चौथ व्रत कथा लिखित में, करवा चौथ की आरती, चंद्रदेव की आरती, गणेश जी की आरती यहां देखें

करवा चौथ व्रत कथा लिखित में, करवा चौथ की आरती, चंद्रदेव की आरती, गणेश जी की आरती यहां देखें

करवा चौथ 2025 में 10 अक्टूबर को मनाया जा रहा है। यानी आज यह व्रत पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। करवा चौथ के व्रत में सुबह सास की ओर से दी गई सरगी खाकर सुहागिन स्त्रियां अपना व्रत आरंभ करती हैं। हालांकि कई जगहों पर सरगी की परंपरा नहीं है। शाम को पूजा में व्रत कथा पढ़ी जाती है और रात के समय चांद देखकर पति और बड़ों का आशीर्वाद लेकर करवा चौथ का पारण किया जाता है। यहां देखें करवा चौथ की व्रत कथा, करवा चौथ क्यों मनाते हैं, करवा चौथ की पूजा विधि आदि की पूरी जानकारी।

करवा चौथ व्रत कथा हिंदी में लिखित, पढ़ें साहूकार और उनके 8 बच्चों की कहानी

करवा चौथ 2025 पूजा मुहूर्त Evening

करवा चौथ 2025 की शाम की पूजा का समय 5:57 बजे से शुरू होगा जो 7:11 बजे तक रहेगा। इस तरह पूजा करने के लिए व्रती महिलाओं को करीब 1 घंटे 14 मिनट का समय मिलेगा।

करवा चौथ की पूजा कैसे करते हैं, यहां देखें करवा चौथ पूजा की पूरी विधि स्टेप बाय स्टेप

Karwa Chauth Vrat Ki Kahani करवा चौथ व्रत कथा, देखें बुढ़िया और गणेश जी की ये कहानी:

बहुत समय पहले की बात है। एक अन्धी बुढ़िया थी जिसका एक लड़का और बहू थी। वो लोग बहुत गरीब थे। वह अन्धी बुढ़िया रोजाना गणेश जी की पूजा किया करती थी। गणेश जी उस बुढ़िया से प्रसन्न होकर एक दिन साक्षात् सन्मुख आकर कहते हैं कि मैं आपकी पूजा से प्रसन्न हूं आपको जो वर मांगना है वो मांग लें। बुढिया कहती है, मुझे मांगना नहीं आता तो कैसे और क्या मांगू।

तब गणेश जी बोले कि अपने बहू- बेटे से पूछकर मांग लो। तब बुढिया ने अपने पुत्र और वधु से पूछा तो बेटा बोला कि धन मांग ले और बहु ने कहा की पोता मांग लें। तब बुढ़िया ने सोचा कि ये तो अपने-अपने मतलब की बातें कर रहे हैं। फिर बुढ़िया ने पड़ोसियों से पूछा तो, पड़ोसियों ने कहा कि बुढ़िया तेरी थोड़ी सी जिंदगी बची है। क्यूँ मांगे धन और पोता, तू तो केवल अपने नेत्र मांग ले जिससे तेरी बाकी की जिंदगी सुख से व्यतीत हो जाए।

उस बुढ़िया ने बेटे और बहू तथा पडौसियों की बातें सुनकर घर में जाकर सोचा, कि क्यों न ऐसी चीज मांग लूं जिसमें बेटा बहू और मेरा सबका ही भला हो। जब दूसरे दिन श्री गणेश जी आये और बोले, कि आपको क्या मांगना है कृप्या बताइए? हमारा वचन है जो आप मांगेगी सो वो हो जाएगा। गणेश जी के वचन सुनकर बुढ़िया बोली, हे गणराज! यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो मुझे नौ करोड़ की माया दें, निरोगी काया दें, अमर सुहाग दें, आँखों में प्रकाश दें, नाती पोते दें, और समस्त परिवार को सुख दें। फिर अंत में मोक्ष दें।

बुढ़िया की बात सुनकर गणेश जी बोले बुढ़िया माँ तूने तो मुझे ठग लिया। खैर जो कुछ तूने मांग लिया वह सभी तुझे मिलेगा। यूँ कहकर गणेश जी अंतर्ध्यान हो गये। हे गणेश जी! जैसे बुढिया माँ को मांगे अनुसार आपने सब कुछ दिया वैसे ही सबको देना। और हमको भी देने की कृपा करना।

करवा चौथ माता फोटो, करवा चौथ पोस्टर, पूजा से पहले सेव करें करवा माता की फोटो एचडी में

शहर अनुसार पूजा का शुभ मुहूर्त 2025 (City wise Karwa Chauth Puja Muhurat 2025)-

शहर का नाम और करवा चौथ पूजा मुहूर्त 2025

नई दिल्ली शाम 5:57 बजे से रात 7:11 बजे तक

मुंबई शाम 5:57 बजे से रात 7:11 बजे तक

नोएडा शाम 5:57 बजे से रात 7:11 बजे तक

चेन्नई शाम 5:57 बजे से रात 7:11 बजे तक

बेंगलुरु शाम 5:57 बजे से रात 7:11 बजे तक

अहमदाबाद शाम 5:57 बजे से रात 7:11 बजे तक

जयपुर शाम 5:57 बजे से रात 7:11 बजे तक

कानपुर शाम 5:57 बजे से रात 7:11 बजे तक

लखनऊ शाम 5:57 बजे से रात 7:11 बजे तक

पटना शाम 5:57 बजे से रात 7:11 बजे तक

लुधियाना शाम 5:57 बजे से रात 7:11 बजे तक

वाराणसी शाम 5:57 बजे से रात 7:11 बजे तक

अलीगढ़ शाम 5:57 बजे से रात 7:11 बजे तक

चंडीगढ़ शाम 5:57 बजे से रात 7:11 बजे तक

आज कितने बजे होगी करवा चौथ की पूजा? यहां से नोट करें 10 अक्टूबर 2025 करवा चौथ पूजा मुहूर्त

करवा चौथ पूजा सामग्री लिस्ट, करवा चौथ की पूजा में क्या क्या सामान लगता है?

  • सिंदूर
  • मेहंदी
  • बिंदी- सौभाग्य का प्रतीक
  • मंगलसूत्र
  • चूड़ियां
  • मांगटीका
  • आलता
  • काजल
  • नथ
  • पायल
  • बिछिया
  • झूमके
  • साड़ी/नए वस्त्र
  • कमरबंद
  • बाजूबंद
  • गजरा
  • करवा
  • सिंदूर
  • पानी का लोट
  • छलनी
  • दीपक
  • मिट्टी के डेलिया
  • कांस की तिलियां
  • मिठाई

OCT 10, 2025 21:19 IST

करवा चौथ 2025 LIVE: करवा चौथ व्रत कथा

कथा के अनुसार एक साहूकार के सात लड़के और एक लड़की थी। सभी का विवाह हो चुका था। एक बार कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सेठानी सहित उसकी सातों बहुएं और बेटी ने करवा चौथ का व्रत रखा। रात में जब साहूकार के सभी लड़के भोजन करने के लिए बैठे तो उन्होंने अपनी बहन से भी भोजन करने के लिए कहा। लेकिन बहन ने तो व्रत रखा था। बहन ने अपने भाई से कहा अभी चांद नहीं निकला है। मैं चांद के निकलने पर उसे अर्घ्य देकर ही भोजन करूंगी।

चूंकि साहूकार के बेटे अपनी बहन से बहुत प्रेम करते थे, इसलिए उनसें अपनी बहन का भूख से व्याकुल चेहरा देखा नहीं जा रहा था।

तब साहूकार के बेटे नगर के बाहर चले गए और वहां पर उन्होंने एक पेड़ पर चढ़ कर अग्नि जला दी। घर वापस आकर उन्होंने अपनी बहन से कहा कि देखों चांद आ गया है। अब तुम अर्घ्य देकर भोजन ग्रहण करो। साहूकार की बेटी ने अपनी भाभियों से भी कहा चांद को अर्घ्य देने का कहा लेकिन ननद की बात सुनकर भाभियों ने कहा- बहन अभी चांद नहीं निकला है, तुम्हारे भाई धोखे से अग्नि जलाकर उसके प्रकाश को चांद के रूप में तुम्हें दिखा रहे हैं।

लेकिन साहूकार की बेटी ने अपनी भाभियों की बात को अनसुनी कर दिया और उसने भाइयों द्वारा दिखाए गए चांद को अर्घ्य देकर भोजन कर लिया। इससे उसका करवा चौथ का व्रत भंग हो गया। गणेश जी की अप्रसन्नता के कारण उस लड़की का पति बीमार पड़ गया और उसके घर में बचा हुआ सारा धन उसकी बीमारी को सही करने में लग गया।

साहूकार की बेटी को जब अपने दोषों का पता लगा तो उसे बहुत पश्चाताप हुआ। उसने गणेश जी से क्षमा मांगी और फिर से विधि-विधान पूर्वक चतुर्थी का व्रत शुरू कर दिया। उसने व्रत के दौरान उपस्थित सभी लोगों का श्रद्धानुसार आदर किया और तदुपरांत उनसे आशीर्वाद ग्रहण किया। इस प्रकार उस लड़की के श्रद्धा भाव को देखकर भगवान गणेश जी उसपर प्रसन्न हुए और उसके पति को उन्होंने जीवनदान प्रदान किया। उसे सभी प्रकार के रोगों से मुक्त करके धन, संपत्ति और वैभव से युक्त कर दिया।
OCT 10, 2025 21:03 IST

करवा चौथ 2025 LIVE: गणेश जी की आरती

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।

माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा।

लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।

बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।

कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
OCT 10, 2025 20:47 IST

करवा चौथ 2025 LIVE: चंद्रदेव की आरती

ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा|

दुःख हरता सुख करता, जय आनन्दकारी||

रजत सिंहासन राजत, ज्योति तेरी न्यारी|

दीन दयाल दयानिधि, भव बन्धन हारी||

जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे|

सकल मनोरथ दायक, निर्गुण सुखराशि||

योगीजन हृदय में, तेरा ध्यान धरें|

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, सन्त करें सेवा||

वेद पुराण बखानत, भय पातक हारी|

प्रेमभाव से पूजें, सब जग के नारी||

शरणागत प्रतिपालक, भक्तन हितकारी|

धन सम्पत्ति और वैभव, सहजे सो पावे||

विश्व चराचर पालक, ईश्वर अविनाशी|

सब जग के नर नारी, पूजा पाठ करें||

ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा|
OCT 10, 2025 20:30 IST

करवा चौथ 2025 LIVE: करवा चौथ की आरती

ओम जय करवा मैया , माता जय करवा मैया।
जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नइया..
ओम जय करवा मैया।

सब जग की हो माता, तुम हो रुद्राणी।
यश तुम्हारा गावत, जग के सब प्राणी.. ओम जय करवा मैया।
कार्तिक कृष्ण चतुर्थी, जो नारी व्रत करती।
दीर्घायु पति होवे , दुख सारे हरती..
ओम जय करवा मैया। होए सुहागिन नारी, सुख संपत्ति पावे।
गणपति जी बड़े दयालु, विघ्न सभी नाशे..
ओम जय करवा मैया।

करवा मैया की आरती, व्रत कर जो गावे।
व्रत हो जाता पूरन, सब विधि सुख पावे..
ओम जय करवा मैया।
OCT 10, 2025 20:30 IST

करवा चौथ 2025 LIVE: चंद्रमा के दर्शन करते समय पढ़ें ये मंत्र

दधि-शंख-तुषाराभं क्षीरोदार्णव-सम्भवम्।
नमामि शशिनं सोमं शंभोर्मुकुट-भूषणम्।
OCT 10, 2025 20:23 IST

करवा चौथ व्रत के पारण के बाद क्या खा सकते हैं?

करवा चौथ व्रत के पारण के बाद महिलाएं हल्का और पोषक आहार लेना पसंद करती हैं। आमतौर पर व्रत खोलने के बाद फल जैसे केले, सेब या खजूर खाए जाते हैं ताकि शरीर को तुरंत ऊर्जा मिले। इसके बाद लोग सुपारी, गुड़, मिश्री, या दही के साथ थोड़ी मिठाई खा सकते हैं। कुछ परिवारों में खिचड़ी, दाल-चावल, और सब्जी भी बनाई जाती है जो हल्की और पचने में आसान होती है। व्रत के बाद भारी या तैलीय भोजन से बचना अच्छा रहता है ताकि पाचन ठीक से हो। सबसे ज़रूरी बात है कि पानी और जूस का सेवन भी पर्याप्त करें ताकि शरीर हाइड्रेट रहे।
OCT 10, 2025 20:15 IST

करवा चौथ 2025 LIVE: करवा माता की आरती

ओम जय करवा मैया , माता जय करवा मैया।
जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नइया..
ओम जय करवा मैया।

सब जग की हो माता, तुम हो रुद्राणी।
यश तुम्हारा गावत, जग के सब प्राणी.. ओम जय करवा मैया।
कार्तिक कृष्ण चतुर्थी, जो नारी व्रत करती।
दीर्घायु पति होवे , दुख सारे हरती..
ओम जय करवा मैया। होए सुहागिन नारी, सुख संपत्ति पावे।
गणपति जी बड़े दयालु, विघ्न सभी नाशे..
ओम जय करवा मैया।

करवा मैया की आरती, व्रत कर जो गावे।
व्रत हो जाता पूरन, सब विधि सुख पावे..
ओम जय करवा मैया।
OCT 10, 2025 20:09 IST

Ganesh Ji Ki Aarti Lyrics: गणेज जी की आरती

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।

माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा।

लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।

बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।

कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
OCT 10, 2025 19:44 IST

करवा चौथ की कहानी

करवा चौथ के दिन सुहागिनें ये व्रत कथा जरूर सुनती-सुनाती हैं। कथा इस प्रकार है...प्राचीनकाल में एक साहुकार के सात पुत्र और एक पुत्री थी। जब पुत्री बड़ी हुई तो उसका विवाह कर दिया गया। जब कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी आई तो कन्या ने करवा चौथ का व्रत रखा। लेकिन सात भाइयों की लाडली बहन को चंद्रोदय से पहले ही भूख सताने लगी। उसका मुरझाया हुआ चेहरा उसके भाइयों से देखा नहीं गया। अत: वे कुछ उपाय सोचने लगे।

उन्होंने अपनी बहन से चंद्रोदय से पहले ही भोजन करने को कहा लेकिन वह नहीं मानी। उसने कहा जब तक चांद नहीं निकलेगा वह भोजन नहीं करेगी। तब भाइयों ने एक योजना बनाई और पीपल के वृक्ष की आड़ में प्रकाश करके कहा- देखो ! चंद्रोदय हो गया। उठो, अर्घ्य देकर भोजन करो। बहन भाइयों की ये चाल समझ नहीं पाई और उसने नकली चांद को अर्घ्य देकर अपना व्रत खोल लिया। भोजन करते ही उसका पति मर गया। वह रोने चिल्लाने लगी। दैवयोग से उस समय इन्द्राणी देवदासियों के साथ वहां से जा रही थीं। रोने की आवाज सुन कर वह साहुकार की पुत्री के पास गईं और उससे रोने का कारण पूछा।

उस कन्या ने सब हाल कह सुनाया। तब इन्द्राणी ने कहा- ‘तुमने करवा चौथ के व्रत में चंद्रोदय से पूर्व ही अन्न-जल ग्रहण कर लिया, इस कारण ही ऐसा हुआ है। अब यदि तुम मृत पति की सेवा करती हुई बारह महीनों तक प्रत्येक चौथ को यथाविधि व्रत करोगी, फिर करवा चौथ को विधिवत गौरी, शिव, गणेश, कार्तिकेय सहित चंद्रमा का विधिवत पूजन करोगी और चंद्र उदय के बाद अर्ध्य देकर अन्न-जल ग्रहण करोगी तो तुम्हारे पति अवश्य जीवित हो उठेंगे।’

ब्राह्मण कन्या ने ठीक ऐसा ही किया। उसने 12 माह की चौथ सहित विधिपूर्वक करवा चौथ का व्रत किया। व्रत के प्रभाव से उनका मृत पति जीवित हो गया। कहते हैं जो भी महिला करवा चौथ का व्रत विधि विधान रखती है उसके पति को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
OCT 10, 2025 19:24 IST

करवा चौथ 2025 शाम का पूजा का समय

करवा चौथ 2025 की शाम की पूजा का समय 5:57 बजे से शुरू हुआ और 7:11 बजे तक ही इसकी पूजा का समय था। इस तरह पूजा करने के लिए व्रती महिलाओं को करीब 1 घंटे 14 मिनट का समय मिला।
OCT 10, 2025 19:15 IST

ओम जय करवा मैया आरती

ओम जय करवा मैया , माता जय करवा मैया।

जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नइया..

ओम जय करवा मैया।

सब जग की हो माता, तुम हो रुद्राणी।

यश तुम्हारा गावत, जग के सब प्राणी.. ओम जय करवा मैया।

कार्तिक कृष्ण चतुर्थी, जो नारी व्रत करती।

दीर्घायु पति होवे , दुख सारे हरती..

ओम जय करवा मैया। होए सुहागिन नारी, सुख संपत्ति पावे।

गणपति जी बड़े दयालु, विघ्न सभी नाशे..

ओम जय करवा मैया।

करवा मैया की आरती, व्रत कर जो गावे।

व्रत हो जाता पूरन, सब विधि सुख पावे..

ओम जय करवा मैया।
OCT 10, 2025 18:57 IST

करवा चौथ की व्रत कथा (Karwa Chauth Ki Vrat Katha In Hindi)

एक साहूकार के सात लड़के और एक लड़की थी। सातों भाई अपनी बहन से बहुत प्रेम करते थे और एक साथ बैठकर खाना खाते थे। बहन की शादी के बाद पहली बार करवा चौथ आया और उस वक्त अपने मायके थी। रात के समय जब साहूकार के सभी लड़के भोजन करने बैठे तो उन्होंने अपनी बहन से भी भोजन करने को कहा। बहन ने कहा कि आज करवा चौथ का व्रत है, चांद को अर्घ्य देकर ही भोजन करूंगी। बहन को भूख से व्याकुल देख भाइयों ने नगर के बाहर एक पेड़ पर चढ़कर अग्नि जला दी और छलनी में से चांद दिखा दिया। भाइयों ने कहा कि देखो चांद निकल आया है, अब तुम अर्घ्य देकर खाना खालो। साहूकार की बेटी ने अपनी भाभियों से कहा, देखो चांद निकल आया है, तुम लोग भी अर्घ्य देकर भोजन कर लो। ननद की बात सुनकर भाभियों ने कहा कि अभी चांद नहीं निकला है, तुम्हारे भाइयों ने अग्नि जलाकर उसके प्रकाश को चांद के रूप में तुमको दिखा रहे हैं। साहुकार की बेटी ने भाभियों की बात नहीं सुनी और अर्घ्य देकर भोजन करना शुरू कर दिया। पहला टुकड़ा तोड़ा तो उसमें बाल निकल आया, दूसरे पर छींक आ गई और तीसरा टुकड़ा जैसे ही तोड़ा तो ससुराल से पति की मृत्यु की खबर प्राप्त होती है। पति की मृत्यु खबर सुनकर वह रोने लगी और फिर भाभियों ने पूरी घटना के बारे में बताया और कहा कि ऐसा करने से करवा माता और चंद्र देवता नाराज हो गए हैं। इस बात को सुनकर साहूकार की बेटी प्रण लिया कि वह अपने पति का अंतिम संस्कार नहीं करने देगी और अपने पति के प्राण वापस लाकर रहेगी। एक साल बाद करवा चौथ आता है और वह फिर भाभियों के साथ व्रत का संकल्प लेती है और पूरे विधि विधान के साथ भगवान गणेश और करवा माता की पूजा करती है। इसके बाद उसका श्रीगणेश करते हुए जीवित हो उठता है। करवा ने कहा कि इस मगरमच्छ ने मेरे पति के पैर पकड़ लिया था इसलिए आप इसको मृत्युदंड दें और नरक में ले जाएं। यमराज ने कहा कि अभी मगर की आयु शेष है इसलिए समय से पहले मृत्यु नहीं दे सकते। करवा ने कहा कि अगर आप मगरमच्छ को मृत्युदंड देकर मेरे पति को चिरायु का वरदान नहीं देंगे तो मैं अपने तपोबल के माध्यम से आपको नष्ट कर दूंगी। करवा की बात सुनकर यमराज और चित्रगुप्त चौंक गए और सोच में पड़ गए कि आखिर क्या किया जाए। तब यमराज ने मगर को यमलोक भेज दिया और करवा के पति को चिरायु का आशीर्वाद दिया। चित्रगुप्त ने भी करवा को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दिया और कहा कि तुमने अपने पति के प्राणों की रक्षा की है, उससे मैं बेहद प्रसन्न हूं। मैं वरदान देता हूं कि आज की तिथि के दिन जो महिला आस्था और विश्वास के साथ तुम्हारा व्रत करेगी, उसके सौभाग्य की रक्षा मैं स्वयं करूंगा। उस दिन कार्तिक मास की चतुर्थी तिथि थी। जिससे करवा और चौथ के मिलने से इस व्रत का नाम करवा चौथ पड़ा। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर पांडवों की पत्नी द्रौपदी ने इस व्रत को किया था, जिसका उल्लेख वराह पुराण में मिलता है।
OCT 10, 2025 18:44 IST

करवा चौथ मंत्र (Karwa Chauth Mantra)

करकं क्षीरसंपूर्णा तोयपूर्णमयापि वा।
ददामि रत्नसंयुक्तं चिरंजीवतु मे पतिः॥
इति मन्त्रेण करकान्प्रदद्याद्विजसत्तमे।
सुवासिनीभ्यो दद्याच्च आदद्यात्ताभ्य एववा।।
एवं व्रतंया कुरूते नारी सौभाग्य काम्यया।
सौभाग्यं पुत्रपौत्रादि लभते सुस्थिरां श्रियम्।।
देहि सौभाग्यं आरोग्यं देहि मे परमं सुखम।
रूपं देहि, जयं देहि, यशो देहि द्विषो जहि।।
OCT 10, 2025 18:25 IST

करवा माता का स्वरूप कैसा है?

करवा माता की पारंपरिक छवि में वे एक स्त्री रूप में होती हैं, जिनके हाथों में करवा (मिट्टी का पात्र) होता है, जो सतीत्व और सौभाग्य का प्रतीक है। कभी‑कभी उनके साथ पति-पत्नी, या चंद्रमा को अर्घ्य देने वाली महिलाएँ भी चित्रित होती हैं।
OCT 10, 2025 18:14 IST

बुढ़िया और गणेश जी की करवा चौथ की कहानी

बहुत समय पहले की बात है। एक अन्धी बुढ़िया थी जिसका एक लड़का और बहू थी। वो लोग बहुत गरीब थे। वह अन्धी बुढ़िया रोजाना गणेश जी की पूजा किया करती थी। गणेश जी उस बुढ़िया से प्रसन्न होकर एक दिन साक्षात् सन्मुख आकर कहते हैं कि मैं आपकी पूजा से प्रसन्न हूं आपको जो वर मांगना है वो मांग लें। बुढिया कहती है, मुझे मांगना नहीं आता तो कैसे और क्या मांगू।

तब गणेश जी बोले कि अपने बहू- बेटे से पूछकर मांग लो। तब बुढिया ने अपने पुत्र और वधु से पूछा तो बेटा बोला कि धन मांग ले और बहु ने कहा की पोता मांग लें। तब बुढ़िया ने सोचा कि ये तो अपने-अपने मतलब की बातें कर रहे हैं। फिर बुढ़िया ने पड़ोसियों से पूछा तो, पड़ोसियों ने कहा कि बुढ़िया तेरी थोड़ी सी जिंदगी बची है। क्यूँ मांगे धन और पोता, तू तो केवल अपने नेत्र मांग ले जिससे तेरी बाकी की जिंदगी सुख से व्यतीत हो जाए।

उस बुढ़िया ने बेटे और बहू तथा पडौसियों की बातें सुनकर घर में जाकर सोचा, कि क्यों न ऐसी चीज मांग लूं जिसमें बेटा बहू और मेरा सबका ही भला हो। जब दूसरे दिन श्री गणेश जी आये और बोले, कि आपको क्या मांगना है कृप्या बताइए? हमारा वचन है जो आप मांगेगी सो वो हो जाएगा। गणेश जी के वचन सुनकर बुढ़िया बोली, हे गणराज! यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो मुझे नौ करोड़ की माया दें, निरोगी काया दें, अमर सुहाग दें, आँखों में प्रकाश दें, नाती पोते दें, और समस्त परिवार को सुख दें। फिर अंत में मोक्ष दें।

बुढ़िया की बात सुनकर गणेश जी बोले बुढ़िया माँ तूने तो मुझे ठग लिया। खैर जो कुछ तूने मांग लिया वह सभी तुझे मिलेगा। यूँ कहकर गणेश जी अंतर्ध्यान हो गये। हे गणेश जी! जैसे बुढिया माँ को मांगे अनुसार आपने सब कुछ दिया वैसे ही सबको देना। और हमको भी देने की कृपा करना।
OCT 10, 2025 18:10 IST

माता पार्वती और भगवान शिव की कथा

करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घ आयु के लिए रखती हैं। इस व्रत को प्राचीन काल से रखा जा रहा है। पौराणिक कथा के अनुसार ये व्रत सबसे पहले माता पार्वती ने भगवान शिव के लिए रखा था। ऐसा माना जाता है कि करवा चौथ के दिन चंद्रमा की पूजा करने का भी विशेष महत्व है, क्योंकि इस दिन चंद्रमा की पूजा करने से घर परिवार में सुख समृद्धि आती है। ये व्रत सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार महाभारत काल में अर्जुन जब तपस्या करने के लिए नीलगिरि पर्वत पर थे। उस समय द्रौपदी ने अर्जुन की रक्षा के लिए कृष्ण से मदद ली थी। तब कृष्ण भगवान ने द्रौपदी को निर्जला व्रत रखने को कहा और शिव पार्वती की पूजा करने के लिए कहा। इस व्रत के बाद अर्जुन सुरक्षित वापस आ गए। उसके बाद करवा चौथ का व्रत रखा जानें लगा।
OCT 10, 2025 17:55 IST

करवा चौथ की गणेश जी वाली कथा

बहुत समय पहले की बात है। एक अन्धी बुढ़िया थी जिसका एक लड़का और बहू थी। वो लोग बहुत गरीब थे। वह अन्धी बुढ़िया रोजाना गणेश जी की पूजा किया करती थी। गणेश जी उस बुढ़िया से प्रसन्न होकर एक दिन साक्षात् सन्मुख आकर कहते हैं कि मैं आपकी पूजा से प्रसन्न हूं आपको जो वर मांगना है वो मांग लें। बुढिया कहती है, मुझे मांगना नहीं आता तो कैसे और क्या मांगू।

तब गणेश जी बोले कि अपने बहू- बेटे से पूछकर मांग लो। तब बुढिया ने अपने पुत्र और वधु से पूछा तो बेटा बोला कि धन मांग ले और बहु ने कहा की पोता मांग लें। तब बुढ़िया ने सोचा कि ये तो अपने-अपने मतलब की बातें कर रहे हैं। फिर बुढ़िया ने पड़ोसियों से पूछा तो, पड़ोसियों ने कहा कि बुढ़िया तेरी थोड़ी सी जिंदगी बची है। क्यूँ मांगे धन और पोता, तू तो केवल अपने नेत्र मांग ले जिससे तेरी बाकी की जिंदगी सुख से व्यतीत हो जाए।

उस बुढ़िया ने बेटे और बहू तथा पडौसियों की बातें सुनकर घर में जाकर सोचा, कि क्यों न ऐसी चीज मांग लूं जिसमें बेटा बहू और मेरा सबका ही भला हो। जब दूसरे दिन श्री गणेश जी आये और बोले, कि आपको क्या मांगना है कृप्या बताइए? हमारा वचन है जो आप मांगेगी सो वो हो जाएगा। गणेश जी के वचन सुनकर बुढ़िया बोली, हे गणराज! यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो मुझे नौ करोड़ की माया दें, निरोगी काया दें, अमर सुहाग दें, आँखों में प्रकाश दें, नाती पोते दें, और समस्त परिवार को सुख दें। फिर अंत में मोक्ष दें।

बुढ़िया की बात सुनकर गणेश जी बोले बुढ़िया माँ तूने तो मुझे ठग लिया। खैर जो कुछ तूने मांग लिया वह सभी तुझे मिलेगा। यूँ कहकर गणेश जी अंतर्ध्यान हो गये। हे गणेश जी! जैसे बुढिया माँ को मांगे अनुसार आपने सब कुछ दिया वैसे ही सबको देना। और हमको भी देने की कृपा करना।
OCT 10, 2025 17:25 IST

करवा चौथ का पूजा विधि

  • करवा चौथ की पूजा शाम में ही होती है तो पूजा से पहले स्नान कर साफ कपड़े पहनें और पूजन स्थान को स्वच्छ करें।
  • पूजा की चौकी पर करवा माता की तस्वीर रखें।
  • सबसे पहले कलश की स्थापना करेंगे तो कलश में सिक्का, सुपारी, हल्दी की गांठ, थोड़े अक्षत जरूर डालें।
  • कलश के ऊपर आम या अशोक के 5 से 7 पत्ते रखें।
  • फिर कलश का मुंह किसी पात्र से ढक दें और उसके ऊपर थोड़े से अक्षत डाल दें।
  • फिर कलश पर ही घी का दीपक भी रख दें।
  • अब एक करवा लेकर उसमें जल भकर रखें।
  • फिर करवे के छेद में 4 सींकें लगा दें। करवे के अंदर आप चांदी का सिक्का या अंगूठी जरूर डालें।
  • इसके बाद इसे किसी चीज से ढक दें और उसके मुख पर कुछ मीठा रख दें।
  • इसके बाद एक करवा और तैयार करना है जिसे आप दान करेंगी। आप चाहें तो खांड का करवा भी ले सकती हैं।
  • फिर करवे के अंदर खील, बताशे, मिठाई, गुलगुले, आदि चीजें भर लें।
  • जो महिलाएं घर पर अकेले में करवा चौथ की पूजा करती हैं वो दो करवे भरती हैं एक अपने लिए और एक माता गौरी के लिए।
  • पूजा स्थान पर वो छलनी भी रखें जिससे आपको चांद को अर्घ्य देना है।
  • पूजा स्थल पर कटोरी में गेहूं भरकर भी जरूर रखें।
  • इसके बाद धूप, दीप, चन्दन, रोली, सिन्दूर आदि से विधिवत पूजा करें।
  • इसके बाद हाथ में अक्षत लेकर व्रत कथा पढ़ें।
  • माता को सुहाग की सामग्री चढ़ाएं और भोग लगाएं।
  • अब करवा चौथ की आरती करें।
  • फिर चांद निकलते ही चंद्र दर्शन करें और चांद को अर्घ्य दें।
  • इसके बाद छलनी से चांद को देखते हुए पति के दर्शन करें और आशीर्वाद लें।
  • फिर पति के हाथ से पानी पीकर अपना व्रत खोल लें।
OCT 10, 2025 17:05 IST

साहूकार के सात लड़के और एक लड़की की पौराणिक कहानी

एक साहूकार के सात बेटे और सात बेटियां हुआ करती थीं। उसके बेटे अपनी बहनों से बहुत प्यार करते थे। साहूकार की पत्नी के साथ उसकी बहुएं और बेटियां भी करवा चौथ का व्रत रखती थीं। चौथ के दिन जब भाईयों ने भोजन करना शुरू किया, तो उन्होंने अपनी बहनों से भी भोजन करने के लिए कहा, लेकिन उनकी बहनों ने कहा कि वे चांद को अर्घ्य देकर ही अपना व्रत खोलेंगी। इस पर छोटे भाई को अपनी बहनों की हालत नहीं देखी गई और वह एक पेड़ पर चढ़कर एक छलनी में दीपक दिखाने लगा, जिससे बहनों को लगा कि चांद निकल आया। इस पर बहनों ने अपनी भाभियों को भी चांद निकलने के बारे में कहकर व्रत खोलने के लिए कहा। लेकिन, उनकी भाभियां इस बात पर राजी नहीं हुईं। हालांकि, बहनों ने भाभियों की बात नहीं मानी और दीपक को अर्घ्य देकर व्रत खोलना शुरू किया। जैसे ही बहनों ने पहला निवाला खाया, तो छींक आ गई। दूसरा टुकड़ा खाया, तो खाने में बाल आ गया। वहीं, तीसरा टुकड़ा खाया, तो पति की मृत्यु की खबर आ गई। इस पर वे बहुत दुखी हो जाती हैं, तो उनकी भाभियां बताती हैं कि व्रत को गलत तरीके से खोलने से उनके पति की मृत्यु हो गई है। हालांकि, बहनें बोलती हैं कि वे पति की अंतिम संस्कार नहीं करेंगी और अपनी सतित्त्व से अपनी पति को जीवन देंगी। वह दुखी होकर अपने पति के शव को लेकर एक साल तक बैठी रहीं और उस पर उगने वाली घास को इकट्ठा करती रहीं। बहनों ने पूरे साल चतुर्थी का व्रत किया और कार्तिक मास की चतुर्थी को करवा चौथ का व्रत किया। शाम को सुहिगानों से अनुरोध किया कि यम सूई ले लो, पिय सुई दे दो, मुझे अपने जैसी सुहागिन बना दो। इसके फलस्वरूप करवा माता और गणेश जी के आशीर्वाद से उनके पति जीवित हो गए। जैसे माता और गणेश जी ने उनके पति को अमर किया और वैसे ही सभी सुहागिनों के पति अमर रहे।
OCT 10, 2025 16:40 IST

गणेश जी की आरती

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

एक दंत दयावंत,
चार भुजा धारी ।
माथे सिंदूर सोहे,
मूसे की सवारी ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

पान चढ़े फल चढ़े,
और चढ़े मेवा ।
लड्डुअन का भोग लगे,
संत करें सेवा ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

अंधन को आंख देत,
कोढ़िन को काया ।
बांझन को पुत्र देत,
निर्धन को माया ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

'सूर' श्याम शरण आए,
सफल कीजे सेवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥